दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरे की लकीर पार करने के करीब पहुँच गया है। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 की सुबह सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आँकड़ों के अनुसार राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 391 दर्ज हुआ, जो ‘बहुत खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है और ‘गंभीर’ (Severe) स्तर की सीमा 400 के बेहद नजदीक है। दिवाली सिर्फ दो दिन दूर है, इसलिए यह आँकड़ा आम नागरिकों, स्कूलों और स्वास्थ्य विभागों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
कहाँ-कहाँ सबसे ज्यादा जहरीली हवा?
हिंदू और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुबह करीब 9 बजे कई इलाके पहले ही ‘गंभीर’ श्रेणी में चले गए थे। हिंदुस्तान टाइम्स पॉल्यूशन डैशबोर्ड (दोपहर 12 बजे अपडेट) के विश्लेषण में दिल्ली-एनसीआर के 31 मॉनिटरिंग स्टेशन severe और 28 स्टेशन very poor श्रेणी में बताए गए। सबसे खराब रीडिंग वाले प्रमुख स्टेशन इस प्रकार रहे:
- रोहिणी — 474
- पंजाबी बाग — 465
- जहांगीरपुरी — 458
- डीटीयू — 454
- आरके पुरम — 450
- मुंडका 446, विवेक विहार 438, सोनिया विहार 436, बवाना 435, अलीपुर 434
द हिंदू के अनुसार आईआईटी दिल्ली, आईटीओ, द्वारका, रोहिणी, पंजाबी बाग, अलीपुर, बवाना और जहांगीरपुरी समेत कई इलाकों में severe स्तर दर्ज हुआ। नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद भी overall ‘very poor’ श्रेणी में रहे। गुरुवार को दोपहर 4 बजे दिल्ली का 24 घंटे औसत AQI 369 था, यानी एक रात में प्रदूषण और बिगड़ा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: वाहन प्रदूषण ‘बड़ी वजह’
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान (suo motu) वाली सुनवाई में सख्त रुख अपनाया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत तथा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि राजधानी और एनसीआर को जोड़ने वाली सड़कों पर बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक वाहन उत्सर्जन की बड़ी वजह है।
सीजेआई ने कहा, “हम बातें करते रहते हैं, कभी-कभी बयान और सुझाव देते हैं, लेकिन बात यह है कि AQI पहले ही 400 के करीब पहुँच चुका है।” बेंच ने गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद की ओर जाने वाली सड़कों पर वाहनों की भीड़ का जिक्र करते हुए तत्काल, मध्यम और लंबी अवधि के उपायों की जरूरत बताई। इंडियन एक्सप्रेस और हिंदू दोनों में यह टिप्पणी दर्ज है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र की ओर से बताया कि औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण, निर्माण धूल, सड़क धूल और पराली जलाने समेत पाँच क्षेत्रों पर नियामक ढाँचा लागू है। उन्होंने कहा कि गुरुवार (5 नवंबर) को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान करीब 14% था। कोर्ट ने अगली सुनवाई दिवाली अवकाश के बाद 16 नवंबर तय की।
अगले तीन दिन और दिवाली का जोखिम
केंद्र सरकार की Air Quality Early Warning System के अनुसार दिल्ली की हवा अगले करीब तीन दिनों तक severe श्रेणी में रहने की आशंका जताई गई है। दि हिंदू और द वीक की रिपोर्टों में कहा गया है कि दिवाली (रविवार) तक राहत के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। इंडियन एक्सप्रेस में पीटीआई द्वारा उद्धृत विशेषज्ञों का आकलन है कि दिवाली पर AQI 500 के ऊपर ‘severe’ स्तर पर जा सकता है, खासकर अगर हवा कमजोर रही और पटाखों का धुआँ शहर में फँस गया।
सर्दी में हवा की गति घटने, तापमान गिरने, पंजाब-हरियाणा में पराली जलने और त्योहारों में पटाखों के उत्सर्जन से इंडो-गैंगेटिक मैदान में हर साल यही चक्र दोहराया जाता है। NASA सैटेलाइट आँकड़ों का हवाला देते हुए हिंदुस्तान टाइम्स ने गुरुवार को पंजाब-हरियाणा बेल्ट में सैकड़ों फार्म फायर गिने जाने की बात कही थी।
आप पर क्या असर?
CPCB के अनुसार severe स्तर स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकता है और पहले से बीमार लोगों पर असर गंभीर हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा/सीओपीडी मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टर आमतौर पर सुबह-शाम की सैर कम करने, बाहर जाते समय N95/N99 मास्क लगाने, खिड़कियाँ बंद रखने और अगर संभव हो तो एयर प्यूरीफायर चलाने की सलाह देते हैं। स्कूल/ऑफिस जा रहे लोगों को लोकल AQI चेक करना चाहिए—CPCB की SAMEER ऐप या आधिकारिक डैशबोर्ड पर अपने नजदीकी स्टेशन की रीडिंग देखी जा सकती है।
GRAP (Graded Response Action Plan) के तहत जब AQI बढ़ता है तो निर्माण प्रतिबंध, कुछ वाहनों पर रोक और स्कूली गतिविधियों में बदलाव जैसे कदम लागू हो सकते हैं। अभी नागरिकों को आधिकारिक CAQM/दिल्ली सरकार के आदेशों पर नजर रखनी चाहिए, ताकि अफवाहों के बजाय सही निर्देश मिलें।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट 16 नवंबर को फिर सुनवाई करेगा। बीच में दिवाली का मौसम है, इसलिए प्रशासनिक एजेंसियों पर दोहरी जिम्मेदारी है—पटाखों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करना और यातायात/निर्माण धूल पर नियंत्रण। आम लोगों के लिए सबसे व्यावहारिक कदम हैं: निजी वाहन कम चलाना जहाँ संभव हो, सार्वजनिक परिवहन/मेट्रो का उपयोग, और घर में स्वच्छ ईंधन/कम धुआँ वाले विकल्प।
संक्षेप में, 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का औसत AQI 391 पर पहुँचकर severe की दहलीज पर खड़ा है; दर्जनों इलाके पहले से ही severe जोन में हैं; सुप्रीम कोर्ट ने वाहन प्रदूषण को प्रमुख वजह करार दिया है; और दिवाली तक राहत की गारंटी नहीं है। सही जानकारी, सावधानी और आधिकारिक अपडेट ही इस मौसम में सबसे बड़ा बचाव हैं।
स्रोत: Central Pollution Control Board (CPCB) आँकड़े, The Hindu, Hindustan Times, The Indian Express (6 नवंबर 2026)। आँकड़े समय के साथ बदल सकते हैं—नवीनतम रीडिंग आधिकारिक डैशबोर्ड पर जाँचें।

