
नई दिल्ली: भारतीय सेना ने अपनी वर्दी से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। जून 2026 में सेना ने 174 पेज का “Army Uniforms-2026 Pamphlet” जारी किया, जो पिछले 8 सालों में ड्रेस रेगुलेशन का पहला व्यापक अपडेट है। इस दस्तावेज में फॉर्मल ड्रेस, विंटर वर्किंग ड्रेस, सेरेमोनियल यूनिफॉर्म, ग्रूमिंग स्टैंडर्ड और महिला अधिकारियों के लिए कपड़ों के विकल्प तक सब कुछ शामिल है।
अंग्रेजों के जमाने के नियम हुए खत्म
इस नए ड्रेस कोड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अंग्रेजी हुकूमत के दौर के कई पुराने शब्द और परंपराओं को आधिकारिक उपयोग से हटा दिया गया है। इनमें “Royal” जैसे औपनिवेशिक शब्द भी शामिल हैं, जो अब सेना की आधिकारिक भाषा में इस्तेमाल नहीं होंगे।
देसी ‘बंदी जैकेट’ की हुई एंट्री
नए ड्रेस कोड में एक बड़ा और खास बदलाव यह है कि भारतीय अधिकारियों के लिए अब “बंदी जैकेट” को औपचारिक सिविल पोशाक के रूप में शामिल किया गया है। यह पूरी तरह स्वदेशी पहचान वाली पोशाक है, जिसे फुल-स्लीव शर्ट, फॉर्मल ट्राउजर और बंद जूतों के साथ पहना जाएगा। यह बदलाव सेना में भारतीय सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
विंटर यूनिफॉर्म में आया नया ‘बैटल जैकेट’
नए पैम्फलेट के अनुसार, सभी रैंकों के लिए “बैटल जैकेट” के साथ एक नई विंटर वर्किंग ड्रेस पेश की गई है। यह जैकेट अब धीरे-धीरे पुरानी जर्सी-आधारित विंटर यूनिफॉर्म (Dress 3A) की जगह लेगी। इस पूरे बदलाव को जून 2029 तक पूरी तरह लागू किया जाएगा।
परेड में तलवार लेकर चलना अब ऑप्शनल
नई ड्रेस गाइडलाइन के मुताबिक, परेड की समीक्षा करने वाले अधिकारियों (Reviewing Officers) के लिए सेरेमोनियल तलवार लेकर चलना अब अनिवार्य नहीं रहा – यह उनकी इच्छा पर निर्भर करेगा। हालांकि परेड कमांडर, कंटिंजेंट कमांडर और गणतंत्र दिवस जैसे बड़े सेरेमोनियल अवसरों पर तय जवानों के लिए तलवार अभी भी अधिकृत है।
मेस ड्रेस में भी बदलाव
इसके अलावा मेस ड्रेस नंबर 5 और 6 से “पाउच बेल्ट” को भी हटा दिया गया है, हालांकि कर्नल रैंक तक के कुछ आर्म्स और सर्विसेज के लिए रेजिमेंटल और कोर फंक्शन के दौरान इसे इस्तेमाल करने की अनुमति बनी रहेगी।
क्यों हुआ यह बदलाव?
भारतीय सेना की ड्रेस पॉलिसी सर्विस रेगुलेशन के जरिए तय होती है, जिसमें फॉर्मल, सेरेमोनियल, मेस और वर्किंग यूनिफॉर्म सभी शामिल हैं। पिछला बड़ा अपडेट 8 साल पहले आया था, इसलिए इस नए पैम्फलेट को आधुनिक जरूरतों, भारतीय पहचान को बढ़ावा देने और सैनिकों के लिए ज्यादा आरामदायक वर्दी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय सेना आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत अपने उपकरणों, हथियारों और अब वर्दी में भी भारतीय डिजाइन और तकनीक को प्राथमिकता दे रही है।