गुजरात के टेक्सटाइल हब सूरत में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को कढ़ाई (embroidery) इकाइयों के मजदूरों का प्रस्तावित सत्याग्रह शुरू होने से पहले पुलिस ने दर्जनों कामगारों को हिरासत में लिया। New Indian Express और Bhaskar English दोनों के अनुसार प्रदर्शन कलेक्टर कार्यालय के पास जाना था; पुलिस ने अनुमति न होने का हवाला दिया।
सूरत सिटी DCP राजेश परमार ने New Indian Express को बताया कि कलेक्टर कार्यालय से करीब 100 मीटर पहले 60–70 मजदूर हिरासत में लिए गए। “प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी… आवश्यक शर्तें पूरी नहीं हुईं,” उन्होंने कहा। 10 से अधिक पुलिस बसें/वैन तैनात बताई गईं।
किन नेताओं को लिया गया
Bhaskar English के अनुसार पांडेसरा पुलिस ने विरोध शुरू होने से पहले 70 से अधिक मजदूर नेताओं/कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिनमें शामिल हैं:
- सुरेश सोनवाने — राष्ट्रीय मजदूर सेना
- रमाकांत पांडे — सूरत संघर्ष लेबर यूनियन
- मालखन सिंह वर्मा — सार्वजनिक मजदूर एकता यूनियन
- संदीप पटेल — CJP
- विनय पाठक
New Indian Express ने भी छह से अधिक मजदूर नेताओं सहित करीब 70 हिरासत की बात कही।
मांगे क्या हैं
मजदूरों का आरोप है कि कई कढ़ाई इकाइयों में साप्ताहिक छुट्टी नहीं मिलती, 12 घंटे शिफ्ट चलती है और छुट्टी मांगने पर धमकी/बर्खास्तगी होती है। प्रमुख मांगें—भुगतान वाली साप्ताहिक छुट्टी (रविवार), 12 की जगह 8 घंटे शिफ्ट, समय पर वेतन और वेतन वृद्धि। सूरत का यह सेक्टर उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा समेत राज्यों के प्रवासी मजदूरों पर काफी निर्भर है (New Indian Express)।
New Indian Express के अनुसार केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरीराज सिंह 9 अक्टूबर को सूरत आए थे और मजदूरों के गांव लौटने को स्वतः “पलायन संकट” न बताने की बात कही थी। मंत्री ने मिल मालिक और मजदूर को एक परिवार जैसा संबंध बताने पर जोर दिया, लेकिन मजदूरों की तात्कालिक मांगें—साप्ताहिक छुट्टी और वेतन—अभी सुर्खियों में हैं। पुलिस कार्रवाई ने विवाद को और तेज कर दिया है।
‘गांव चलो आंदोलन’ का बैकग्राउंड
Times of India (3 अक्टूबर) के अनुसार श्रम विभाग के सर्कुलर के बाद 1 अक्टूबर का विरोध वापस लिया गया था, लेकिन यूनियन प्रतिनिधि अजय दुबे ने “गांव चलो आंदोलन” का आह्वान किया—नियोक्ता निर्देश न मानें तो करीब दो महीने गांव लौटें, शिकायत दर्ज करें या दूसरी नौकरी/इकाई चुनें; रविवार को मशीनें बंद करने की भी बात कही गई। 15 अक्टूबर की हिरासत उसी तनाव की अगली कड़ी है।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
- सूरत के कढ़ाई मजदूर: साप्ताहिक छुट्टी और शिफ्ट घंटे कानूनी/श्रम नियमों से जुड़े हैं; शिकायत तंत्र और यूनियन संपर्क महत्वपूर्ण रहेंगे।
- प्रवासी परिवार: वेतन और छुट्टी तय न होने से घर भेजने वाला पैसा और त्योहार की छुट्टी प्रभावित हो सकती है।
- बैकग्राउंड: सूरत टेक्सटाइल अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है; श्रम शर्तें और प्रवासन लंबे समय से जुड़े मुद्दे हैं।
- आगे: हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई, प्रशासन-मजदूर वार्ता और श्रम सर्कुलर का पालन—इन पर नजर रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सूरत में कितने मजदूर हिरासत में लिए गए?
DCP राजेश परमार के अनुसार करीब 60–70 (New Indian Express); Bhaskar English ने 70+ नेताओं/मजदूरों की बात कही।
मुख्य मांगें क्या हैं?
भुगतान वाली साप्ताहिक छुट्टी, 8 घंटे शिफ्ट और समय पर वेतन/वेतन वृद्धि।
गांव चलो आंदोलन क्या है?
अजय दुबे का आह्वान—नियोक्ता श्रम निर्देश न मानें तो गांव लौटना/दूसरी नौकरी चुनना (TOI, अक्टूबर प्रारंभ)।
स्रोत: The New Indian Express, Bhaskar English, Times of India — अक्टूबर 2026। तस्वीर प्रतीकात्मक (सूरत हजीरा औद्योगिक क्षेत्र)।

