हिरासत के बाद दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने रविवार शाम दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इससे पहले वे शनिवार 10 अक्टूबर को गुरुग्राम सेक्टर 56 स्थित आवास से हिरासत में लिए गए थे। हिरासत जंतर मंतर पर प्रस्तावित CJP/CEC-विरोधी प्रदर्शन से पहले हुई। रविवार को उन्हें रिहा किया गया।
रिपोर्टों में हिरासत की अवधि अलग-अलग बताई गई—करीब 18 से 24 घंटे। हिंदुस्तान टाइम्स ने लगभग 18 घंटे लिखा। राठी ने दावा किया कि करीब 20–23 घंटे तक उन्हें वकील और फोन नहीं मिले। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से मुलाकात की और कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया।
राठी के आरोप: “इमरजेंसी जैसी स्थिति”
ThePrint और New Indian Express में दर्ज उनके बयानों के मुताबिक उन्होंने कहा कि यह “इमरजेंसी जैसी स्थिति” है, लेकिन कम से कम इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी घोषित की थी। उन्होंने चुनावी आयोग, अदालतों और पुलिस जैसी संस्थाओं पर आरोप लगाया कि वे “दो लोगों” के कब्जे में हैं। इस कार्रवाई को उन्होंने “अघोषित इमरजेंसी” बताया।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें गिरफ्तार नहीं, बल्कि “अपहरण” किया गया। उनके मुताबिक सुबह करीब 7 बजे लगभग 20 सादे कपड़ों वाले लोग आए, मां को धक्का दिया गया और फोन जब्त कर लिए गए।
हिंसा और CEC पर उनकी बात
राठी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया कि वे नेपाल/बांग्लादेश जैसी हिंसा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे अहिंसा और गांधी में विश्वास रखते हैं, जबकि “ये लोग गोडसे में विश्वास रखते हैं।”
उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग दोहराई। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता (LoP) को मिलकर निष्पक्ष CEC चुनना चाहिए।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार रिहाई के बाद भी उन्होंने दावा किया कि गुरुग्राम घर के बाहर पुलिस मौजूद है—“अनौपचारिक हाउस अरेस्ट” जैसा माहौल।
पुलिस का पक्ष
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार पुलिस ने उन्हें BNSS की धारा 172(2) के तहत हिरासत में लिया। जंतर मंतर पर निषेधात्मक आदेश लागू थे। एक अधिकारी का कहना था कि करीब 9:30 बजे हिरासत हुई क्योंकि उन्होंने आदेश मानने से इनकार किया था—यह पुलिस का बयान है।
दोनों पक्षों के बयान अलग हैं। राठी इसे अवैध और “इमरजेंसी” सरीखा बताते हैं; पुलिस निषेधात्मक आदेश और BNSS प्रावधान का हवाला देती है।
राजनीतिक और कानूनी अगला कदम
राठी ने कानूनी कार्रवाई का ऐलान किया है। कपिल सिब्बल से मुलाकात के बाद यह संकेत और मजबूत हुआ। CJP/CEC विरोध के व्यापक संदर्भ में विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी के प्रदर्शन, हिरासत और अदालती सुनवाई की खबरें भी चल रही हैं। राठी का दावा है कि सैकड़ों लोग प्रभावित हुए—उन्होंने “hundreds” शब्द का इस्तेमाल किया; इससे आगे का कोई सटीक आंकड़ा यहां नहीं जोड़ा जा रहा।
यह विवाद अभिव्यक्ति, प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच तनाव को फिर सामने लाता है। अंतिम निष्कर्ष अदालत और जांच पर निर्भर करेगा।
TrendFlash दोनों पक्षों—राठी के दावे और पुलिस के बयान—को स्रोत रिपोर्टों के आधार पर दर्ज कर रहा है। आरोप अभी दावे हैं, साबित तथ्य नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ध्रुव राठी कब हिरासत में लिए गए और कब रिहा हुए?
शनिवार 10 अक्टूबर को गुरुग्राम सेक्टर 56 से हिरासत; रविवार को रिहाई। अवधि रिपोर्टों में करीब 18–24 घंटे बताई गई।
पुलिस ने किस धारा में हिरासत बताई?
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार BNSS धारा 172(2); जंतर मंतर पर निषेधात्मक आदेश का हवाला।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य आरोप क्या था?
राठी ने “इमरजेंसी जैसी/अघोषित इमरजेंसी” का आरोप लगाया, संस्थाओं पर कब्जे का दावा किया और कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया।
CEC पर उनकी मांग क्या है?
उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि पीएम व LoP मिलकर निष्पक्ष CEC चुनें।

