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6 नवम्बर 2026, शुक्र

गुवाहाटी होटल शूटआउट के मुख्य आरोपी घनकांत गोगोई की शिवसागर में पुलिस एनकाउंटर में मौत: पुलिस बोली- रिवॉल्वर छीनकर भागने की कोशिश की, SI घायल

असम पुलिस की गाड़ी और जवान (फाइल फोटो)

असम के गुवाहाटी में 26 अक्टूबर को हुए होटल शूटआउट केस के मुख्य आरोपी घनकांत गोगोई (34) की बुधवार, 4 नवंबर 2026 तड़के शिवसागर जिले में पुलिस फायरिंग में मौत हो गई। उस शूटआउट में पांच लोगों की जान गई थी। पुलिस का कहना है कि गोगोई ने हिरासत से भागने की कोशिश की और एक अफसर की सर्विस रिवॉल्वर छीनने लगा, जिसके बाद जवाबी फायरिंग करनी पड़ी। यह घटना एक बार फिर असम में पुलिस मुठभेड़ों पर चल रही बहस के बीच आई है।

तड़के 3:10 बजे क्या हुआ? पुलिस का पक्ष

शिवसागर की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) पपोरी चेतिया के मुताबिक, घटना करीब 3:10 बजे गौरीसागर थाना क्षेत्र के फुलपानीचिगा इलाके में हुई। शिवसागर पुलिस की टीम गोगोई को गुवाहाटी से शिवसागर ला रही थी, क्योंकि वहां 2024 का एक बैंक धोखाधड़ी केस दर्ज है। इसके लिए पुलिस ने गुवाहाटी की अदालत से प्रोडक्शन वारंट लिया था।

पुलिस के अनुसार रास्ते में गोगोई ने शौच के लिए गाड़ी रुकवाई और फिर टीम पर हमला कर भागने की कोशिश की। SSP ने बताया कि उसने जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर देबाशीष शर्मा की सर्विस रिवॉल्वर छीनने की कोशिश की। हाथापाई में दो-तीन राउंड चले, जिनमें से दो गोलियां पुलिस वाहन पर लगीं। इसके बाद साथ चल रहे एक दूसरे पुलिसकर्मी ने अपने सर्विस हथियार से फायर किया। घायल गोगोई को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

SSP चेतिया ने गोगोई को “प्रशिक्षित शूटर” बताया और कहा कि उसके आपराधिक इरादों को देखते हुए पुलिस को एहतियात बरतनी पड़ी। सब-इंस्पेक्टर शर्मा के दाहिने पैर में चोट आई है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है। ध्यान रहे, घटना का यह पूरा ब्योरा पुलिस का बताया हुआ है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

26 अक्टूबर का होटल शूटआउट: पूरा मामला

26 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे पलटन बाजार थाने को गुवाहाटी के उलुबारी इलाके के होटल बिलास इन में फायरिंग की सूचना मिली थी। पुलिस पहुंची तो रिसेप्शन में चार लोग मृत मिले और दो घायल थे। घायलों में से एक की बाद में गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई।

मृतकों की पहचान भूदेव भराली (65), हेलेना भराली (58), देवर्षि कश्यप (39), रिनिका कश्यप (30) और नारायण दास (48) के रूप में हुई। इनमें चार एक ही परिवार के बताए गए। गोगोई को घटना के करीब एक घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था।

मामले की जांच के लिए असम पुलिस ने SIT बनाई। रिपोर्टों के मुताबिक SIT को शुरुआती जांच में लगा कि विवाद होटल की लीज, मरम्मत के खर्च और पैसों के लेन-देन को लेकर था। बताया गया है कि गोगोई ने 10 सितंबर 2025 को भराली परिवार से होटल पांच साल की लीज पर लिया था और मासिक किराया करीब ₹1.8 लाख तय हुआ था। SIT यह भी जांच रही है कि वारदात में इस्तेमाल .32 बोर की पिस्तौल गोगोई के पास कैसे आई। रिपोर्टों के अनुसार उसने अक्टूबर 2024 में नागालैंड के दीमापुर की एक दुकान से यह पिस्तौल 40 कारतूसों के साथ करीब ₹3 लाख में खरीदी थी।

मौत से एक दिन पहले कोर्ट में क्या हुआ था

मंगलवार, 3 नवंबर को सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद गुवाहाटी की अदालत ने गोगोई को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद शिवसागर पुलिस ने उसे पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े कथित लोन फ्रॉड केस में अपनी हिरासत में लिया। आरोप है कि उसने एक्सकेवेटर का लोन लेने के लिए जाली दस्तावेज लगाए थे। पुलिस के अनुसार वह छह मामलों में आरोपी था।

अहम बात यह है कि गोगोई के वकील ने पहले ही पुलिस हिरासत में उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इस पर गुवाहाटी की अदालत ने पुलिस को नियमित मेडिकल जांच और हिरासत में यातना से बचाव जैसे इंतजाम सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

असम में मुठभेड़ों पर पुराना सवाल

मई 2021 में हिमंत बिस्वा सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से असम में पुलिस मुठभेड़ों की संख्या पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 210 पुलिस मुठभेड़ दर्ज हुईं, जिनमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 180 से अधिक घायल हुए। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मई 2021 से जनवरी 2024 के बीच पुलिस फायरिंग की घटनाएं उससे पहले के दौर के मुकाबले करीब 20 गुना बढ़ीं। वहीं पुलिस का लगातार कहना रहा है कि ज्यादातर मामलों में आरोपी हिरासत से भागने या हथियार छीनने की कोशिश में घायल हुए या मारे गए।

ऐसे मामलों में कानून क्या कहता है

पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य केस में विस्तृत दिशानिर्देश तय किए थे। इनके तहत ऐसी हर घटना पर FIR दर्ज होनी चाहिए, स्वतंत्र एजेंसी (जैसे CID या दूसरे थाने की टीम) से जांच और मजिस्ट्रेट जांच होनी चाहिए, और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राज्य मानवाधिकार आयोग को सूचना दी जानी चाहिए। साथ ही इस्तेमाल हथियार जांच के लिए जमा कराने होते हैं और मृतक के परिजनों को तुरंत सूचना देनी होती है। इस केस में ऐसी कोई जांच औपचारिक रूप से शुरू हुई है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा

  • होटल शूटआउट केस: मुख्य आरोपी की मौत के बाद उसके खिलाफ ट्रायल नहीं चल सकेगा, लेकिन SIT हथियार की खरीद, सप्लाई और किसी दूसरे की भूमिका की जांच जारी रख सकती है।
  • मुठभेड़ की जांच: नियमों के मुताबिक इस फायरिंग की स्वतंत्र और मजिस्ट्रेट जांच होनी चाहिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बैलिस्टिक जांच से घटनाक्रम की पुष्टि होगी।
  • पीड़ित परिवारों के लिए: भराली और कश्यप परिवार के लिए न्याय का सवाल अब SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकेगा, जिसमें हत्या की वजह और साजिश का पूरा सच सामने आना है।

आप पर क्या असर

यह मामला दो बड़े सवाल सामने रखता है। पहला, हथियार आम लोगों तक कितनी आसानी से पहुंच रहे हैं, क्योंकि एक कारोबारी विवाद पांच लोगों की मौत तक पहुंच गया। दूसरा, हिरासत में आरोपियों की सुरक्षा, जिसके लिए अदालत ने खुद निर्देश दिए थे। अगर आप किसी किराये, लीज या कारोबारी विवाद में फंसे हैं, तो लिखित अनुबंध रखें और धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस या 112 पर शिकायत दर्ज कराएं।

यह खबर द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, PTI और इंडिया टुडे NE की रिपोर्टों पर आधारित है। मुठभेड़ का ब्योरा पुलिस के बयान पर आधारित है।

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