भारत के लिए कच्चा तेल अक्टूबर 2026 में लगभग 14 साल की सबसे ऊंची मासिक औसत कीमत पर पहुंच गया है। हिंदू बिजनेसलाइन के अनुसार भारत की कच्चे तेल की “इंडियन बास्केट” की औसत कीमत 26 अक्टूबर तक $120.46 प्रति बैरल रही। यह मार्च 2012 के बाद सबसे ऊंचा मासिक औसत है, तब यह $123.61 था। बिजनेस स्टैंडर्ड ने भी अक्टूबर में बास्केट का औसत करीब $120 बताया है।
इंडियन बास्केट की कीमत कितनी
इंडियन बास्केट वह औसत कीमत है जिस पर भारत की रिफाइनरियां विदेश से कच्चा तेल खरीदती हैं। यह पेट्रोल-डीजल का पंप पर मिलने वाला दाम नहीं है। हिंदू बिजनेसलाइन के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- अक्टूबर (26 तारीख तक) का औसत: $120.46 प्रति बैरल, यानी सितंबर के $116.77 से करीब 4% ज्यादा।
- अगस्त 2026 का औसत: $90.19 प्रति बैरल।
- 26 अक्टूबर को बास्केट की कीमत: $123.72 प्रति बैरल।
- मंगलवार शाम को ब्रेंट $114.6, WTI $100.9 और मुरबन $117.7 प्रति बैरल पर चल रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार 2026 में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें करीब 80% चढ़ चुकी हैं। हिंदू बिजनेसलाइन के अनुसार मंगलवार को सऊदी अरब की एक बड़ी रिफाइनरी पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले से आपूर्ति की चिंता बढ़ी। इंडिया टुडे के अनुसार बुधवार, 28 अक्टूबर को ब्रेंट करीब $114.45 प्रति बैरल पर रहा।
तेल इतना महंगा क्यों
हिंदू बिजनेसलाइन के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ाई है और समुद्री बीमा प्रीमियम तथा माल ढुलाई की दरें ऊपर गई हैं। विश्लेषकों और रिफाइनरों ने कहा कि रिकॉर्ड ऊंचे शिपिंग फ्रेट और बीमा तेल की कीमतों में अतिरिक्त उतार-चढ़ाव जोड़ रहे हैं। अब लगभग सभी कार्गो “डिलीवर्ड बेसिस” पर खरीदे जा रहे हैं, जबकि पहले करीब आधे ऐसे थे।
सरकार और तेल कंपनियों पर असर
- आयात बिल: बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार अप्रैल-सितंबर 2026-27 में कच्चे तेल का आयात 46.4% बढ़कर $90.6 अरब रहा। शुद्ध तेल और गैस आयात बिल 35% बढ़कर $81.1 अरब पहुंचा।
- चालू खाते का घाटा: आईसीआरए के अनुसार कच्चे तेल की औसत कीमत में $10 प्रति बैरल की बढ़त से साल भर में शुद्ध तेल आयात करीब $12-13 अरब बढ़ता है और चालू खाता घाटा GDP का करीब 0.3% बढ़ता है। चालू खाता घाटा अप्रैल-जुलाई में $11.2 अरब रहा, जो पिछले साल $6.6 अरब था।
- तेल कंपनियों का घाटा: मई में कंपनियों ने खुदरा ईंधन के दाम चार किस्तों में करीब ₹7.50 प्रति लीटर बढ़ाए थे। इसके बाद भी आईसीआरए के प्रशांत वसिष्ठ के अनुसार डीजल पर अंडर-रिकवरी बढ़कर करीब ₹20 प्रति लीटर हो गई है, जो 23 सितंबर को ₹9 प्रति लीटर आंकी गई थी। तीनों सरकारी तेल कंपनियों की LPG पर अंडर-रिकवरी करीब ₹62,000 करोड़ है।
- उत्पाद शुल्क: सरकार पेट्रोल-डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क ₹10 प्रति लीटर घटा चुकी है। अप्रैल-अगस्त में केंद्र का उत्पाद शुल्क संग्रह करीब 23% घटकर ₹86,687 करोड़ रहा।
- उर्वरक सब्सिडी: बजट अनुमान ₹1.70 लाख करोड़ का 58% से ज्यादा पांच महीनों में खर्च हो चुका है। मौजूदा रुझान रहा तो बिल अनुमान से 76% से ज्यादा बढ़कर करीब ₹3 लाख करोड़ हो सकता है।
महंगाई और रुपये पर नजर
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार थोक महंगाई (WPI) सितंबर में 11.4% रही। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5% किया और खुदरा महंगाई का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% किया। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार अगर तेल ऊंचा रहा तो असर पहले थोक महंगाई पर दिखेगा, पर निर्माता त्योहारी सीजन खत्म होने तक बोझ उपभोक्ताओं पर डालने से बचेंगे।
हिंदू बिजनेसलाइन के अनुसार रुपया मंगलवार को 95.08 प्रति डॉलर के आसपास था। विश्लेषकों का कहना है कि तेल और डॉलर की चाल रुपये को प्रभावित करेगी। हिंदू बिजनेसलाइन के अनुसार बुधवार को रुपया अनंतिम रूप से 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
पहले का सरकारी अनुमान क्या था
बिजनेस स्टैंडर्ड ने बताया कि मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने मार्च में संसद की स्थायी समिति को बताया था कि अगर कच्चा तेल $130 पर दो-तीन तिमाहियों तक रहा तो वित्त वर्ष 2027 में GDP वृद्धि घटकर 6.4% हो सकती है। उस स्थिति में खुदरा महंगाई 5.5% और राजकोषीय घाटा GDP का 5.6% तक जा सकता था। यह एक परिदृश्य विश्लेषण था, भविष्यवाणी नहीं।
आम लोगों पर क्या असर हो सकता है
जानकारों के मुताबिक अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो तेल कंपनियों को खुदरा कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। फिलहाल ऐसा कोई फैसला घोषित नहीं हुआ है। इसलिए अगले कुछ हफ्तों में पश्चिम एशिया के हालात, सरकार के फैसले और रुपये की चाल पर नजर रखना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
इंडियन बास्केट की कीमत क्या है?
26 अक्टूबर तक अक्टूबर का औसत $120.46 प्रति बैरल रहा।
क्या यह रिकॉर्ड स्तर है?
नहीं, पर यह मार्च 2012 के बाद सबसे ऊंचा मासिक औसत है।
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं?
इस रिपोर्ट के समय तक खुदरा दाम बढ़ाने की कोई नई घोषणा नहीं हुई है। तेल कंपनियां अंडर-रिकवरी झेल रही हैं।
भारत के आयात बिल पर क्या असर है?
अप्रैल-सितंबर में शुद्ध तेल और गैस आयात बिल 35% बढ़कर $81.1 अरब हुआ।
नोट: जानकारी हिंदू बिजनेसलाइन (27 अक्टूबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (26 अक्टूबर 2026) और इंडिया टुडे (28 अक्टूबर 2026) पर आधारित है। अक्टूबर का औसत अनंतिम है।

