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7 नवम्बर 2026, शनि

नंदन नीलेकणि: पेपर लीक रोकने को आखिरी पल में प्रश्नपत्र, विशाल क्वेश्चन बैंक और CBT सेंटर विस्तार

परीक्षा हॉल में बैठे अभ्यर्थी—नीलेकणि पेपर लीक समाधान का प्रतीकात्मक चित्र

परीक्षा पेपर लीक की समस्या पर इंफोसिस सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने साफ रास्ता सुझाया है—एक विशाल प्रश्न बैंक बनाओ, और उस दिन का प्रश्नपत्र आखिरी पल में ही जनरेट करो। ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026 (नई दिल्ली) में उन्होंने कहा कि जिस पल “एक” फिक्स्ड पेपर बनता है, उसी पल उसे बेचने का आर्थिक प्रोत्साहन पैदा हो जाता है। AI से परीक्षा वाले दिन पेपर बनाने के आइडिया पर भी उन्होंने सहमति जताई—“Yeah, sure.”

नीलेकणि उस उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष हैं जो NEET-UG पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे (जुलाई 2026) के बाद बनी थी। इंडियन एक्सप्रेस और द हिंदू दोनों रिपोर्ट करते हैं कि रिपोर्ट अक्टूबर के अंत तक जमा होने वाली है; प्रधानमंत्री सुझाव लागू करने को उत्सुक बताए गए।

प्रस्ताव की दो धुरियाँ

  • क्वेश्चन बैंक + लास्ट-मिनट जनरेशन: पहले से एक पेपर छापकर रखने के बजाय बड़े, लगातार अपडेट बैंक से डिजिटल टूल से पेपर निकालना; विशेषज्ञ केवल वेटिंग करें
  • CBT नेटवर्क बढ़ाना: कंप्यूटर-आधारित परीक्षा के लिए जगहें बढ़ानी होंगी। नीलेकणि ने कहा देश में करीब 1.5 लाख स्थान हैं जहाँ युवा टेस्ट देते हैं—इन्हें विस्तार चाहिए

संसदीय समिति ने भी NTA को बड़ा, विविध, अपडेटेड क्वेश्चन बैंक बनाने और पेपर परीक्षा के बहुत करीब सेट करने की सिफारिश पहले की थी—नीलेकणि का लाइन उसी दिशा में जाता है। सरकार पेन-पेपर से CBT शिफ्ट की बात कर रही है; NTA ने AICTE से सरकारी तकनीकी संस्थानों में मानक टेस्टिंग सेंटर ढूँढने को कहा है।

टास्क फोर्स कहाँ तक पहुँची?

द हिंदू के अनुसार पैनल में एस. सोमनाथ, तपन डेका, वी. कामाकोटि, अनिता करवल, अमृत लाल मीणा समेत छह सदस्य हैं। करीब 18 पैनल बैठकें, 40 परामर्श बैठकें और 50,000+ सुझाव मिल चुके हैं। नीलेकणि ने रिपोर्ट का पूरा मसौदा नहीं खोला—सिर्फ दिशा बताई।

आप पर क्या असर पड़ेगा

  • NEET/JEE/सरकारी परीक्षा अभ्यर्थी: अगर लास्ट-मिनट जनरेशन लागू हुआ तो “कल रात लीक वाला PDF” वाला बिजनेस कमजोर पड़ सकता है—पर तब तक कोचिंग-मॉड्यूल और सिलेबस कवरेज ही असली तैयारी है।
  • अभिभावक: फर्जी “पेपर मिल जाएगा” गिरोह से बचें। सरकारी बदलाव आने तक आधिकारिक NTA/बोर्ड नोटिस ही मान्य।
  • कस्बाई/ग्रामीण छात्र: CBT विस्तार का मतलब पास में सुरक्षित कंप्यूटर सेंटर—लेकिन बिजली, नेट और बायोमेट्रिक गड़बड़ी के लिए बैकअप प्लान पूछें।
  • कोचिंग उद्योग: लीक-आधारित “गेरंटी” मार्केटिंग और सिकुड़ सकती है; कॉन्सेप्ट और मॉक टेस्ट वाला मॉडल मजबूत रहेगा।

आगे क्या

टास्क फोर्स की अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर 2026 के अंत तक अपेक्षित है। उसके बाद शिक्षा मंत्रालय/कैबिनेट कितना अपनाते हैं—वही असली टेस्ट है। CBT सेंटर मैपिंग, क्वेश्चन बैंक निवेश और AI गार्डरेल (प्रश्न गुणवत्ता, पूर्वाग्रह) तय करने होंगे। जब तक गजट/नियम न आएँ, मौजूदा परीक्षा कैलेंडर और एडमिट कार्ड प्रक्रिया ही लागू रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नीलेकणि ने क्या मुख्य समाधान बताया?

विशाल प्रश्न बैंक से परीक्षा वाले दिन/आखिरी पल पेपर जनरेट करना, ताकि एक फिक्स्ड पेपर बेचने का प्रोत्साहन खत्म हो; CBT स्थान बढ़ाने की भी बात।

क्या AI से पेपर बनेगा?

पूछे जाने पर उन्होंने सहमति जताई कि AI परीक्षा वाले दिन पेपर बना सकता है—यह विचार है, अभी लागू नियम नहीं।

रिपोर्ट कब आएगी?

सरकारी अधिकारी/कवरेज के अनुसार अक्टूबर 2026 के अंत तक टास्क फोर्स रिपोर्ट जमा करने की बात है।

क्या अगली NEET तुरंत CBT हो जाएगी?

पैनल CBT की दिशा देख रहा है; इंफ्रा और सुरक्षा तैयार होने पर ही शिफ्ट होगा। तारीख की घोषणा NTA/मंत्रालय करेगी।

स्रोत: The Indian Express (Dheeraj Mishra / Gayathri Mani, 14 Oct 2026), The Hindu (Maitri Porecha, 13 Oct), Hindu BusinessLine / TOI कवरेज। टास्क फोर्स सदस्य व बैठक आंकड़े The Hindu के अनुसार।

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