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7 नवम्बर 2026, शनि

JEE Advanced में बड़ा बदलाव? सिर्फ PCM नहीं, अब Aptitude टेस्ट भी होगा शामिल – जानें पूरा प्रस्ताव

IIT कानपुर परिसर का रात का दृश्य

देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाने वाली JEE Advanced के पैटर्न में बदलाव की चर्चा लंबे समय से है। जून 2026 में खबर आई थी कि IIT कानपुर ने पारंपरिक फिजिक्स-केमिस्ट्री-मैथ्स (PCM) के साथ एप्टीट्यूड-आधारित सवाल जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है। उस समय यह सिर्फ प्रस्ताव था। सितंबर 2026 में हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया कि यह विचार अब पायलट (परीक्षण) चरण में पहुंच चुका है।

प्रस्ताव असल में क्या है?

IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने कोचिंग उद्योग के बढ़ते प्रभाव और उससे परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक व मानसिक दबाव पर चिंता जताई थी। प्रस्ताव का मकसद ऐसी परीक्षा बनाना है जो रटे हुए फॉर्मूलों से ज्यादा क्वांटिटेटिव और रीजनिंग क्षमता, यानी सोचने-समझने की ताकत को परखे। इस मुद्दे पर पहली औपचारिक चर्चा 25 अगस्त 2025 को 55वीं IIT काउंसिल बैठक में हुई थी। काउंसिल की बैठक के ब्योरे जनवरी 2026 में जारी हुए, जिनमें ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड (JAB) और IIT कानपुर से इसकी व्यवहार्यता जांचने को कहा गया।

एडेप्टिव टेस्टिंग क्या होती है?

एडेप्टिव टेस्ट में हर छात्र को एक जैसे सवाल नहीं मिलते। शुरुआत में अलग-अलग तरह के सवाल दिए जाते हैं और छात्र के जवाबों के आधार पर अगले सवालों की कठिनाई तय होती है। यानी अच्छा प्रदर्शन करने पर सवाल कठिन होते जाएंगे। IIT कानपुर यह भी देख रहा है कि अलग-अलग कठिनाई के सवाल बनाने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल हो सके, ताकि सवालों का बड़ा बैंक बने और नकल या लीक की गुंजाइश घटे।

अब तक की स्थिति: पायलट

  • हाल ही में कई IITs के करीब 4,000 पहले साल के बी.टेक छात्रों पर पायलट टेस्ट हुआ।
  • इसका लक्ष्य डेटा जुटाना और यह देखना है कि एडेप्टिव टेस्ट के अंक छात्रों की असली क्षमता और JEE Advanced के नतीजों से कितने मेल खाते हैं।
  • डेटा की प्रोसेसिंग चल रही है। निदेशक के अनुसार शोध में कम से कम तीन साल लगेंगे।
  • अगर 2030 से नई व्यवस्था लागू करनी है, तो घोषणा 2027 की शुरुआत तक करनी होगी। अंतिम फैसला IIT निदेशक और शिक्षा मंत्रालय मिलकर लेंगे।

मौजूदा JEE Advanced पैटर्न

JEE Advanced 2026 परीक्षा 17 मई 2026 को हुई, जिसका आयोजन IIT रुड़की ने किया। अभी परीक्षा दो पेपर में होती है, हर पेपर 3 घंटे का होता है और सवाल सिंगल करेक्ट, मल्टीपल करेक्ट और न्यूमेरिकल प्रकार के होते हैं। इस फॉर्मेट में अभी कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ है। JEE Main का आयोजन NTA करती है, जबकि JEE Advanced को एक IIT रोटेशन के आधार पर कराता है।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

  • 2026-2028 के उम्मीदवार: मौजूदा सत्रों पर असर की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है। पुराने पैटर्न की तैयारी जारी रखें।
  • 2030 के बाद: अगर योजना मंजूर हुई तो स्कूल स्तर से ही तर्कशक्ति और एप्टीट्यूड पर जोर बढ़ेगा।
  • विशेषज्ञों की राय: कुछ मानते हैं कि इससे कोचिंग पर निर्भरता घटेगी, जबकि कुछ को पारदर्शिता और संसाधनहीन छात्रों के लिए निष्पक्षता की चिंता है।
  • किसी भी बदलाव की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट jeeadv.ac.in से करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या JEE Advanced का पैटर्न बदल गया है?

नहीं। अभी यह प्रस्ताव और पायलट चरण में है। फिलहाल मौजूदा पैटर्न ही लागू है।

एडेप्टिव टेस्ट कब तक आ सकता है?

HT के अनुसार IITs 2030 तक इसे लाने का लक्ष्य रखते हैं, पर इसके लिए कम से कम तीन साल का शोध और 2027 की शुरुआत तक घोषणा जरूरी है।

पायलट में कितने छात्र शामिल हुए?

करीब 4,000 पहले साल के छात्र, कई IITs से।

अंतिम फैसला कौन लेगा?

IIT निदेशक और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय मिलकर।

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