भारत और पोलैंड ने अपने रिश्तों को नई रफ्तार देने के लिए 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, AI, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं और उनके साथ करीब 100 बड़ी कंपनियों के CEO और उद्योग प्रतिनिधि आए हैं।
मुलाकात के 4 आधिकारिक नतीजे
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी ‘लिस्ट ऑफ आउटकम्स’ में चार नतीजे गिनाए गए हैं:
- व्यापार: 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य।
- आपदा प्रबंधन: पोलैंड भारत की पहल वाले कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) से जुड़ा।
- रक्षा: दोनों देशों के बीच ‘डिफेंस इंडस्ट्री डायलॉग’ शुरू करने पर सहमति।
- आतंकवाद: काउंटर-टेररिज्म पर अलग से बातचीत (डायलॉग) करने पर सहमति।
संयुक्त बयान की मुख्य बातें
- रक्षा सहयोग: सितंबर 2026 में वारसॉ में हुई रक्षा पर संयुक्त कार्य समूह की 8वीं बैठक के नतीजों का स्वागत किया गया। रक्षा उद्योगों के बीच को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन जैसे साझेदारी के रास्ते तलाशे जाएंगे। गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा और आदान-प्रदान से जुड़े समझौते पर जल्द हस्ताक्षर की उम्मीद जताई गई।
- टेक्नोलॉजी: AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर साझा रिसर्च और स्टार्टअप साझेदारी बढ़ाने पर सहमति। बैटरी रीसाइक्लिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स की रिफाइनिंग में सहयोग की संभावना पर जोर।
- क्रिटिकल मिनरल्स: भूविज्ञान, खनन और क्रिटिकल मिनरल्स पर एक MoU पर बातचीत चल रही है, यानी यह अभी साइन नहीं हुआ है।
- कनेक्टिविटी: भारत और पोलैंड के बीच सीधी उड़ानें बढ़ाने के लिए नागरिक उड्डयन अधिकारियों को सीधे बातचीत करने को कहा गया। बंदरगाहों के सहयोग और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का भी जिक्र हुआ।
- वैश्विक मुद्दे: पोलैंड ने सुधारित और विस्तारित UN सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन दोहराया, साथ ही 2028-29 के लिए अस्थायी सीट की भारत की दावेदारी का भी समर्थन किया। दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की।
- यूक्रेन: दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध पर गहरी चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की जरूरत पर जोर दिया।
भारत ने पोलैंड को इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI), इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस से जुड़ने का न्योता भी दिया। टस्क ने प्रधानमंत्री मोदी को पोलैंड आने का निमंत्रण दिया।
मोदी ने क्या कहा?
PTI के मुताबिक, संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं और पोलैंड की कंपनियों को इन रणनीतिक क्षेत्रों में भारत के साथ को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन का न्योता दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू होने के बाद भारत से पोलैंड को मशीनरी, केमिकल्स, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सामान के निर्यात के नए मौके खुलेंगे। मोदी ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जामनगर और कोल्हापुर के राजपरिवारों द्वारा हजारों पोलिश बच्चों और परिवारों को शरण देने का भी जिक्र किया।
पृष्ठभूमि: 2024 में बनी थी रणनीतिक साझेदारी
अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्ते को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) का दर्जा दिया गया था और 2024-2028 के लिए एक्शन प्लान अपनाया गया था। वह 45 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पोलैंड यात्रा थी। सितंबर 2026 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोर्स्की ने वारसॉ में इस एक्शन प्लान की मध्यावधि समीक्षा की थी, जिसका दोनों प्रधानमंत्रियों ने समर्थन किया।
पोलैंड के लोग आज भी नवानगर (जामनगर) के महाराजा जाम साहब को ‘गुड महाराजा’ के नाम से याद करते हैं, जिनकी याद में वारसॉ में स्मारक है। संयुक्त बयान में 2022 में ऑपरेशन गंगा के दौरान यूक्रेन में फंसे 2,000 से ज्यादा भारतीय छात्रों की मदद के लिए पोलैंड का आभार भी जताया गया। संयुक्त बयान के मुताबिक, पोलैंड की अर्थव्यवस्था हाल ही में 1 ट्रिलियन डॉलर GDP का आंकड़ा पार कर चुकी है।
आम भारतीयों के लिए इसका मतलब
व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य और EU-India FTA मिलकर भारतीय निर्यातकों, खासकर इंजीनियरिंग, केमिकल और फार्मा कंपनियों के लिए मध्य और पूर्वी यूरोप का बाजार खोल सकते हैं। पोलैंड खुद को भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप का ‘गेटवे’ बताता है। सीधी उड़ानें बढ़ने पर पढ़ाई, नौकरी और पर्यटन के लिए पोलैंड जाने वाले भारतीयों को सुविधा होगी। हालांकि ज्यादातर बातें अभी इरादे और बातचीत के स्तर पर हैं; ठोस असर इस पर निर्भर करेगा कि FTA पर हस्ताक्षर और अनुमोदन कब होता है और प्रस्तावित MoU कब साइन होते हैं।
आगे क्या?
ANI के मुताबिक, दिल्ली में बैठक के बाद टस्क बेंगलुरु जाएंगे, जहां उनके साथ पोलिश स्पेस एजेंसी और नई टेक्नोलॉजी व अंतरिक्ष उद्योग की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि होंगे। आने वाले महीनों में गोपनीय सूचना सुरक्षा समझौते, संस्कृति-विज्ञान-उच्च शिक्षा सहयोग समझौते और क्रिटिकल मिनरल्स MoU पर नजर रहेगी।
स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय (भारत-पोलैंड संयुक्त बयान और लिस्ट ऑफ आउटकम्स), PTI/Economic Times, IANS, ANI।

