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7 नवम्बर 2026, शनि

E20 पेट्रोल में 31% तक एथेनॉल? कर्नाटक की जांच पर राहुल गांधी का हमला, IOCL-BPCL-HPCL ने तरीके पर उठाए सवाल; जानें आप पर असर

बेंगलुरु के आरआर नगर में भारत पेट्रोलियम का पेट्रोल पंप

बेंगलुरु/नई दिल्ली: देशभर में बिक रहे E20 पेट्रोल में असल में कितना एथेनॉल है, इस पर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक सरकार ने दावा किया है कि राज्य के कई पेट्रोल पंपों से लिए गए नमूनों में एथेनॉल की मात्रा तय सीमा 20% से कहीं ज्यादा, कुछ मामलों में 31.2% तक पाई गई। शनिवार (7 नवंबर 2026) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इन्हीं नतीजों का हवाला देकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। वहीं सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने कर्नाटक की जांच के तरीके पर ही सवाल उठा दिए हैं। यानी फिलहाल यह एक राज्य सरकार का आरोप है, जिसे तेल कंपनियां खारिज कर रही हैं।

कर्नाटक सरकार ने क्या दावा किया?

कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और विधिक माप विज्ञान (Legal Metrology) मंत्री रिजवान अरशद ने शुक्रवार (6 नवंबर) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि विभाग ने अक्टूबर 2026 में बेंगलुरु शहरी, बेंगलुरु ग्रामीण, कोलार, चिक्कबल्लापुर, रामनगर, तुमकुरु और मंगलुरु (दक्षिण कन्नड़) से पेट्रोल के नमूने जुटाए। द हिंदू बिजनेसलाइन के मुताबिक कुल 63 नमूने लिए गए थे, जिनमें से 14 की एथेनॉल जांच के नतीजे सामने रखे गए।

मंत्री के अनुसार ये नमूने बेंगलुरु के NABL-मान्यता प्राप्त और ISO प्रमाणित श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में जांचे गए। 14 में से 11 नमूनों में एथेनॉल 20% से अधिक मिला। सरकार द्वारा जारी आंकड़े इस तरह हैं:

  • IOCL: 31.2% और 20.8%
  • HPCL: 30.5% (MS-Power), 27% और 22.4%
  • BPCL: 26.5% (MS-Speed), 24.2%, 22.6% और 19.9%
  • Nayara: 26.1% और 20.6%
  • Shell: 25.5% और 13.5%
  • MRPL: 19.2%

राज्य सरकार का यह भी आरोप है कि नमूने पहले IOCL और BPCL की अपनी लैब में भेजे गए थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट में एथेनॉल की मात्रा बताई ही नहीं गई, जबकि यह जांच के तय मानकों में शामिल है। मंत्री ने इसे पारदर्शिता का सवाल बताया।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने शनिवार को X पर हिंदी में पोस्ट करते हुए E20 की तुलना पुराने IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) से की और आरोप लगाया कि जनता की गाड़ियों से पेट्रोल की चोरी हो रही है। उन्होंने कर्नाटक के आंकड़े गिनाते हुए कहा कि सरकारी और निजी, दोनों तरह की कंपनियों के नमूने सीमा से ऊपर पाए गए, और केंद्र से देशभर में बिक रहे ईंधन में एथेनॉल की असली मात्रा सार्वजनिक करने की मांग की। गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज होने की संभावना है।

तेल कंपनियों का जवाब: जांच का तरीका गलत

IOCL, BPCL और HPCL ने संयुक्त बयान में कहा कि कर्नाटक समेत उनके पूरे नेटवर्क पर बिकने वाला E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के IS 17021 मानक के अनुरूप है, जिसमें एथेनॉल की मात्रा 19 से 21% के बीच तय है। कंपनियों की मुख्य आपत्तियां ये हैं:

  • IS 17021 के तहत एथेनॉल मापने के तय तरीके हैं: FTIR (ASTM D5845), वॉटर एक्सट्रैक्शन (Annex C) या गैस क्रोमैटोग्राफी (ASTM D4815/D6839)। गैस क्रोमैटोग्राफी में नमूने को पहले बिना ऑक्सीजनेट वाले पेट्रोल के साथ 1:1 में पतला करना और E10 के प्रमाणित रेफरेंस सैंपल से मिलान करना जरूरी है।
  • कर्नाटक की रिपोर्टों में सिर्फ “Ethanol % by Gas Chromatography” लिखा है; कौन सा मानक तरीका, डाइल्यूशन या रेफरेंस इस्तेमाल हुआ, यह नहीं बताया गया।
  • रिपोर्ट में इन नमूनों का घनत्व 0.742 से 0.749 g/cc दिखाया गया है, जबकि कंपनियों के अपने सर्वे में E20 का घनत्व 0.752 से 0.760 g/cc रहा। कंपनियों का तर्क है कि एथेनॉल पेट्रोल से भारी होता है, इसलिए ज्यादा एथेनॉल होने पर घनत्व बढ़ना चाहिए, घटना नहीं।

कंपनियों ने राज्य सरकार से सैंपलिंग से जुड़े पूरे दस्तावेज, आउटलेट-वार लैब रिपोर्ट, जांच का तरीका और दोबारा जांच के लिए नमूने साझा करने की मांग की है।

E20 पेट्रोल क्या है और विवाद क्यों?

E20 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20% एनहाइड्रस (पानी रहित) एथेनॉल मिला हो। केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम के तहत इसे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, विदेशी मुद्रा बचाने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के लिए लाया गया है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और अनाज से बनता है, इसलिए इसे किसानों की आमदनी से भी जोड़ा जाता है।

दूसरी ओर, कई वाहन मालिक लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं कि E20 से पुरानी गाड़ियों का माइलेज घटता है और रबर-प्लास्टिक के पुर्जों पर असर पड़ सकता है। एथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले प्रति लीटर कम ऊर्जा होती है, इसलिए सीमा से ज्यादा मिलावट हो तो माइलेज पर असर पड़ना स्वाभाविक माना जाता है। यही वजह है कि कर्नाटक के दावों ने आम लोगों का ध्यान खींचा है।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

  • अभी घबराने की जरूरत नहीं: 31% एथेनॉल का आंकड़ा अभी एक राज्य सरकार का दावा है, जिस पर तेल कंपनियों ने तकनीकी आपत्तियां उठाई हैं। जब तक स्वतंत्र दोबारा जांच नहीं होती, इसे साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
  • माइलेज पर नजर रखें: अगर आपकी गाड़ी का माइलेज अचानक काफी गिरा है, तो कुछ हफ्तों तक हर फ्यूल भराई का किलोमीटर और लीटर नोट करें। इससे सर्विस सेंटर या शिकायत में ठोस आधार मिलेगा।
  • गाड़ी की अनुकूलता जांचें: अपनी गाड़ी की ओनर मैनुअल या कंपनी से पता करें कि वह E20 के लिए उपयुक्त है या नहीं। पुरानी गाड़ियों में ईंधन लाइन और सील की नियमित जांच करवाएं।
  • पंप पर शिकायत का हक: ईंधन की गुणवत्ता पर शक हो तो आप पंप पर उपलब्ध शिकायत पुस्तिका, तेल कंपनी की कस्टमर हेल्पलाइन या राज्य के विधिक माप विज्ञान/उपभोक्ता विभाग से शिकायत कर सकते हैं।

आगे क्या?

अब नजर इस पर है कि कर्नाटक सरकार तेल कंपनियों की मांग के मुताबिक नमूने और दस्तावेज साझा करती है या नहीं, और क्या किसी तटस्थ लैब में तय BIS तरीके से दोबारा जांच होती है। केंद्र सरकार या पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया भी इस विवाद की दिशा तय करेगी। अगर दोबारा जांच में भी एथेनॉल तय सीमा से ज्यादा मिलता है, तो यह देशभर में ईंधन गुणवत्ता की निगरानी पर बड़ा सवाल होगा; और अगर नतीजे गलत निकले, तो कर्नाटक सरकार की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे।

स्रोत: The Hindu, The Hindu BusinessLine, Business Standard और India Today की 6–7 नवंबर 2026 की रिपोर्ट। यह खबर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है; दोनों पक्षों के दावे जांच के अधीन हैं।

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