दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने अब सीधी निगरानी शुरू कर दी है। 10 से 12 अक्टूबर के बीच हुए प्रदर्शनों और उन पर पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इससे जुड़ी याचिकाओं के पूरे बैच पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। सबसे अहम आदेश यह रहा कि सभी कानून-प्रवर्तन एजेंसियां प्रदर्शनों से जुड़ी CCTV फुटेज और बाकी डिजिटल सामग्री सुरक्षित रखें।
कोई बड़ा अंतरिम निर्देश नहीं आया, पर सबूत बचाने का आदेश अहम है—हिरासत और मारपीट के आरोपों की सच्चाई आखिरकार इन्हीं वीडियो से तय होगी।
सुनवाई में क्या-क्या हुआ
CCTV और वीडियो सुरक्षित रखने का आदेश
Bar & Bench के मुताबिक बेंच ने कहा कि सभी कानून-प्रवर्तन एजेंसियां अपने पास मौजूद CCTV फुटेज या कोई भी डिजिटल सामग्री सुरक्षित रखें, और निजी लोग भी चाहें तो अपने पास की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रख सकते हैं। LiveLaw और The Hindu के अनुसार इसमें सुप्रीम कोर्ट परिसर की CCTV फुटेज भी शामिल है, जहां 12 अक्टूबर को राजनीतिक नेताओं का मार्च पहुंचा था।
जंतर-मंतर पर फिलहाल राहत नहीं, जवाब तलब
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने (डी-नोटिफिकेशन) के खिलाफ याचिका पर कोर्ट ने तुरंत कोई आदेश देने से इनकार किया, लेकिन दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अंतरिम राहत मांगी और दलील दी कि डी-नोटिफिकेशन को सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश से जोड़ा जा रहा है।
महिला पत्रकारों के लिए महिलाओं की कमेटी
नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया की ओर से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने प्रदर्शन कवर कर रही महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी का मुद्दा उठाया। CJI ने कहा कि पहली नजर में कोर्ट इस बात से सहमत है कि इस मामले की जांच करने वाली कमेटी में मुख्य रूप से या पूरी तरह महिलाएं हों। शिकायत करने को तैयार महिलाओं के नाम सीलबंद लिफाफे में देने की अनुमति भी दी गई।
पत्रकारों के डिवाइस
डिवाइस जब्ती के आरोप पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोई डिवाइस जब्त नहीं हुआ; कोर्ट ने कहा कि यह बात जवाबी हलफनामे में लिखकर दी जाए।
“कोई हमें दबाव में नहीं ला सकता”
12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर हुए मार्च को लेकर दायर याचिका पर भी नोटिस जारी हुआ। इस याचिका में राहुल गांधी समेत कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही और अदालत परिसरों के पास प्रदर्शनों के लिए दिशा-निर्देश की मांग है। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बताया, तो CJI ने साफ कहा—“कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं ला सकता।”
पूरा विवाद क्या है
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर रोक, जनपथ-कर्तव्य पथ इलाके में मोबाइल इंटरनेट बंद करने और भीड़ जुटने पर पाबंदियां लगीं। इसके बाद प्रदर्शनकारियों, वकीलों, पत्रकार संगठनों और कुछ सांसदों ने गैरकानूनी हिरासत और मारपीट के आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
आप पर क्या असर पड़ेगा
- प्रदर्शन के अधिकार पर: शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक हक है, पर पुलिस उसे नियंत्रित भी कर सकती है। यह केस तय करेगा कि यह संतुलन कहां बैठे।
- अगर आप किसी प्रदर्शन में थे: आपके फोन में मौजूद वीडियो या फोटो डिलीट न करें। कोर्ट ने निजी लोगों को भी अपनी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की छूट दी है; आगे जांच में यही सबूत काम आ सकते हैं।
- पत्रकारों के लिए: महिला कमेटी बनी तो फील्ड रिपोर्टिंग में सुरक्षा के लिए यह नजीर बन सकती है।
- आम दिल्लीवासी: मेट्रो या इंटरनेट बंद करने जैसे कदमों पर भी इन्हीं याचिकाओं में सवाल उठे हैं।
आगे क्या
अब केंद्र और दिल्ली पुलिस को सभी याचिकाओं पर जवाबी हलफनामा दाखिल करना है। अगली सुनवाई की तारीख रिपोर्ट्स में अभी सामने नहीं आई है। जंतर-मंतर पर फैसला पुलिस के जवाब के बाद होगा। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ जुटान का आह्वान किया है, इसलिए राजधानी में अगले कुछ दिन माहौल पर नजर बनी रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रदर्शन मामले में क्या आदेश दिया?
कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और सभी कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को CCTV व डिजिटल फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
क्या जंतर-मंतर फिर से प्रदर्शन स्थल बन गया?
नहीं। कोर्ट ने अभी कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया, सिर्फ दिल्ली पुलिस से डी-नोटिफिकेशन पर जवाब मांगा है।
राहुल गांधी से जुड़ी कौन-सी याचिका पर नोटिस हुआ?
12 अक्टूबर के मार्च पर दायर उस याचिका पर, जिसमें नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग है।
स्रोत: Bar & Bench, LiveLaw, The Hindu (लाइव अपडेट्स), 15 अक्टूबर 2026।


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