पुरानी दिल्ली के भीड़भाड़ वाले चावड़ी बाजार इलाके में गुरुवार, 5 नवंबर 2026 की सुबह एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढह गई। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और चार लोग घायल हुए। हादसे के कुछ ही घंटों बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जांच के आदेश दिए, ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज कराने को कहा और दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अपने दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इमारत का कोई नक्शा पास नहीं था।
कब और कहां हुआ हादसा?
PTI और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हादसा सुबह करीब 9:50 बजे चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास गली सितारा (शीश महल, चांदनी चौक इलाका) में हुआ। इमारत ग्राउंड फ्लोर के ऊपर दो मंजिलों वाली थी और उस पर निर्माण का काम चल रहा था। दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की टीम ने मलबे से दो शव निकाले, जबकि चार घायलों को दमकल के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोग अस्पताल ले गए। पुलिस के मुताबिक मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई थी।
डीडी न्यूज के अनुसार राहत और बचाव कार्य में दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), CATS एंबुलेंस सेवा और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें लगाई गईं। शुरुआत में मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई थी, इसलिए तंग गलियों के बीच मलबा हटाने का काम सावधानी से किया गया।
हादसे की वजह क्या बताई जा रही है?
हादसे की असली वजह जांच के बाद ही साफ होगी, लेकिन अब तक सामने आई जानकारी कुछ अहम बातें बताती है:
- नक्शा पास नहीं: MCD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जिस प्लॉट पर इमारत बनी थी, वह करीब 50 वर्ग मीटर का था और उसके लिए कोई बिल्डिंग प्लान मंजूर नहीं हुआ था।
- कमजोर निर्माण सामग्री: अधिकारियों के मुताबिक छत के नीचे लगा सपोर्ट (शटरिंग) हटाया जा रहा था, तभी इमारत गिरी। इस्तेमाल हुई सामग्री “नॉन-इंजीनियर्ड” थी और ठीक से सेट नहीं हुई थी, जो हादसे की एक वजह हो सकती है।
- मजदूर की चेतावनी: IANS से बात करते हुए बचाए गए एक मजदूर ने बताया कि स्लैब ढलाई का काम चल रहा था और नीचे लगे लकड़ी के सपोर्ट चरमराने लगे थे। उसने बाकी लोगों को चेताया भी था कि स्लैब गिर सकता है।
- पहले मिली थी शिकायत: हिंदुस्तान टाइम्स ने अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया कि दिल्ली पुलिस ने करीब पांच महीने पहले, 15 जून को MCD को इस पते पर अवैध निर्माण की जानकारी दी थी, लेकिन कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं है। वहीं MCD अधिकारी का कहना है कि उन्हें इस निर्माण को लेकर शिकायत नहीं मिली थी। यानी इस बिंदु पर दोनों पक्षों की बात अलग-अलग है और जांच में ही सच सामने आएगा।
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य का जायजा लिया। उन्होंने विस्तृत जांच, ठेकेदार पर FIR, घायलों के बेहतर इलाज और पीड़ित परिवारों को तुरंत अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) देने के निर्देश दिए। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने निर्माण का जिम्मा होते हुए भी मजदूरों की सुरक्षा की परवाह नहीं की, इसलिए उस पर FIR हुई है, और अगर अधिकारी लापरवाह पाए गए तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
MCD के ओल्ड दिल्ली जोन के डिप्टी कमिश्नर ने पहली नजर में गंभीर लापरवाही मानते हुए असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग) मोहम्मद नईम और जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग) अमन दलाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। IANS के मुताबिक मेयर प्रवेश वाही ने बताया कि नगर आयुक्त की अगुवाई में एक टीम बनाई गई है, जो तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।
दिल्ली में बार-बार क्यों गिरती हैं इमारतें?
यह राजधानी में इमारत गिरने के हादसों की लंबी कड़ी में ताजा घटना है। पुरानी दिल्ली जैसे इलाकों में बहुत छोटे प्लॉट, बेहद तंग गलियां, दशकों पुरानी इमारतें और बिना मंजूरी के ऊपर मंजिलें जोड़ने का चलन जोखिम कई गुना बढ़ा देता है। तंग गलियों की वजह से दमकल और बचाव दलों को भी मौके तक पहुंचने में दिक्कत आती है। ऐसे हादसों के बाद आम तौर पर इंजीनियरों का निलंबन और जांच होती है, लेकिन अवैध निर्माण पर लगातार निगरानी की कमी का सवाल बार-बार उठता है।
आप पर क्या असर, और क्या सावधानी रखें?
अगर आप दिल्ली या किसी भी शहर में घर बनवा रहे हैं, ऊपर मंजिल जोड़ रहे हैं या पुरानी इमारत में रहते हैं, तो यह हादसा एक चेतावनी है। मुख्यमंत्री ने भी लोगों से निर्माण के दौरान ढांचागत सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है। कुछ व्यावहारिक बातें:
- निर्माण से पहले नगर निगम से बिल्डिंग प्लान मंजूर कराएं और किसी योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियर से डिजाइन बनवाएं।
- स्लैब ढलाई के बाद शटरिंग और सपोर्ट तय समय से पहले न हटवाएं; कंक्रीट को ठीक से सेट होने का समय चाहिए।
- ठेकेदार से अच्छी गुणवत्ता की सामग्री और मजदूरों की सुरक्षा के इंतजाम पर लिखित भरोसा लें।
- अपने आसपास किसी खतरनाक या अवैध निर्माण की जानकारी हो तो MCD या स्थानीय पुलिस को लिखित शिकायत दें और उसकी रसीद रखें।
- पुरानी इमारत में दीवारों या छत में बड़ी दरारें, झुकाव या पानी रिसाव दिखे तो विशेषज्ञ से जांच कराएं।
आगे क्या?
अब नजर नगर आयुक्त की अगुवाई वाली टीम की रिपोर्ट और पुलिस जांच पर है। रिपोर्ट से यह साफ होगा कि हादसा निर्माण की खामी से हुआ या निगरानी में चूक से, और पुलिस की पहले दी गई जानकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। निलंबित इंजीनियरों पर आगे की कार्रवाई और ठेकेदार पर दर्ज केस का नतीजा भी इसी जांच पर निर्भर करेगा। मृतकों की पहचान और पीड़ित परिवारों को मिलने वाली सहायता राशि के बारे में आधिकारिक जानकारी आने पर हम यह खबर अपडेट करेंगे।
स्रोत: PTI, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, डीडी न्यूज और IANS की रिपोर्ट।

