दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को ऐसी गिरावट आई जिसे वहां के अखबार “ब्लैक थर्सडे” कह रहे हैं। बेंचमार्क इंडेक्स KOSPI 454.59 अंक यानी 7.57% टूटकर 5,554.22 पर बंद हुआ। Reuters के मुताबिक कारोबार के दौरान यह 9.29% तक फिसल गया था और यह 7 अप्रैल के बाद का सबसे निचला बंद स्तर है। गिरावट इतनी तेज थी कि कोरिया एक्सचेंज (KRX) को पहले “साइडकार” और फिर सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को बाजार ने कुछ राहत दी और KOSPI 2.05% चढ़कर 5,668.05 पर बंद हुआ। गूगल ट्रेंड्स इंडिया पर “kospi index” आज सबसे ज्यादा खोजे जा रहे शब्दों में है—इसलिए समझना जरूरी है कि सियोल में हुआ क्या और भारतीय निवेशक इससे क्या सीखें।
गुरुवार को क्या-क्या हुआ: एक नजर में
- शुरुआत ही कमजोर: SBS के अनुसार KOSPI 5.59% नीचे 5,673.01 पर खुला।
- साइडकार: Korea JoongAng Daily के मुताबिक सुबह 9:07 बजे KOSPI और 9:12 बजे KOSDAQ पर बिकवाली वाला साइडकार सक्रिय हुआ।
- सर्किट ब्रेकर: दोपहर करीब 12:38 बजे KOSPI 8% से ज्यादा गिरा तो पूरे बाजार में 20 मिनट के लिए कारोबार रोक दिया गया। KOSDAQ पर यह करीब 12:23 बजे लगा। 29 जुलाई के बाद पहली बार दोनों बाजारों में एक ही दिन सर्किट ब्रेकर लगा। Reuters के अनुसार इस साल KOSPI पर यह 10वां और इतिहास में 16वां मौका था।
- बड़े शेयर धराशायी: Samsung Electronics 9.48% गिरकर 2,10,000 वॉन और SK hynix 11.06% टूटकर करीब 12.6 लाख वॉन पर आ गया।
- विदेशी बिकवाली: विदेशी निवेशकों ने करीब 3.6 ट्रिलियन वॉन (लगभग 2.7 अरब डॉलर) के शेयर बेचे—लगातार आठवें सत्र में शुद्ध बिकवाली।
- लगातार सातवां गिरावट वाला दिन: सितंबर 2024 के बाद यह सबसे लंबा गिरावट का सिलसिला है। Seoul Economic Daily के अनुसार इन सात सत्रों में KOSPI करीब 20.7% टूट चुका है।
गिरावट की वजह क्या रही
Reuters और Korea JoongAng Daily की रिपोर्टों में तीन बड़ी वजहें बताई गई हैं। पहली, अमेरिका में सितंबर की खुदरा महंगाई (CPI) महीने-दर-महीने 0.6% बढ़ी, जो अप्रैल के बाद सबसे तेज बढ़त है; इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें और बढ़ाने की आशंका तेज हुई। दूसरी, AI पर हो रहे भारी निवेश से पर्याप्त मुनाफा मिलेगा या नहीं, इस पर शक बढ़ा—न्यूयॉर्क में AI क्लाउड कंपनी CoreWeave का शेयर बुधवार को 15.5% गिरा और फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 4.3% टूटा। तीसरी, चीन की मेमोरी चिप कंपनी CXMT की ओर से सप्लाई बढ़ने की चिंता, जिसका सीधा असर Samsung और SK hynix जैसी कंपनियों पर पड़ता है। कोरियाई बाजार में चिप कंपनियों का वजन बहुत ज्यादा है, इसलिए झटका भी वहीं सबसे बड़ा लगा।
साइडकार और सर्किट ब्रेकर: आसान भाषा में
कोरिया एक्सचेंज के नियमों के मुताबिक जब KOSPI 200 फ्यूचर्स एक मिनट तक 5% या उससे ज्यादा ऊपर-नीचे रहता है, तो साइडकार लगता है। इसमें पूरा बाजार बंद नहीं होता, सिर्फ कंप्यूटर आधारित प्रोग्राम ट्रेडिंग के ऑर्डर पांच मिनट के लिए रोक दिए जाते हैं, ताकि मशीनों की बिकवाली से घबराहट और न बढ़े। सर्किट ब्रेकर इससे बड़ा कदम है: इंडेक्स पिछले बंद से 8% गिरकर एक मिनट टिका रहे तो सारा कारोबार 20 मिनट रुकता है, फिर 10 मिनट एक-मूल्य (सिंगल-प्राइस) ट्रेडिंग होती है। 15% पर दूसरा चरण और 20% पर उस दिन का कारोबार बंद करने का प्रावधान है।
भारत में भी ऐसी व्यवस्था है। NSE के मुताबिक Sensex या Nifty में 10%, 15% और 20% की चाल पर मार्केट-वाइड सर्किट ब्रेकर लगता है। दोपहर 1 बजे से पहले 10% की चाल पर 45 मिनट और 15% पर 1 घंटा 45 मिनट के लिए कारोबार रुकता है, जबकि 20% की चाल पर बाकी दिन के लिए ट्रेडिंग बंद हो जाती है। दिन में देर से ये सीमाएं छुएं तो रोक की अवधि घट जाती है। फर्क यह है कि भारत में “साइडकार” जैसा अलग प्रोग्राम-ट्रेडिंग ब्रेक नहीं है।
शुक्रवार को राहत, पर भरोसा अभी कच्चा
16 अक्टूबर को कोरियाई बाजार ने वापसी की। The Asia Business Daily के मुताबिक सुबह 10:25 बजे KOSPI 3% से ज्यादा ऊपर था और AP के अनुसार Samsung 4.2% व SK hynix 3.5% चढ़े। हालांकि ऊपरी स्तर टिके नहीं और Seoul Economic Daily की क्लोजिंग रिपोर्ट के मुताबिक इंडेक्स 2.05% बढ़त के साथ 5,668.05 पर बंद हुआ। विदेशी निवेशकों के रुख पर दिन में अलग-अलग आंकड़े आए—सुबह की रिपोर्टों में वे बिकवाल थे, जबकि क्लोजिंग रिपोर्ट उन्हें शुद्ध खरीदार बताती है। यानी एक दिन की तेजी को पूरी रिकवरी मान लेना जल्दबाजी होगी।
भारत का बाजार उलटी दिशा में क्यों चला
दिलचस्प बात यह रही कि जिस दिन KOSPI 7.57% गिरा, उसी दिन भारत में Sensex 1,533.72 अंक (2.11%) चढ़कर 74,315.61 और Nifty 374.65 अंक (1.66%) बढ़कर 22,997.35 पर बंद हुआ—चार महीने की सबसे बड़ी एक दिनी तेजी। The Times of India के अनुसार Geojit के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर का कहना था कि AI से जुड़े महंगे टेक शेयरों में वैश्विक बिकवाली के बीच भारत का “रिलेटिव अपील” बेहतर दिखा। हालांकि उसी दिन विदेशी फंड ₹5,285 करोड़ के शुद्ध बिकवाल रहे और घरेलू फंडों ने ₹3,319 करोड़ की खरीद की। शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक (Business Standard) Sensex 345.67 अंक की बढ़त के साथ 74,661.28 और Nifty 23,120.65 पर था। गुरुवार की तेजी का पूरा ब्योरा हमारी Sensex-Nifty रिपोर्ट में पढ़ें।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
- सीधा असर सीमित, अप्रत्यक्ष असर अहम: भारतीय सूचकांकों में चिप बनाने वाली कंपनियां लगभग नहीं हैं, इसलिए कोरिया जैसी सीधी चोट नहीं लगी। पर विदेशी निवेशक उभरते बाजारों को एक साथ तौलते हैं; कोरिया-ताइवान में घबराहट बढ़ी तो भारत में भी FPI प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
- विदेशी शेयर या फंड रखते हैं तो: जिनके पास अमेरिकी टेक, सेमीकंडक्टर या एशिया-केंद्रित फंड हैं, वे अपने पोर्टफोलियो में ऐसे शेयरों का हिस्सा जांचें। लीवरेज्ड ETF जैसे उत्पादों में नुकसान कई गुना हो सकता है—Korea JoongAng Daily के अनुसार कोरिया के कई खुदरा निवेशक इसी वजह से भारी घाटे में हैं।
- नजर किन बातों पर रखें: विश्लेषकों के मुताबिक अक्टूबर के आखिर में बड़ी टेक कंपनियों के नतीजे और अमेरिका में लंबी अवधि की ब्याज दरों की दिशा तय करेगी कि AI शेयरों में भरोसा लौटता है या नहीं। भारत में Q2 नतीजे और विदेशी फंडों की वापसी अहम संकेत होंगे।
- घबराहट में फैसला नहीं: सर्किट ब्रेकर जैसी व्यवस्था इसीलिए होती है कि अफरा-तफरी में लोग जल्दबाजी न करें। SIP या लंबी अवधि का निवेश करने वालों के लिए एक-दो दिन की चाल पर पूरी रणनीति बदलना आमतौर पर ठीक नहीं माना जाता।
नोट: यह लेख केवल जानकारी के लिए है, यह निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय लें। आंकड़े Reuters, Korea JoongAng Daily, The Asia Business Daily, SBS, Seoul Economic Daily, AP, The Times of India, Business Standard और NSE/कोरिया एक्सचेंज के नियमों पर आधारित हैं।


[…] […]