उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को देश की पहली “AI सिटी” के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने बताया है कि इंडिया AI मिशन के तहत उत्तर प्रदेश में AI इकोसिस्टम के विकास के लिए ₹10,732 करोड़ की योजना सामने रखी गई है। इसमें 10,000 GPU, बहुभाषी AI मॉडल और AI इनोवेशन सेंटर जैसे घटक शामिल बताए गए हैं।
AI सिटी क्या है और कहां बनेगी?
उत्तर प्रदेश सरकार के निवेश पोर्टल (Invest UP) के अनुसार AI सिटी को लखनऊ के वृंदावन योजना आईटी सिटी इलाके में प्रस्तावित किया गया है। पूरी जमीन करीब 258.59 एकड़ की है और AI सिटी का पहला चरण 20 से ज्यादा एकड़ में बनाने की योजना है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इसमें AI कंपनियों, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (GPU सेंटर), टेक पार्क, इन्क्यूबेशन सेंटर और रिसर्च लैब को एक ही जगह पर लाने की सोच है। यह परियोजना पीपीपी (सरकारी-निजी भागीदारी) मॉडल पर आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने इच्छुक कंपनियों से रुचि पत्र (EOI) भी मांगे हैं।
इसे आम भाषा में ऐसे समझिए: जैसे किसी शहर में आईटी पार्क होता है, वैसे ही यहां AI कंपनियां, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और शोध संस्थान एक ही परिसर में साथ काम करेंगे, ताकि नए प्रयोग और रोजगार तेजी से बढ़ें।
₹10,732 करोड़ का आंकड़ा: क्या है पूरी बात?
खबर में जिस ₹10,732 करोड़ का जिक्र है, उसे लेकर एक बात साफ रखना जरूरी है। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में राष्ट्रीय स्तर के इंडिया AI मिशन को ₹10,371.92 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी थी, जिसमें 10,000 या उससे ज्यादा GPU की सार्वजनिक कंप्यूटिंग क्षमता तैयार करने का लक्ष्य है। उत्तर प्रदेश सरकार ने ₹10,732 करोड़ की जो बात कही है, वह राज्य सरकार के दावे के रूप में हिंदुस्तान टाइम्स ने छापी है। इसलिए पाठकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ये दोनों आंकड़े अलग स्रोतों के हैं, और राज्य की ओर से इस्तेमाल हो रही रकम का अंतिम ब्योरा सरकारी घोषणाओं से ही पक्का होगा। राज्य बजट 2025-26 में लखनऊ में AI सिटी के विकास के लिए शुरुआती तौर पर ₹5 करोड़ का प्रावधान किया गया था (इंडियन एक्सप्रेस)।

लखनऊ में क्या-क्या सुविधाएं मिलने की बात है?
- 10,000 हाई-पावर GPU: भारी डेटा और जटिल गणनाओं को तेजी से पूरा करने वाली कंप्यूटिंग क्षमता।
- बहुभाषी AI मॉडल: भारत की अलग-अलग भाषाओं में काम करने वाले AI समाधान।
- AI इनोवेशन सेंटर: शोध, स्टार्टअप और नए प्रयोगों को बढ़ावा देने वाला केंद्र।
- AI नीति: राज्य सरकार ने ‘विजन 2047’ के अनुरूप AI नीति का मसौदा जल्द लाने की बात कही थी।
ट्रैफिक, स्वास्थ्य और शिक्षा में AI
सरकार के मुताबिक AI का इस्तेमाल सिर्फ तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रैफिक प्रबंधन, स्वास्थ्य और शिक्षा में भी इसे उतारने की योजना है। ‘AI प्रज्ञा’ अभियान के तहत 10 लाख से ज्यादा छात्रों, शिक्षकों, ग्राम प्रधानों, सरकारी कर्मचारियों और किसानों को AI, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग देने की बात कही गई, जिसमें Microsoft, Intel, Google और Guvi जैसी कंपनियां सहयोग कर रही हैं। खबर में फतेहपुर जिले में AI आधारित ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग केंद्र और वाराणसी में AI आधारित ट्रैफिक सिस्टम के परीक्षण का भी जिक्र था।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
अगर योजना जमीन पर उतरती है तो उत्तर प्रदेश के युवाओं को आईटी और AI सेक्टर में नौकरियों के नए मौके मिल सकते हैं, और स्थानीय स्टार्टअप को कंप्यूटिंग संसाधन सस्ते में उपलब्ध हो सकते हैं। आम नागरिकों को ट्रैफिक, स्वास्थ्य जांच और सरकारी सेवाओं में AI आधारित सुविधाओं का फायदा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल परियोजना शुरुआती चरण में है, इसलिए निर्माण की समय-सीमा और निवेश का अंतिम ढांचा सरकारी घोषणाओं और निविदाओं से तय होगा। ताजा जानकारी के लिए Invest UP की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
भारत की पहली AI सिटी कहां बन रही है?
उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ के वृंदावन योजना आईटी सिटी इलाके में देश की पहली समर्पित AI सिटी विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।
इंडिया AI मिशन का कुल बजट कितना है?
केंद्रीय कैबिनेट ने मार्च 2024 में इंडिया AI मिशन के लिए ₹10,371.92 करोड़ को मंजूरी दी थी।
क्या AI सिटी बनकर तैयार हो गई है?
नहीं, यह परियोजना प्रस्तावित और विकास के चरण में है। सरकारी दस्तावेजों में इसके पहले चरण की योजना बताई गई है।

