Breaking
7 Jul 2026, Tue

समाजवादी पार्टी में टूट की अटकलें तेज, राजभर का दावा – ‘बागी सांसदों का नेतृत्व करेंगे बलिया के नेता’, अखिलेश ने किया खारिज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा उबाल आ गया है, जब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (SP) में टूट होने का बड़ा दावा किया। राजभर ने कहा कि पार्टी में बगावत होना “तय है” और इसका नेतृत्व बलिया के एक नेता करेंगे।

राजभर ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कल से सब पूछ रहे हो कि सपा में क्या टूट होने वाली है? तो सुनो! सपा के बागी सांसदों के गुट का नेतृत्व उत्तर प्रदेश की ‘बागी भूमि’ का एक लाल करेगा।” इसे सपा सांसद सनातन पांडे की ओर इशारा माना जा रहा है, जो बलिया से सांसद हैं।

राजभर ने यह भी दावा किया कि सपा के एक कार्यक्रम में हाल ही में ब्राह्मण समाज का अपमान किया गया, जिससे बलिया के इस नेता को गहरी चोट पहुंची है, और इसी वजह से यह “आग में घी डालने” वाला काम हुआ है।

उपमुख्यमंत्री ने भी किया दावा

राजभर के अलावा यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी बुधवार को दावा किया था कि सपा के 25-26 सांसद पार्टी छोड़ने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा किसी तरह की तोड़फोड़ की कोशिश नहीं कर रही है।

राजभर ने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर बयानबाजी छोड़कर अपने नाराज सांसदों को बचाने के लिए “Save Our MPs” कैंपेन शुरू करना चाहिए, और उनके घर जाकर माफी मांगनी चाहिए।

अखिलेश यादव का पलटवार

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इन सभी दावों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने राजभर पर निशाना साधते हुए X पर एक पोस्ट में उन्हें “अफवाह फैलाने वाला मंत्री” कहा। अखिलेश ने आरोप लगाया कि राजभर को टिकट के इच्छुक लोग, अधिकारी और ठेकेदार ढूंढ रहे हैं, जिनसे टिकट, ट्रांसफर, पोस्टिंग और ठेकों के वादे पर एडवांस पैसा लिया गया था।

अखिलेश ने यह भी कहा कि जो लोग “30 सीटों” की बात कर रहे थे, अब उन्हें एक भी जीतने लायक सीट मिलने में दिक्कत हो रही है, और इसी वजह से वे अब सवालों के घेरे में हैं।

सपा सांसद का भी जवाब

इस बीच सपा सांसद राजीव राय ने भी इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि दो नेता निराशा में बयान दे रहे हैं क्योंकि भाजपा नेतृत्व को उनकी सीमित राजनीतिक भूमिका का अंदाजा हो गया है। राय ने कहा कि एक नेता अपनी सरकारी कुर्सी बचाने में लगा है तो दूसरा अपने बेटों के लिए टिकट मांग रहा है।

क्या वास्तव में आसान है टूट?

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी में बड़े पैमाने पर टूट होना आसान नहीं है, जैसा कि शिवसेना (उद्धव गुट) या टीएमसी में हुआ था। भारत के दल-बदल कानून के अनुसार, संसदीय दल में वैध टूट के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। सपा के 37 लोकसभा सांसदों के हिसाब से इसका मतलब है कि लगभग 25 सांसदों को एक साथ पार्टी छोड़नी होगी, जो व्यावहारिक रूप से बहुत मुश्किल माना जा रहा है।

बता दें कि सपा के 37 सांसदों में से 5 अखिलेश यादव के परिवार से ही हैं – खुद अखिलेश, उनकी पत्नी डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, आदित्य यादव और प्रतीक यादव। इसके अलावा पार्टी के ज्यादातर सांसद दलित और ओबीसी समुदाय से आते हैं, जिन्हें खुद अखिलेश ने राजनीति में स्थापित किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यही वजह है कि बड़ी संख्या में सांसदों का पार्टी छोड़ना आसान नहीं होगा, हालांकि एक-दो नेताओं के अलग होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटा है, और सियासी पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *