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6 नवम्बर 2026, शुक्र

TMC में टूट का असली ‘मास्टरमाइंड’ कौन? निशिकांत दुबे नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश से जुड़ा है ये नाम

जून 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई सांसदों की बगावत ने पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी। सबसे बड़ा सवाल था कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे असली सूत्रधार कौन है। हिंदुस्तान टाइम्स, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस और नेशनल हेराल्ड सहित कई रिपोर्ट्स में अलग-अलग नाम सामने आए। यहां उन दावों को आरोप और तथ्य के फर्क के साथ समझाया गया है।

किन नामों की चर्चा हुई?

निशिकांत दुबे और भूपेंद्र यादव

शुरुआत में झारखंड के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का नाम सबसे ज्यादा लिया गया। TMC सांसद कीर्ति आजाद ने उन पर TMC सांसदों को तोड़ने की “ऑपरेशन लोटस” की कोशिश के आरोप लगाए और कहा कि यह कोशिश नाकाम रही है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम भी चर्चा में आया। भाजपा की ओर से इन आरोपों का कोई आधिकारिक समर्थन या स्वीकारोक्ति सामने नहीं आई।

भाजपा सांसद सीएम रमेश

आंध्र प्रदेश से भाजपा सांसद सीएम रमेश का नाम एक अहम कड़ी के रूप में आया। एक TMC राज्यसभा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि वे तीन TMC सांसदों के संपर्क में थे। रिपोर्ट्स के अनुसार रमेश ने खुद माना कि उन्होंने फोन किए और पुराने रिश्तों के जरिए कुछ सांसदों को मनाने में मदद की। उन्होंने पैसे, पद या किसी लेन-देन से इनकार किया। TMC की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि वे ऑपरेशन के नेता नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता तलाश रहे हैं।

सुवेंदु अधिकारी और 8 जून का डिनर

मूल रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने सायनी घोष जैसे नेताओं को मनाने में भूमिका निभाई और 8 जून को शताब्दी रॉय के घर डिनर हुआ। ये बातें सूत्रों पर आधारित दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।

बाद में क्या हुआ? 20 सांसद और NCPI

14 जून को 20 बागी TMC सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर घोषणा की कि वे नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर रहे हैं। NCPI त्रिपुरा की एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यताप्राप्त पार्टी बताई गई है। HT के अनुसार विलय मान्य होने पर लोकसभा में TMC की संख्या करीब 28 से घटकर 8 रह जाती। कांग्रेस के जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह ने इसे “मास्टरमाइंड” किया है, ताकि NDA के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत जुटाया जा सके। यह कांग्रेस का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।

अब मामला कहां है? (अक्टूबर 2026)

  • इन 20 सांसदों की लोकसभा सदस्यता रद्द करने (अयोग्यता) की याचिकाएं स्पीकर के पास लंबित हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि NCPI में जाना मान्य विलय है या दल-बदल। उसने स्पीकर से जल्द फैसला लेने को कहा है, पर समय-सीमा नहीं दी।
  • स्पीकर ओम बिरला ने कहा है कि वे सांसदों के जवाब मिलने के बाद फैसला लेंगे। बागी सांसदों ने जवाब के लिए और समय मांगा।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

आम मतदाता के लिए सवाल यह है कि चुनाव में जनता ने जिस पार्टी के नाम पर वोट दिया, उसके सांसद बीच में पाला बदलें तो क्या हो। दल-बदल कानून (दसवीं अनुसूची) में दो-तिहाई सदस्यों के विलय पर छूट है, लेकिन यहां विवाद है कि यह कदम वैध विलय है या नहीं। स्पीकर और अदालत के फैसले से तय होगा कि लोकसभा का गणित और भविष्य के ऐसे मामलों की मिसाल कैसी बनेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

TMC में बगावत का मास्टरमाइंड कौन है?

कोई एक नाम आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुआ। दुबे, सीएम रमेश और अमित शाह के नाम विपक्ष और सूत्रों के दावों में आए हैं। सीएम रमेश ने सांसदों को मनाने की बात मानी है।

NCPI क्या है?

नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया, त्रिपुरा की एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यताप्राप्त पार्टी, जिसमें 20 बागी सांसदों ने विलय की घोषणा की।

क्या सांसदों की सदस्यता गई?

नहीं। अयोग्यता की याचिकाओं पर स्पीकर का फैसला अभी बाकी है।

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