बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन ने अपने नाम, चेहरे, आवाज और तस्वीरों के बिना इजाजत इस्तेमाल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को हुई पहली सुनवाई में अदालत ने कोई अंतरिम आदेश देने से पहले एक दिलचस्प कदम उठाया—जज ने कृति के वकील से कहा कि वे “पर्सनैलिटी राइट्स” पर अब तक के फैसलों और शोध-पत्रों का संकलन (compilation) पेश करें, ताकि इस विषय पर एक व्यापक आदेश दिया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। गूगल ट्रेंड्स इंडिया पर “kriti sanon personality rights case” आज लगातार ट्रेंड कर रहा है। आइए समझते हैं कि अदालत में क्या हुआ, पर्सनैलिटी राइट्स आखिर हैं क्या और इसका आम लोगों से क्या लेना-देना है।
अदालत में क्या हुआ?
कानूनी समाचार वेबसाइट LiveLaw की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की एकल पीठ के सामने आया। कृति सेनन की ओर से अधिवक्ता प्रवीण आनंद पेश हुए। सुनवाई की शुरुआत में ही अदालत ने पूछा कि आखिर किन-किन चीजों को पर्सनैलिटी राइट्स के दायरे में माना जाएगा। इस पर आनंद ने कहा कि इसमें किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरा, तस्वीर, उसके चेहरे वाला फोटो या वीडियो और उसका नाम शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना सहमति या अनुमति के किसी के चेहरे का इस्तेमाल करके पैसा कमाना इन अधिकारों का उल्लंघन है।
इसके बाद अदालत ने कहा—“क्या आप मुझे कोई रिसर्च पेपर दे सकते हैं? कृपया एक संकलन दीजिए… मुझे फैसले और पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर अपनी समझ दीजिए।” (LiveLaw के अनुसार, हिंदी अनुवाद) अदालत ने संकेत दिया कि सामग्री देखने के बाद वह एक विस्तृत आदेश पारित करेगी। आनंद ने बताया कि संकलन उसी दिन दाखिल कर दिया जाएगा और इस मामले में अधिकार-क्षेत्र (jurisdiction) का कोई मुद्दा नहीं है।
अदालत ने व्यापक समीक्षा क्यों मांगी?
Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने गौर किया कि ऐसी याचिकाएं अब लगातार आ रही हैं और इनसे जुड़े कानूनी सवालों की गहराई से जांच जरूरी है। संकलन में तीन बातें साफ करने को कहा गया है: पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा कितनी दूर तक जाती है, किसी व्यक्ति की पहचान के कौन-से पहलू कानूनी सुरक्षा के लायक हैं, और क्या हाईकोर्ट का इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी डिवीजन (IPD) ऐसे विवाद सुनने का सही मंच है। यानी यह सिर्फ कृति सेनन का मामला नहीं रह गया—इससे आगे आने वाली याचिकाओं के लिए भी दिशा तय हो सकती है।
कुछ रिपोर्ट्स (जैसे NationPress) के अनुसार याचिका में AI से बनी सामग्री और डिजिटल नकल (impersonation) के जरिये पहचान के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया गया है। अभी तक सामने आई रिपोर्ट्स में यह नहीं बताया गया है कि याचिका में किन-किन वेबसाइटों या कंपनियों को प्रतिवादी बनाया गया है, और न ही अदालत ने अब तक किसी पर कोई आरोप साबित माना है।
पर्सनैलिटी राइट्स क्या होते हैं? आसान भाषा में
भारत में “पर्सनैलिटी राइट्स” या “पब्लिसिटी राइट्स” के लिए कोई अलग कानून नहीं है। अदालतों ने इन्हें धीरे-धीरे अपने फैसलों से आकार दिया है। इसका आधार दो चीजें मानी जाती हैं—संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता का अधिकार (जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के पुट्टास्वामी फैसले में मौलिक अधिकार माना) और किसी मशहूर व्यक्ति की पहचान का व्यावसायिक मूल्य, जिसे कोई दूसरा बिना अनुमति नहीं भुना सकता। आसान शब्दों में—अगर कोई कंपनी किसी अभिनेता की फोटो लगाकर अपना प्रोडक्ट बेचे, उसकी आवाज की नकल से विज्ञापन बनाए या उसके नाम से फर्जी वेबसाइट चलाए, तो वह व्यक्ति अदालत से रोक की मांग कर सकता है।
दो पुराने मामले इस कानून की नींव माने जाते हैं:
- अमिताभ बच्चन (नवंबर 2022): दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला ने 25 नवंबर 2022 को अंतरिम आदेश देकर उनके नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान से जुड़ी खूबियों के बिना अनुमति इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। शिकायत में फर्जी KBC लॉटरी, टी-शर्ट और उनके नाम वाले डोमेन जैसे उदाहरण थे।
- अनिल कपूर (सितंबर 2023): जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने उनके नाम, आवाज, तस्वीर और “झक्कास” जैसे मशहूर संवाद के व्यावसायिक दुरुपयोग पर रोक लगाई। इस आदेश में AI, डीपफेक और फेस-मॉर्फिंग का साफ जिक्र था।
कृति अकेली नहीं: हस्तियों की लंबी सूची
LiveLaw के मुताबिक दिल्ली हाईकोर्ट अब तक कई हस्तियों के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा कर चुका है—इनमें अभिनेत्री कंगना रनौत और तब्बू, अभिनेता विजय देवरकोंडा, क्रिकेटर अभिषेक शर्मा और युवराज सिंह, कांग्रेस नेता शशि थरूर, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, उद्यमी अमन गुप्ता, अभिनेता अल्लू अर्जुन, मोहनलाल, काजोल, आर. माधवन, जूनियर एनटीआर, गायक जुबिन नौटियाल और पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर शामिल हैं। अलग-अलग पीठें ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, करण जौहर, नागार्जुन और श्री श्री रविशंकर के पक्ष में भी आदेश दे चुकी हैं। अभिनेता सलमान खान ने भी इसी तरह का मुकदमा दायर किया है। हाल ही में कंगना रनौत के मामले पर हमारी विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ें।
आम लोगों पर क्या असर?
यह मुद्दा सिर्फ सितारों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर मशहूर चेहरों के डीपफेक वीडियो से फर्जी निवेश योजनाओं, “गारंटीड रिटर्न” वाले ऐप और नकली प्रोडक्ट का प्रचार आम हो गया है। ऐसे विज्ञापन देखकर आम लोग ठगी का शिकार होते हैं। अदालतों के आदेश ऐसी सामग्री हटवाने में मदद करते हैं, लेकिन आपकी अपनी सावधानी सबसे जरूरी है:
- किसी सेलिब्रिटी के वीडियो में पैसे दोगुने करने या किसी ऐप में निवेश की सलाह दिखे तो उस पर भरोसा न करें; पहले उस हस्ती के आधिकारिक अकाउंट और भरोसेमंद समाचार स्रोत देखें।
- आवाज और चेहरे की नकल अब AI से आसानी से बनती है—होंठों की चाल और आवाज का बेमेल होना, अजीब रोशनी या धुंधले किनारे इसके संकेत हो सकते हैं।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- अपनी तस्वीर या वीडियो का गलत इस्तेमाल दिखे तो संबंधित प्लेटफॉर्म के रिपोर्ट/ग्रिवांस विकल्प का इस्तेमाल करें। निजता का अधिकार हर नागरिक का है, सिर्फ मशहूर लोगों का नहीं।
कृति सेनन के बारे में
कृति सेनन ने 2014 में तेलुगु फिल्म “1: नेनोक्कडिने” और हिंदी फिल्म “हीरोपंती” से करियर शुरू किया था। फिल्म “मिमी” के लिए उन्हें 69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला था, जिसे उन्होंने आलिया भट्ट के साथ साझा किया। Times of India के अनुसार वे हाल में “कॉकटेल 2” में शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना के साथ नजर आई थीं। इतनी बड़ी लोकप्रियता की वजह से उनकी तस्वीरें और नाम ऑनलाइन विज्ञापनों में दुरुपयोग का आसान निशाना बनते हैं—याचिका इसी के खिलाफ सुरक्षा मांगती है।
आगे क्या?
29 अक्टूबर की सुनवाई अहम होगी। अगर अदालत संकलन देखने के बाद विस्तृत आदेश देती है, तो उसमें यह साफ हो सकता है कि किसी व्यक्ति की पहचान के कौन-से हिस्से कानूनी रूप से सुरक्षित हैं और ऐसे मामले IPD में सुने जाएंगे या नहीं। इसका असर आगे आने वाली सैकड़ों याचिकाओं, AI कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी पड़ सकता है। फिलहाल अदालत ने इस मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। TrendFlash इस मामले पर नजर रखेगा।
(स्रोत: LiveLaw, Times of India, NationPress—16 अक्टूबर 2026; अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर मामलों के लिए The Hindu और LiveLaw की पुरानी रिपोर्ट्स। अदालत की टिप्पणियां रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, आधिकारिक आदेश की प्रति आने पर अपडेट किया जाएगा।)

