अहमदाबाद विमान हादसे के बाद जो तस्वीरें और बयान सामने आए, उनमें सबसे ज्यादा दिल को छूने वाला बयान एक पिता का था। किनल मिस्त्री के पिता ने कहा, “कल मैं बच्ची को छोड़ने आया था, सोचा नहीं था ढूंढने आना पड़ेगा।” एक दिन पहले जिस हवाई अड्डे पर वे अपनी बेटी को लंदन के लिए विदा करने आए थे, उसी जगह वे अब पहचान के लिए डीएनए सैंपल देने लौटे थे।
किनल मिस्त्री के पिता की कहानी
किनल मिस्त्री एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 से अहमदाबाद से लंदन जा रही थीं। हादसे के बाद उनके पिता अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सीधे सिविल अस्पताल की उस प्रक्रिया का हिस्सा बने, जिसमें लापता यात्रियों के परिजनों से डीएनए सैंपल लिए जा रहे थे। हादसे की आग इतनी भीषण थी कि कई शवों की पहचान चेहरे या सामान से संभव नहीं थी, इसलिए परिवारों को अपने ही खून के नमूने देने पड़े ताकि अपनों की शिनाख्त हो सके।
यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं थी। उस हफ्ते अहमदाबाद के अस्पताल के बाहर सैकड़ों परिवार इसी इंतजार में खड़े थे कि उन्हें अपने किसी की खबर मिले।

12 जून 2025 को क्या हुआ था?
एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (रजिस्ट्रेशन VT-ANB) अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान मेघानी नगर इलाके में बी.जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर पर गिरा। विमान ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक विमान में 230 यात्री और 12 क्रू सदस्य, यानी कुल 242 लोग सवार थे।
मौतों का आंकड़ा: हादसे के शुरुआती घंटों में जमीन पर मारे गए लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी। बाद में गुजरात सरकार ने पुष्टि की कि कुल 260 लोगों की जान गई, जिनमें विमान में सवार 241 लोग और जमीन पर मौजूद 19 लोग शामिल थे। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक 260 में से 254 की पहचान डीएनए जांच से हुई और बाकी की पहचान चेहरे की पहचान तकनीक से की गई। विमान में सवार सिर्फ एक यात्री, ब्रिटेन के लीसेस्टर के रहने वाले विश्वाशकुमार रमेश, जीवित बचे।
डीएनए पहचान कैसे होती है?
- लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदार (माता-पिता, भाई-बहन या बच्चे) का रक्त या लार का सैंपल लिया जाता है।
- फोरेंसिक लैब में इस सैंपल की तुलना बरामद अवशेषों से मिले डीएनए से की जाती है।
- मिलान होने पर ही शव या अवशेष परिवार को सौंपे जाते हैं।
आम तौर पर इस प्रक्रिया में महीनों लग जाते हैं, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक इस हादसे में यह काम लगभग दो हफ्तों में पूरा कर लिया गया।
सरकारी मदद और हेल्पलाइन
गुजरात और केंद्र सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और सहायता की घोषणा की थी। एयर इंडिया ने परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 5691 444 भी जारी किया था।
अब जांच कहां तक पहुंची? (आगे क्या)
एएआईबी ने 12 जुलाई 2025 को प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। हादसे की पहली बरसी पर जारी दूसरी अंतरिम रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा कि जांच में काफी प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के नियमों के तहत समीक्षा और परामर्श पूरा होने के बाद ही जारी होगी। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार एएआईबी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि अंतिम रिपोर्ट का मसौदा अक्टूबर में तैयार हो सकता है। इसलिए हादसे के कारण पर अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना ही सही है।
आम यात्रियों और परिवारों पर क्या असर?
इस हादसे ने भारत में विमानन सुरक्षा, पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया और हादसे की जांच की पारदर्शिता पर बड़ी बहस छेड़ी है। जो परिवार अब भी मुआवजे या दस्तावेजों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें एयर इंडिया और सरकारी विभागों की आधिकारिक हेल्पलाइन से ही संपर्क करना चाहिए और अफवाहों या फर्जी कॉल से सावधान रहना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
अहमदाबाद विमान हादसे में कुल कितनी मौतें हुईं?
आधिकारिक आंकड़े के अनुसार कुल 260 लोगों की मौत हुई, जिनमें विमान में सवार 241 और जमीन पर मौजूद 19 लोग शामिल हैं।
शवों की पहचान कैसे की गई?
ज्यादातर, यानी 254 मामलों में डीएनए मिलान से और बाकी में चेहरे की पहचान तकनीक से।
क्या हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट आ चुकी है?
इस खबर के अपडेट तक एएआईबी की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई थी। ताजा स्थिति के लिए aaib.gov.in देखें।
फ्लाइट AI171 कहां जा रही थी?
यह उड़ान अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही थी।

