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6 नवम्बर 2026, शुक्र

भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय, हिंदू-मुस्लिम पक्षों के बीच फिर छिड़ी कानूनी जंग

धार, मध्य प्रदेश में भोजशाला-कमल मौला परिसर के भीतर स्तंभों वाला हॉल

मध्य प्रदेश के धार जिले का भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत में है। मई 2026 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को तय बताई गई है। इस लेख में विवाद का पूरा क्रम, अब तक के अदालती आदेश और आगे की प्रक्रिया आसान भाषा में दी गई है।

विवाद की पृष्ठभूमि

धार का यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती (वागदेवी) को समर्पित भोजशाला मानता है, जिसे परमार वंश के राजा भोज से जोड़ा जाता है। मुस्लिम पक्ष इसे 11वीं सदी की कमल मौला मस्जिद बताता है। वर्ष 2003 की एक ASI व्यवस्था के तहत हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को दोपहर की नमाज की अनुमति थी। यही व्यवस्था दो दशक से भी ज्यादा समय तक चली।

हाईकोर्ट का फैसला (15 मई 2026)

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि विवादित परिसर देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर है। अदालत ने ASI की उस पुरानी व्यवस्था को रद्द कर दिया जिसके तहत शुक्रवार को नमाज की अनुमति मिलती थी। हाईकोर्ट ने परिसर के प्रशासन और प्रबंधन का फैसला केंद्र सरकार और ASI पर छोड़ा। फैसले के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इसे ऐतिहासिक बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष और कई संगठनों ने इसे चुनौती देने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट में अब तक क्या हुआ

  • मुस्लिम पक्ष की अपील: मस्जिद के देखभालकर्ता काजी मोइनुद्दीन सहित मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिकाएं दाखिल कीं। वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने इनकी जल्द सुनवाई की मांग की।
  • 14 जुलाई 2026: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने अंतरिम इंतजाम के तौर पर राज्य प्रशासन को परिसर के पास खुली जगह चिह्नित करने को कहा, जहां मुस्लिम समुदाय अंतिम फैसले तक शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ सके।
  • 30 जुलाई 2026: द हिंदू के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश प्रशासन से मुस्लिम पक्ष से मिलकर दरगाह के पास किसी तय जमीन के आवंटन पर विचार करने को कहा। यह सुनवाई उस अर्जी पर थी जिसमें कहा गया था कि दी गई जमीन परिसर से करीब 1.3 किलोमीटर दूर है। अदालत ने साफ किया कि राज्य बेहतर और नजदीकी जगह भी सुझा सकता है।
  • अगली सुनवाई: पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को है और अदालत ने हाईकोर्ट का रिकॉर्ड, जिसमें ASI की रिपोर्ट और नक्शे शामिल हैं, पेश करने को कहा है।

ध्यान रहे, सुप्रीम कोर्ट ने अभी अंतिम फैसला नहीं दिया है। जो इंतजाम हुए हैं, वे अंतरिम हैं और किसी पक्ष के अंतिम अधिकार तय नहीं करते।

सुरक्षा और प्रशासन

फैसले के बाद से धार में सुरक्षा बढ़ाई गई है। शुक्रवार की नमाज के समय कड़ी सुरक्षा और इंतजाम की रिपोर्टें भी आई हैं। प्रशासन ने शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है। हिंदू पक्ष ने भी पहले सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर कहा था कि कोई भी आदेश देने से पहले उन्हें सुना जाए।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

अगर आप धार या आसपास रहते हैं या वहां दर्शन के लिए जाने की योजना बना रहे हैं, तो ये बातें काम की हैं:

  • शुक्रवार को परिसर और आसपास सुरक्षा पाबंदियां हो सकती हैं। जाने से पहले स्थानीय प्रशासन या ASI से समय और नियम की पुष्टि कर लें।
  • स्मारक के अंदर फोटोग्राफी और कई गतिविधियों पर पहले से ASI के नियम लागू हैं।
  • सोशल मीडिया की अपुष्ट पोस्ट शेयर न करें। मामला अदालत में है और तनाव बढ़ाने वाली अफवाहों पर कार्रवाई हो सकती है।
  • 29 अक्टूबर की सुनवाई में अंतिम फैसला आने की संभावना नहीं है। आमतौर पर इस चरण में रिकॉर्ड, दलीलों के क्रम और अंतरिम व्यवस्था पर बात होती है।

अंतिम फैसला इस सवाल का जवाब देगा कि संरक्षित स्मारक की धार्मिक पहचान और पूजा-नमाज के अधिकार कैसे तय होंगे। इस पर आने वाले आदेश का असर ऐसे दूसरे विवादों पर भी पड़ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

भोजशाला विवाद क्या है?

धार के एक ASI-संरक्षित परिसर पर दो दावे हैं। हिंदू पक्ष इसे सरस्वती मंदिर भोजशाला कहता है और मुस्लिम पक्ष इसे कमल मौला मस्जिद।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

15 मई 2026 को हाईकोर्ट ने इसे देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना और शुक्रवार की नमाज की पुरानी ASI व्यवस्था रद्द की।

क्या सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया है?

नहीं। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अब तक सिर्फ अंतरिम निर्देश दिए गए हैं।

अगली सुनवाई कब है?

रिपोर्ट्स के अनुसार 29 अक्टूबर 2026 को। तारीख बदल भी सकती है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की कॉज लिस्ट देखें।

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