जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन देशभर में चर्चा का विषय बना। यह अनशन 28 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के समर्थन में शुरू हुआ था। इस लेख में अनशन के दौरान उनकी सेहत के आंकड़े और बाद में क्या हुआ, दोनों की जानकारी दी गई है। इसे इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स और गार्डियन की रिपोर्ट्स से मिलाकर तैयार किया गया है।
अनशन क्यों शुरू हुआ
यह आंदोलन NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के बाद छात्रों की नाराजगी से जुड़ा था। CJP की मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। वांगचुक ने इस मांग के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की और कहा कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में है।
सेहत के आंकड़े: दिन-ब-दिन
- शुरुआती तीन दिन: ब्लड शुगर लगभग 66 mg/dL तक गिरा और वजन करीब 2 किलो घटा।
- 11वां दिन: वजन 7 किलो से ज्यादा कम होकर लगभग 59.4 किलो रह गया और रक्तचाप सामान्य से नीचे दर्ज हुआ।
- 14वां दिन: कुल वजन में करीब 7.5 किलो की कमी, रक्तचाप 106/74 mm Hg।
- 16वां दिन (13 जुलाई तक के अपडेट): वजन में करीब 8.2 किलो की कमी, ब्लड ग्लूकोज करीब 67 mg/dL। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने चक्कर और मांसपेशियों की कमजोरी की चिंता जताई।
सामान्य उपवास वाला ब्लड शुगर लगभग 70-100 mg/dL माना जाता है। 70 से नीचे का स्तर हाइपोग्लाइसीमिया की श्रेणी में आता है, जिसमें चक्कर, कंपकंपी और बेहोशी तक हो सकती है।
बाद में क्या हुआ
रिपोर्ट्स के अनुसार 18 जुलाई को वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया और फिर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती किया गया। 23 जुलाई 2026 की रात उन्होंने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह तथा लद्दाख की एपेक्स बॉडी के नेताओं की मौजूदगी में 26 दिन बाद अपना उपवास तोड़ा।
उन्होंने X पर लिखा कि यह फैसला “लंबी बातचीत” और देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए लिया गया। इससे पहले 65 सांसदों ने उनसे उपवास तोड़ने की अपील की थी। उन्होंने एक पत्र में बताया था कि मंत्रियों ने पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए पर्याप्त मुआवजे पर विचार और संसद में जवाबदेही पर सार्थक चर्चा का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर उनसे डॉक्टरों की सलाह मानने की अपील की। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार उन्हें छह दिन के इलाज के बाद 27 जुलाई को डिस्चार्ज किया गया और वे राजघाट गए।
अनशन का शरीर पर असर: डॉक्टर क्या कहते हैं
लंबे उपवास के बाद अचानक सामान्य खाना शुरू करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे रिफीडिंग सिंड्रोम का खतरा रहता है। इसलिए डॉक्टर धीरे-धीरे तरल और हल्का भोजन देते हैं और इलेक्ट्रोलाइट पर नजर रखते हैं। यह जानकारी सामान्य चिकित्सा जानकारी है, किसी को भी बिना डॉक्टरी निगरानी के लंबे उपवास नहीं रखने चाहिए।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
- अगर आप NEET जैसी परीक्षा के अभ्यर्थी हैं, तो परीक्षा संबंधी आधिकारिक सूचनाएं सिर्फ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से देखें।
- सरकार ने जिन बातों पर विचार का भरोसा दिया, जैसे मुआवजा और संसद में चर्चा, उन पर आगे की खबरों पर नजर रखें।
- CJP की ओर से कहा गया था कि प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शन की आगे की स्थिति के लिए ताजा रिपोर्ट्स देखें।
- उपवास या क्रैश डाइट आजमाने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सोनम वांगचुक ने अनशन कब शुरू किया था?
28 जून 2026 को, जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के समर्थन में।
अनशन कितने दिन चला?
कुल 26 दिन। उन्होंने 23 जुलाई 2026 की रात मेदांता अस्पताल में उपवास तोड़ा।
16वें दिन उनकी सेहत कैसी थी?
रिपोर्ट्स के अनुसार वजन करीब 8.2 किलो घटा था और ब्लड ग्लूकोज लगभग 67 mg/dL था।
अब उनकी हालत कैसी है?
रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें 27 जुलाई को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया और उन्होंने धीरे-धीरे ताकत लौटने की बात कही।

