भारत के नक्शे पर अंतरराष्ट्रीय महत्व वाली आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) की सूची में दो नए नाम जुड़ गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि चंडीगढ़ की सुखना वेटलैंड (सुखना झील) और उत्तर प्रदेश के मैनपुरी ज़िले की सौज झील को रामसर साइट का दर्जा मिल गया है। इसके साथ ही देश में रामसर साइट्स की संख्या 103 हो गई है।
रामसर कन्वेंशन के सचिवालय ने भी उसी दिन इसकी पुष्टि की। सुखना वेटलैंड को रामसर सूची में साइट नंबर 2602 और सौज झील को साइट नंबर 2603 मिला है। चंडीगढ़ के लिए यह पहली रामसर साइट है, जबकि उत्तर प्रदेश की यह 14वीं रामसर साइट बन गई है।
रामसर साइट क्या होती है?
रामसर साइट उन वेटलैंड्स को कहते हैं जिन्हें रामसर कन्वेंशन के तहत “अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि” माना जाता है। यह पर्यावरण संधि 1971 में ईरान के शहर रामसर में हुई थी, इसलिए इसका यही नाम पड़ा। झील, दलदली इलाके, नदी के बाढ़ क्षेत्र, मैंग्रोव और जलाशय जैसी जगहें इसमें आती हैं।
किसी वेटलैंड को यह दर्जा देने का मतलब यह है कि देश उस जगह के संरक्षण और “समझदारी से इस्तेमाल” (wise use) के लिए एक प्रबंधन ढांचा बनाने और उस पर अमल करने की प्रतिबद्धता जताता है। PTI की रिपोर्ट में भी यही बात कही गई है। भारत में पहली दो रामसर साइट्स, ओडिशा की चिलिका झील और राजस्थान का केवलादेव नेशनल पार्क, 1 अक्टूबर 1981 को सूची में शामिल हुई थीं।
सुखना वेटलैंड: शहर के किनारे प्रवासी पक्षियों का ठिकाना
सुखना झील चंडीगढ़ की पहचान है। यह बारिश के पानी से भरने वाला जलाशय है, जिसे 1958 में शिवालिक पहाड़ियों से आने वाली मौसमी धारा सुखना चो पर बांध बनाकर तैयार किया गया था। शहर के योजनाकार ले कॉर्बूज़िए से जुड़ी यह झील करीब 3 वर्ग किलोमीटर में फैली है। पास में करीब 26 वर्ग किलोमीटर का सुखना वन्यजीव अभयारण्य है, जिसे 1998 में अभयारण्य घोषित किया गया था।
रामसर सचिवालय के मुताबिक बाहरी हिमालय की तलहटी में बसी यह पेरी-अर्बन (शहर से सटी) वेटलैंड आसपास के जलग्रहण क्षेत्र से आने वाले पानी और गाद (सेडिमेंट) के बहाव को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। यहां खुले पानी से लेकर किनारे की वनस्पति, झाड़ियों और जंगल तक, कई तरह के आवास मिलते हैं।
- पक्षी: यह जगह स्थानीय जलपक्षियों और सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर प्रवास करने वाले पक्षियों के लिए भोजन, प्रजनन, बसेरे और सर्दियां बिताने का ठिकाना है। यहां संवेदनशील (vulnerable) श्रेणी की कॉमन पोचार्ड बत्तख और संकटग्रस्त (endangered) पलास फ़िश ईगल दर्ज किए गए हैं।
- कछुए: झील के उथले किनारों पर संकटग्रस्त ब्लैक पॉन्ड टर्टल भी मिलता है।
- चुनौतियां: रामसर सचिवालय ने जलग्रहण क्षेत्र से आने वाली गाद और आक्रामक (invasive) पौधों को मुख्य चुनौती बताया है। प्रबंधन योजना में मिट्टी और नमी संरक्षण के काम और आक्रामक पौधों को समय-समय पर हटाने जैसे कदम शामिल हैं।
सौज झील: मैनपुरी को मिली दूसरी रामसर साइट
सौज झील गंगा के बाढ़ के मैदान में खेतों से घिरी एक उथली झील है। रामसर सचिवालय के अनुसार यह आसपास की आर्द्रभूमियों के बड़े नेटवर्क का हिस्सा है और पास के समान पक्षी विहार (रामसर साइट नंबर 2413) से जुड़ी पारिस्थितिक कड़ी बनाती है। समान पक्षी विहार को 2 दिसंबर 2019 को रामसर साइट घोषित किया गया था।
- 30,000 से ज़्यादा जलपक्षी: यह झील नियमित रूप से 30,000 से अधिक जलपक्षियों को सहारा देती है। BirdLife International ने इसे Important Bird and Biodiversity Area (IBA) माना है।
- सारस और चित्तीदार ईगल: यहां संवेदनशील श्रेणी के सारस क्रेन (उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी) और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल दर्ज किए गए हैं।
- वनस्पति: झील में कमल और जंगली गन्ना (कांस) जैसी वनस्पति है, जो पक्षियों और दूसरे जीवों को घोंसला बनाने, छिपने और भोजन की जगह देती है।
- प्रस्तावित कदम: मछली पकड़ने पर मौसमी रोक, बारीक जाली वाले जाल पर पाबंदी और मवेशियों की आवाजाही पर नियंत्रण।
Hindustan Times से बातचीत में उत्तर प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने कहा कि सौज राज्य की 14वीं रामसर साइट है और इसके साथ मैनपुरी देश का ऐसा ज़िला बन गया है जहां दो रामसर साइट्स हैं। उनके मुताबिक मैनपुरी इस मामले में देश का इकलौता ज़िला है।
उत्तर प्रदेश की 14 रामसर साइट्स
HT की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी की रामसर साइट्स ये हैं: अपर गंगा रिवर (ब्रजघाट से नरोरा तक का हिस्सा), नवाबगंज पक्षी विहार (उन्नाव), सरसई नावर झील (इटावा), समसपुर पक्षी विहार (रायबरेली), सांडी पक्षी विहार (हरदोई), समान पक्षी विहार (मैनपुरी), पार्वती अरगा पक्षी विहार (गोंडा), सूर सरोवर (आगरा), हैदरपुर वेटलैंड (मुज़फ़्फ़रनगर), बखिरा पक्षी विहार (संत कबीर नगर), पटना पक्षी विहार (एटा), शेखा झील पक्षी विहार (अलीगढ़), जय प्रकाश नारायण (सुरहा ताल) पक्षी विहार (बलिया) और अब सौज झील (मैनपुरी)। रिपोर्ट के अनुसार इन साइट्स का कुल क्षेत्रफल 43,147.15 हेक्टेयर है, जो नेशनल वेटलैंड एटलस के हिसाब से राज्य की कुल आर्द्रभूमि का करीब 3.47% है।
2026 में भारत की सूची तेज़ी से बढ़ी है। बलिया का सुरहा ताल 5 जून 2026 को रामसर साइट बना था, जिसे 100वीं साइट बताया गया था। अगस्त में अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील 101वीं साइट बनी। अब सौज और सुखना के साथ यह संख्या 103 पर पहुंच गई है।
रामसर टैग से ज़मीन पर क्या बदलता है?
यह समझना ज़रूरी है कि रामसर का दर्जा अपने आप में कोई जादुई सुरक्षा कवच नहीं है। असली फ़र्क प्रबंधन और निगरानी से पड़ता है। भारत में वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 रामसर साइट्स पर भी लागू होते हैं। इन नियमों के तहत वेटलैंड में अतिक्रमण या उसे दूसरे इस्तेमाल में बदलने, नए उद्योग लगाने, ठोस कचरा डालने और बिना ट्रीटमेंट का गंदा पानी छोड़ने जैसी गतिविधियों पर रोक है।
दूसरी तरफ़ अगर किसी साइट की पारिस्थितिक हालत बिगड़ती है तो उसे रामसर के मॉन्ट्रो रिकॉर्ड में डाला जा सकता है। भारत में केवलादेव नेशनल पार्क और मणिपुर की लोकटक झील इस रिकॉर्ड में हैं। यानी यह टैग एक ज़िम्मेदारी भी है।
झीलों के संरक्षण पर अदालतें और सरकारें भी लगातार सख्त हो रही हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने डल झील में ईंधन वाली मोटरबोट और जेट स्की पर रोक लगाई, जिसकी पूरी खबर यहां पढ़ें। उत्तर भारत में सर्दियों से पहले हवा और पर्यावरण की दूसरी चुनौती, पराली जलाने के मामलों पर हमारी यह रिपोर्ट भी देखें।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या?
- पर्यटन और स्थानीय कमाई: मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपनी पोस्ट में यात्रियों से सुखना और सौज घूमने की अपील की। रामसर टैग से इन जगहों की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ती है, जिससे बर्डवॉचिंग और इको-टूरिज़्म को बढ़ावा मिल सकता है। मैनपुरी जैसे ज़िले में समान और सौज, दोनों को जोड़कर स्थानीय गाइड, होमस्टे और छोटे कारोबारों के लिए मौके बन सकते हैं।
- घूमने का सही समय: प्रवासी पक्षी आमतौर पर सर्दियों में आते हैं, इसलिए अक्टूबर के आख़िर से फरवरी-मार्च तक का समय बर्डवॉचिंग के लिए बेहतर माना जाता है। दशहरे के लंबे वीकेंड की योजना बना रहे हैं तो पहले 19-20 अक्टूबर की बैंक छुट्टियों की सूची देख लें।
- ज़िम्मेदार पर्यटक बनें: पक्षियों को खाना न खिलाएं, प्लास्टिक न फेंकें, तेज़ आवाज़ और ड्रोन से बचें और स्थानीय प्रशासन के नियम मानें। वेटलैंड की सेहत ही उसके टैग की असली कसौटी है।
- किसानों और मछुआरों के लिए: सौज झील के लिए प्रस्तावित कदमों में मछली पकड़ने पर मौसमी रोक और बारीक जाल पर पाबंदी शामिल हैं। आसपास के गांवों के लोगों को वन विभाग की ओर से जारी होने वाले नियमों और योजनाओं पर नज़र रखनी चाहिए।
आगे सबसे बड़ा सवाल अमल का है: सुखना में गाद और आक्रामक पौधों पर नियंत्रण, और सौज में मछली पकड़ने व मवेशियों की आवाजाही से जुड़े नियम कितनी गंभीरता से लागू होते हैं। रामसर सूची में नाम आना शुरुआत है। इन झीलों को अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाना असली काम है।
स्रोत: PIB (पर्यावरण मंत्रालय, 15 अक्टूबर 2026); रामसर कन्वेंशन सचिवालय की आधिकारिक घोषणा (15 अक्टूबर 2026); PTI (ThePrint के ज़रिए); DD News; आकाशवाणी समाचार; Hindustan Times (16 अक्टूबर 2026)। सुखना झील और अभयारण्य से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य सार्वजनिक संदर्भ स्रोतों से।

