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7 नवम्बर 2026, शनि

Kangana Ranaut Personality Rights: दिल्ली हाईकोर्ट से कंगना को राहत, Meta को 72 घंटे में AI डीपफेक हटाने का आदेश

अदालत की मेज पर रखा जज का हथौड़ा और कानून की किताबें, कंगना रनौत पर्सनैलिटी राइट्स केस की प्रतीकात्मक तस्वीर

सोशल मीडिया पर AI से बनी फर्जी तस्वीरें, मनगढ़ंत बयान और मॉर्फ्ड वीडियो अब सिर्फ आम लोगों की नहीं, बड़ी हस्तियों की भी सिरदर्दी बन चुके हैं। इसी कड़ी में अभिनेत्री और मंडी (हिमाचल प्रदेश) से बीजेपी सांसद कंगना रनौत को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स को अंतरिम सुरक्षा देते हुए Meta को 72 घंटे के भीतर आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का आदेश दिया है।

यह अंतरिम आदेश जस्टिस विकास महाजन ने 8 अक्टूबर 2026 को पारित किया, जिसकी विस्तृत जानकारी 12 अक्टूबर को सामने आई। मामला Kangana Ranaut vs Meta Platforms Inc. & Ors. नाम से दर्ज है।

Kangana Ranaut Personality Rights: कंगना ने कोर्ट में क्या कहा?

LiveLaw की रिपोर्ट के मुताबिक, कंगना ने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया पर उनके नाम से गढ़े गए बयान, छेड़छाड़ किए गए वीडियो और AI से बनाई गई तस्वीरें घूम रही हैं। इनमें उन्हें आपत्तिजनक हालात में दिखाया गया और ऐसी बातें उनके मुंह में डाली गईं, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं।

उन्होंने AI से बने यौन और अश्लील डीपफेक के URL भी कोर्ट के सामने रखे। कंगना की दलील थी कि एक मौजूदा सांसद होने के नाते ऐसे कंटेंट से उन्हें और भी ज्यादा नुकसान होता है। उन्होंने “डायनेमिक इंजंक्शन” की मांग भी की, क्योंकि ऐसे अकाउंट्स शिकायत होते ही नए नाम से या क्लोन बनाकर फिर से सामने आ जाते हैं।

हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?

अदालत ने पहली नजर में (प्राइमा फेसी) कंगना का केस मजबूत माना। कोर्ट ने कहा कि उनकी छवि और व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचने की आशंका “वास्तविक और मौजूद” दिखती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनका कद उन्हें अपने व्यक्तित्व और उससे जुड़ी पहचान पर मालिकाना अधिकार देता है।

आदेश की मुख्य बातें:

  • अगली सुनवाई तक कोई भी कंगना के नाम, तस्वीर, चेहरे-मोहरे, आवाज, भाषण, हस्ताक्षर या पर्सोना का बिना इजाजत इस्तेमाल नहीं कर सकता।
  • Meta को 18 चिन्हित लिंक (ज्यादातर इंस्टाग्राम पोस्ट, रील्स और अकाउंट) और बाकी बताए गए कंटेंट को आदेश मिलने के 72 घंटे के भीतर हटाना होगा। दो हफ्ते में अनुपालन हलफनामा भी दाखिल करना होगा।
  • MeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय) और DoT (दूरसंचार विभाग) को इंटरनेट और टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश देकर सूचीबद्ध वेबसाइटों को 72 घंटे में ब्लॉक कराना होगा।
  • कंगना आगे मिलने वाले नए आपत्तिजनक URL भी सीधे प्लेटफॉर्म्स को बता सकेंगी, और उन्हें नया केस किए बिना हटाना होगा।

IT नियमों का भी हवाला

कोर्ट ने आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के नियम 3(1)(b)(ii) का जिक्र किया, जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स को अश्लील कंटेंट होस्ट नहीं करना चाहिए। कंगना ने दो खास फर्जी कोट्स की पहचान हलफनामे के साथ की थी, जिन पर कोर्ट ने कहा कि इन्हें सोशल मीडिया पर बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती। एक फैक्ट-चेक रिपोर्ट ने भी एक तस्वीर को फर्जी बताया था।

दिलचस्प बात यह रही कि कंगना के वकील ने एक व्यंग्यात्मक मीम को हटाने पर जोर नहीं दिया, इसलिए उसे आदेश से बाहर रखा गया। यानी कोर्ट ने व्यंग्य और फर्जीवाड़े के बीच की लकीर को ध्यान में रखा।

अगली सुनवाई कब?

मामला अब 4 दिसंबर 2026 को जॉइंट रजिस्ट्रार के सामने और 3 फरवरी 2027 को कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए लगेगा। कंगना की ओर से एडवोकेट साकेत सीकरी समेत वकीलों की टीम पेश हुई, जबकि केंद्र सरकार की ओर से CGSC सत्य रंजन स्वैन ने पैरवी की।

क्यों अहम है यह फैसला?

पिछले कुछ समय में कई फिल्मी सितारों ने अपनी आवाज, चेहरे और नाम के गलत इस्तेमाल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। AI टूल्स के आसान हो जाने के बाद किसी की भी नकली आवाज या वीडियो बनाना चुटकियों का काम हो गया है। ऐसे में कंगना का केस इसलिए खास है, क्योंकि यहां एक अभिनेत्री के साथ-साथ एक सांसद की छवि और उनके नाम से फैलाए जा रहे फर्जी राजनीतिक बयानों का सवाल भी जुड़ा है।

आम यूजर्स के लिए सबक साफ है: चौंकाने वाला वीडियो शेयर करने से पहले जांच लें।

FAQ: कंगना रनौत पर्सनैलिटी राइट्स केस

प्रश्न 1: कंगना रनौत के केस में आदेश किस जज ने दिया? उत्तर: दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस विकास महाजन ने 8 अक्टूबर 2026 को अंतरिम आदेश दिया।

प्रश्न 2: Meta को कितने समय में कंटेंट हटाना है? उत्तर: आदेश मिलने के 72 घंटे के भीतर Meta को चिन्हित लिंक हटाने हैं और दो हफ्ते में अनुपालन हलफनामा देना है।

प्रश्न 3: पर्सनैलिटी राइट्स का मतलब क्या है? उत्तर: इसका मतलब है किसी व्यक्ति के नाम, चेहरे, आवाज, तस्वीर और पहचान का उसकी मर्जी के बिना व्यावसायिक या गलत इस्तेमाल रोकने का अधिकार।

प्रश्न 4: मामले की अगली सुनवाई कब है? उत्तर: 4 दिसंबर 2026 को जॉइंट रजिस्ट्रार के सामने और 3 फरवरी 2027 को कोर्ट में।

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