
नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन शुरू हो चुका है और असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने ITR फॉर्म्स में कई बड़े बदलाव किए हैं। टैक्सपेयर्स को अब पहले से कहीं ज्यादा जानकारियां डिटेल में देनी होंगी, और अगर इसमें कोई चूक हुई तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस आने का खतरा बढ़ गया है। आइए जानते हैं वो 10 अहम जानकारियां, जो इस बार ITR फाइल करते समय बतानी जरूरी होंगी।
- Form 10-IEA की पूरी डिटेल
पहले टैक्सपेयर्स को सिर्फ पिछले और मौजूदा असेसमेंट ईयर की जानकारी देनी होती थी। अब अगर आपने किसी भी साल न्यू टैक्स रिजीम से बाहर निकलने के लिए Form 10-IEA फाइल किया है, तो उसकी पूरी डिटेल बतानी अनिवार्य होगी।
- F&O, इंट्राडे और कमोडिटी ट्रेडिंग अलग-अलग बताना
अगर आप शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O), इंट्राडे इक्विटी, कमोडिटी या करेंसी ट्रेडिंग करते हैं, तो अब इन्हें एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग रिपोर्ट करना होगा। पहले ये सब क्लब करके दिखाए जा सकते थे।
- बैंक अकाउंट बैलेंस की अनिवार्य जानकारी
ITR-4 (Sugam) फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए अब 31 मार्च 2026 तक के बैंक अकाउंट बैलेंस की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है, जो पहले वैकल्पिक था।
- दो हाउस प्रॉपर्टी से आय
अब ITR-1 और ITR-4 फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स दो हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली आय भी इन्हीं सरल फॉर्म्स में दिखा सकते हैं। पहले एक से ज्यादा प्रॉपर्टी की आय के लिए ITR-2 भरना पड़ता था।
- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) की सीमा
अगर आपका लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन 1.25 लाख रुपये तक है, तो अब इसे ITR-1 या ITR-4 में ही रिपोर्ट किया जा सकता है। इससे ज्यादा गेन होने पर ITR-2 या ITR-3 भरना होगा।
- विदेशी आय की डिटेल (Schedule FA Point G)
फ्रीलांसर्स, कंसल्टेंट्स, रिमोट वर्कर्स और विदेशी क्लाइंट्स से कमाई करने वालों के लिए सख्त नियम लागू हुए हैं। विदेशी आय अब Schedule FA Point G के तहत रिपोर्ट करनी अनिवार्य है।
- विदेशी पेंशन और DTAA बेनिफिट्स
जो टैक्सपेयर्स विदेशी पेंशन पा रहे हैं या डबल टैक्सेशन एवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत लाभ क्लेम कर रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से ITR-2 या ITR-3 ही फाइल करना होगा।
- राजनीतिक दान (80G और 80GGC) की अतिरिक्त डिटेल
सेक्शन 80G और 80GGC के तहत राजनीतिक दान पर डिडक्शन क्लेम करने वालों को अब अतिरिक्त जानकारी देनी होगी। नकद दान पर खास तौर पर ज्यादा जांच हो सकती है।
- एसेट्स और लायबिलिटीज की नई सीमा
ITR-3 में एसेट्स और लायबिलिटीज रिपोर्ट करने की सीमा अब 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है।
- इन्वेस्टमेंट से जुड़ी नई फील्ड
प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम के तहत ITR-4 फाइल करने वालों के लिए शेड्यूल BP के फाइनेंशियल पार्टिकुलर्स सेक्शन में निवेश से जुड़ी एक नई फील्ड जोड़ी गई है। फिलहाल यह वैकल्पिक है, लेकिन आगे चलकर इसे अनिवार्य किया जा सकता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार सही ITR फॉर्म चुनना और सही सेक्शन में सही जानकारी भरना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। छोटी सी गलती या मिसमैच होने पर भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस आने की संभावना बढ़ गई है। ITR-3 फाइल करने वालों के लिए नॉन-ऑडिट केस में आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है, जबकि ऑडिट के दायरे में आने वालों के लिए डेडलाइन 31 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
सलाह दी जाती है कि टैक्सपेयर्स अपना ITR फाइल करने से पहले किसी टैक्स एक्सपर्ट या CA से सलाह जरूर लें, ताकि किसी भी गलत जानकारी या मिसमैच से बचा जा सके।