अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर लॉस एंजेलिस (LA) को नया मेयर मिलने जा रहा है और उनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं। केरल में जन्मीं सिटी काउंसिल मेंबर नित्या रमन ने मौजूदा मेयर करेन बास को हराने की ओर निर्णायक बढ़त बना ली है। अमेरिकी मीडिया संस्था डिसीजन डेस्क HQ (DDHQ) ने बुधवार शाम (अमेरिकी समय) उन्हें विजेता प्रोजेक्ट किया। अगर अंतिम गिनती में यही नतीजा रहता है, तो रमन लॉस एंजेलिस की पहली एशियाई-अमेरिकी मेयर और इस पद के लिए चुनी गई दूसरी महिला होंगी।
अब तक के नतीजे: कितने वोटों से आगे हैं रमन
लॉस एंजेलिस काउंटी के 4 नवंबर शाम 4:28 बजे (स्थानीय समय) के अपडेट के मुताबिक मेयर पद के रनऑफ में:
- नित्या रमन: 4,05,193 वोट (51.67%)
- करेन बास (मौजूदा मेयर): 3,79,069 वोट (48.33%)
यानी रमन करीब 26,124 वोट (लगभग 3.3 प्रतिशत अंक) से आगे हैं। कुल 7,84,262 वोट गिने जा चुके हैं, जो अनुमानित कुल वोटों का लगभग दो-तिहाई है। ये आंकड़े अभी अंतिम नहीं हैं। काउंटी प्रशासन गुरुवार और 6 नवंबर को और वोटों की गिनती जारी करेगा। Deadline की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तरह रमन की बढ़त लगातार बढ़ी है, उसमें बास के लिए वापसी का रास्ता बहुत मुश्किल दिख रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि चुनाव की रात शुरुआती गिनती में बास आगे थीं। 3 नवंबर रात करीब 11 बजे तक उनकी बढ़त एक प्रतिशत से ज्यादा थी, लेकिन 4 नवंबर तड़के रमन आगे निकल गईं और फिर बढ़त बढ़ती गई। माना जा रहा है कि चुनाव के दिन वोट डालने वाले युवा मतदाताओं ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
कौन हैं नित्या रमन? केरल से लॉस एंजेलिस तक का सफर
नित्या वी. रमन का जन्म 28 जुलाई 1981 को केरल में एक तमिल परिवार में हुआ था। जब वह छह साल की थीं, उनका परिवार अमेरिका के लुइसियाना चला गया और बाद में मैसाचुसेट्स के बर्लिंगटन में बस गया। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से 2003 में सोशल स्टडीज में ग्रेजुएशन किया और 2008 में MIT से अर्बन प्लानिंग (शहरी नियोजन) में मास्टर्स की डिग्री ली। 22 साल की उम्र में वह अमेरिकी नागरिक बनीं।
पढ़ाई के बाद रमन भारत लौटीं और चेन्नई में Transparent Chennai नाम की रिसर्च संस्था शुरू की, जिसका मकसद शहर में साफ-सफाई और नागरिक सुविधाओं से जुड़े आंकड़े सामने लाकर सुधार करवाना था। 2013 में वह लॉस एंजेलिस आईं और शहर के प्रशासनिक अधिकारी (City Administrative Officer) के दफ्तर में काम किया। 2017 में उन्होंने बेघर लोगों की मदद के लिए SELAH Neighborhood Homeless Coalition बनाई। वह Time’s Up Entertainment की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी रहीं।
राजनीति में उनकी बड़ी एंट्री 2020 में हुई, जब उन्होंने LA सिटी काउंसिल के चौथे डिस्ट्रिक्ट में मौजूदा काउंसिल मेंबर डेविड रयू को 52.9% वोटों से हराया। यह 17 साल में पहली बार था जब किसी चैलेंजर ने मौजूदा काउंसिल मेंबर को हराया था। 2024 में वह दोबारा चुनी गईं। वह डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ी हैं और डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका (DSA) की सदस्य भी हैं।
किन मुद्दों पर जीता चुनाव
यह मुकाबला दो डेमोक्रेट नेताओं के बीच था। 2 जून के प्राइमरी (जिसमें सभी दलों के उम्मीदवार एक साथ लड़ते हैं) के बाद रमन और बास टॉप-2 में पहुंचीं, जबकि पूर्व रियलिटी टीवी स्टार स्पेंसर प्रैट रेस से बाहर हो गए। The 19th News की रिपोर्ट के मुताबिक रमन ने चुनाव आखिरी समय में लड़ने का फैसला किया था और उनका प्रचार मुख्य रूप से इन मुद्दों पर टिका रहा:
- घरों की कमी और महंगा किराया: शहरी योजनाकार के तौर पर उन्होंने ज्यादा घर बनाने और नियमों में ढील की बात की।
- बिजली-पानी के बिल: नगर निगम की यूटिलिटी सेवाओं को सुधारने और खर्च घटाने के वादे।
- बेघरों की समस्या: उन्होंने बास की प्रमुख योजना “Inside Safe” की आलोचना की। रिपोर्ट के अनुसार इस योजना पर 30 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च हुए और करीब 6,000 लोगों को घर दिया गया, लेकिन उनमें से लगभग 40% फिर सड़कों पर लौट गए।
शहर के कंट्रोलर केनेथ मेजिया के समर्थन से भी उनके अभियान को शुरुआत में बड़ा फायदा मिला। युवा मतदाताओं में उनकी पकड़ खास तौर पर मजबूत मानी गई।
भारत के लिए क्यों खास है यह जीत
पिछले कुछ सालों में अमेरिका की स्थानीय और राष्ट्रीय राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की मौजूदगी लगातार बढ़ी है। न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी के बाद अब लॉस एंजेलिस जैसे बड़े शहर की कमान भी भारतीय मूल की नेता के हाथ में जाती दिख रही है। यही वजह है कि भारत में गूगल पर “nithya raman” तेजी से सर्च हो रहा है।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि रमन अमेरिकी नागरिक हैं और उनका चुनाव पूरी तरह लॉस एंजेलिस के स्थानीय मुद्दों पर लड़ा गया। भारत-अमेरिका रिश्तों या वीजा जैसी नीतियों पर किसी शहर के मेयर का सीधा अधिकार नहीं होता, ये फैसले अमेरिका की संघीय सरकार करती है। फिर भी LA में बड़ी संख्या में भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय रहता है, और यह जीत प्रवासी भारतीयों के लिए प्रतीकात्मक रूप से बड़ी मानी जा रही है।
आगे क्या?
- अंतिम गिनती: बाकी करीब एक-तिहाई वोटों की गिनती अगले कुछ दिनों में होगी। 2022 में बास के चुनाव का नतीजा तय होने में करीब 10 दिन लगे थे, लेकिन इस बार तस्वीर जल्दी साफ होती दिख रही है।
- प्रमाणन और शपथ: सभी वोट गिने जाने और नतीजे आधिकारिक रूप से प्रमाणित होने के बाद रमन मेयर पद संभालेंगी।
- बड़ी चुनौतियां: नई मेयर के सामने बेघरों की समस्या, महंगे घर और 2028 ओलंपिक की तैयारी जैसी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी।
नोट: यह खबर 4 नवंबर (अमेरिकी समय) तक के अनौपचारिक नतीजों और DDHQ के प्रोजेक्शन पर आधारित है। अंतिम आधिकारिक नतीजे आना बाकी हैं। स्रोत: The Hill, Deadline, The 19th, Los Angeles Almanac (LA काउंटी आंकड़े)।

