आंध्र प्रदेश के शहरी निकाय चुनावों में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाले TDP-जनसेना-BJP गठबंधन (NDA) ने बड़ी जीत दर्ज की है। 3 नवंबर को हुई मतगणना के नतीजों और रुझानों के मुताबिक गठबंधन ने ज्यादातर नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों पर कब्जा कर लिया है। सबसे ज्यादा चर्चा पुलिवेंदुला की है, जो पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी का गृह क्षेत्र है और जहां इस बार TDP ने चेयरपर्सन पद जीत लिया।
नतीजों की बड़ी तस्वीर
1 नवंबर को राज्य के 13 नगर निगमों और 79 नगर पालिकाओं-नगर पंचायतों में वोट डाले गए थे। मतगणना 3 नवंबर सुबह 8 बजे शुरू हुई। हिंदुस्तान टाइम्स ने राज्य चुनाव आयोग (SEC) के हवाले से बताया कि देर शाम तक गठबंधन 13 में से 4 नगर निगम और 86 में से 66 नगर पालिकाएं-नगर पंचायतें जीत चुका था और बाकी कई जगह आगे चल रहा था। डेक्कन हेराल्ड के अनुसार नगर पालिकाओं में TDP 57, जनसेना 17 और BJP 4 जगह आगे थी, जबकि YSRCP सिर्फ 4 जगह आगे थी। अखबार ने इसे करीब 90% निकायों पर NDA की जीत बताया।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक 17 नगर पालिकाओं में गठबंधन के चेयरपर्सन पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए थे, और इन्हें जोड़कर NDA का आंकड़ा 86 में से करीब 80 तक पहुंच गया। वार्ड स्तर पर भी गठबंधन लगभग 95% सीटें जीतता दिखा। शाम 6:05 बजे तक के आंकड़ों (डेली पायनियर) में 3,942 में से 2,866 वार्डों के नतीजे आए थे, जिनमें TDP को 1,986, YSRCP को 359, जनसेना को 349 और BJP को 119 वार्ड मिले थे। ध्यान रखें कि ये शुरुआती आंकड़े हैं, अंतिम आधिकारिक आंकड़े राज्य चुनाव आयोग जारी करेगा।
पुलिवेंदुला में YSRCP का किला ढहा
कडपा जिले का पुलिवेंदुला दशकों से वाई.एस. राजशेखर रेड्डी परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स और ETV भारत के मुताबिक यहां TDP उम्मीदवार तुगुतला गीता कुमारी ने चेयरपर्सन चुनाव करीब 13,875 वोटों से जीता। मनीकंट्रोल के अनुसार उन्होंने YSRCP की वाई.एस. प्रमीलम्मा को हराया, जो जगन की रिश्तेदार हैं। गठबंधन ने 40 में से 37 वार्ड (निर्विरोध जीते वार्ड मिलाकर) अपने नाम किए, जबकि YSRCP को सिर्फ 3 वार्ड मिले।
मतगणना से पहले YSRCP ने पूरे पुलिवेंदुला में दोबारा मतदान की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर मतगणना की अनुमति दे दी। कडपा जिले की बद्वेल, जम्मलमडुगु, कमलापुरम, मैदुकुरु, प्रोद्दुटूर, राजमपेट और येर्रागुंटला नगर पालिकाएं भी गठबंधन के खाते में गईं।
बड़े शहरों में किसे मिली मेयर की कुर्सी
इस बार मेयर का चुनाव सीधे जनता ने किया। राज्य के सबसे बड़े नगर निगम ग्रेटर विशाखापत्तनम (GVMC) में TDP की मुक्का श्रावणी बड़ी बढ़त के साथ आगे रहीं। विजयवाड़ा में जनसेना के वंगवीटी राधाकृष्ण जीत की ओर बढ़ते दिखे। टाइम्स ऑफ इंडिया और डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक गुंटूर में कोवेलमुडी लक्ष्मी अपर्णा, चित्तूर में काथरी हेमलता, नेल्लोर में रूप कुमार यादव और मछलीपट्टनम में अब्दुल आबिदा (सभी TDP) मेयर चुनाव जीत चुके थे। एलुरु में जनसेना के रेड्डी अप्पलनायडु जीते।
YSRCP के लिए एक राहत अनंतपुर से आई, जहां पार्टी के रमेश गौड़ मेयर चुने गए। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक यहां TDP के बागियों ने गठबंधन का वोट बांट दिया और BJP उम्मीदवार हार गए। नायडू के गृह क्षेत्र कुप्पम में गठबंधन ने सभी 32 वार्ड जीतकर क्लीन स्वीप किया, जबकि माचर्ला में भी सभी 36 वार्ड NDA के खाते में गए।
जगन का आरोप: “ये चुनाव नहीं, सिलेक्शन हैं”
नतीजों के बाद जगन मोहन रेड्डी ने X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि नामांकन, जांच, नाम वापसी, मतदान और मतगणना, हर चरण में गड़बड़ी हुई और YSRCP के पोलिंग एजेंटों को रोका गया। उन्होंने लिखा, “ये अब चुनाव नहीं, सिलेक्शन हैं” और चुनाव सुधार की मांग की। ये आरोप जगन की ओर से हैं; सत्तारूढ़ गठबंधन या राज्य चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
2021 से कितना बदला
यह नतीजा 2021 के निकाय चुनाव से बिल्कुल उलट है। तब YSRCP सत्ता में थी और उसने सभी 13 नगर निगम और 86 नगर पालिकाएं जीती थीं। 2024 के विधानसभा चुनाव में NDA की सत्ता में वापसी के बाद यह पहला बड़ा शहरी चुनाव था, इसलिए इसे नायडू सरकार के कामकाज पर शहरों की राय के रूप में देखा जा रहा है।
आप पर क्या असर पड़ेगा और आगे क्या
- शहरों में एक ही दल की सरकार: राज्य और ज्यादातर नगर निकायों में एक ही गठबंधन होने से सड़क, पानी, सफाई और टैक्स जैसे मुद्दों पर फैसले और फंड जारी होने में तेजी आ सकती है। लेकिन विपक्ष कमजोर होने से निगरानी की जिम्मेदारी अब नागरिकों पर भी ज्यादा होगी।
- सीधे चुने गए मेयर: जनता के सीधे वोट से चुने मेयर और चेयरपर्सन सीधे जवाबदेह होंगे। अपने वार्ड की शिकायतें पार्षद और मेयर कार्यालय तक पहुंचाना अब और अहम होगा।
- YSRCP के लिए चुनौती: अपने ही गढ़ में हार के बाद पार्टी को संगठन दोबारा खड़ा करना होगा। कानूनी लड़ाई या चुनाव आयोग से शिकायत जैसे कदम आगे देखने को मिल सकते हैं।
- अंतिम आंकड़े: कुछ जगह मतगणना और दोबारा गिनती बाकी थी। पूरी और आधिकारिक सूची के लिए राज्य चुनाव आयोग के अंतिम नतीजों का इंतजार करें।
कुल मिलाकर, आंध्र के शहरी निकाय चुनाव ने साफ कर दिया है कि फिलहाल राज्य की शहरी राजनीति पर TDP-जनसेना-BJP गठबंधन की मजबूत पकड़ है, जबकि YSRCP के सामने अपने पारंपरिक गढ़ बचाने की बड़ी चुनौती है।
स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, डेक्कन हेराल्ड, डेक्कन क्रॉनिकल, ETV भारत, मनीकंट्रोल की रिपोर्ट्स। आंकड़े 3 नवंबर शाम तक के हैं।

