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6 Sep 2026, Sun

जंतर-मंतर पर पिछले सोलह दिनों से अनशन पर बैठे मशहूर शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत अब गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। सोमवार को जारी हुए स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक उनका वजन अब तक 8.2 किलोग्राम कम हो चुका है, जबकि उनके ब्लड ग्लूकोज का स्तर गिरकर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर पर आ गया है, जो सामान्य स्तर से काफी नीचे है �।
अनशन की शुरुआत कैसे हुई
यह पूरा मामला 28 जून से शुरू हुआ, जब सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की �। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से NEET-UG परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। शुरुआती दिनों में वांगचुक ने खुद को “ठीक” बताया था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी हालत बिगड़ती चली गई।
दिन-प्रतिदिन बिगड़ती सेहत
अनशन के शुरुआती तीन दिनों में ही उनका ब्लड शुगर लेवल 66 तक गिर गया था और वजन लगभग दो किलोग्राम कम हो गया था �। इसके बाद 11वें दिन डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि उनका वजन सात किलोग्राम से ज्यादा घट चुका था, वजन 59.40 किलोग्राम रह गया था और ब्लड प्रेशर भी सामान्य से नीचे दर्ज हुआ था �।
14वें दिन जारी हुए स्वास्थ्य अपडेट में बताया गया कि उनका कुल वजन 7.5 किलोग्राम कम हो चुका था और ब्लड प्रेशर 106/74 mm Hg रिकॉर्ड किया गया, हालांकि वांगचुक ने कहा था कि उनकी भूख अब “स्थिर” हो गई है �।
16वें दिन स्थिति और गंभीर
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 13 जुलाई को गहरी चिंता जताते हुए बताया कि वांगचुक को लगातार चक्कर आ रहे हैं, मांसपेशियों में तेज कमजोरी आ गई है और उनकी पसलियां साफ नजर आने लगी हैं �। उनका वजन घटकर लगभग 8.25 किलोग्राम तक पहुंच चुका है, जबकि ब्लड शुगर बार-बार 70 mg/dL से नीचे जा रहा है, जबकि सामान्य फास्टिंग शुगर लेवल लगभग 100 mg/dL होना चाहिए �।
प्रदर्शन की मांगें और समर्थन
इस पूरे आंदोलन के केंद्र में परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग है। प्रदर्शन में छात्रों, किसानों और सिविल सोसाइटी संगठनों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है, और कई विपक्षी नेता भी धरना स्थल का दौरा कर अपना समर्थन जता चुके हैं �। वांगचुक ने खुद कई बार कहा है कि वह अपने संवैधानिक अधिकार के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं और किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई को गलत मानते हैं।
सरकार की खामोशी और बढ़ती चिंता
अनशन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिसे लेकर प्रदर्शनकारियों और समर्थकों में नाराजगी बढ़ रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार वांगचुक की सेहत की निगरानी कर रही है, लेकिन बिना भोजन के इतने दिनों तक चलने वाला अनशन शरीर पर गहरा असर डाल रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार गिरता ब्लड शुगर लेवल किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है, खासकर जब यह हफ्तों तक बना रहे।
अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि सरकार इस मामले में कब हस्तक्षेप करेगी, और वांगचुक की सेहत को देखते हुए आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा। फिलहाल धरना स्थल पर तनाव और चिंता का माहौल बना हुआ है, और समर्थक उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।

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