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7 नवम्बर 2026, शनि

‘कांटे’ और ‘शूटआउट एट वडाला’ के निर्देशक संजय गुप्ता का निधन, घर में गिरने से सिर में लगी थी चोट; पुलिस ने दर्ज की ADR

फिल्म निर्देशक संजय गुप्ता

हिंदी सिनेमा में स्टाइलिश क्राइम-थ्रिलर की पहचान बनाने वाले फिल्मकार संजय गुप्ता अब हमारे बीच नहीं रहे। ‘कांटे’, ‘जिंदा’, ‘शूटआउट एट वडाला’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों के निर्देशक का 30 अक्टूबर 2026 की देर रात मुंबई के वर्सोवा स्थित घर में गिरने से सिर में गंभीर चोट लगने के बाद निधन हो गया। समाचार एजेंसी PTI, Variety और हिंदुस्तान टाइम्स ने उनकी उम्र 59 साल बताई है, जबकि द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में उम्र 57 साल लिखी गई है।

कैसे हुआ हादसा: पुलिस ने क्या बताया

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि घर के CCTV फुटेज में दिखता है कि रात करीब 2 बजे संजय गुप्ता ड्रॉइंग रूम से किचन की तरफ गए और वहां संतुलन बिगड़ने से दीवार से टकराकर गिर पड़े। उस समय परिवार के लोग सो रहे थे। सुबह जब पत्नी और बच्चों ने उन्हें जमीन पर पड़ा देखा तो तुरंत पास के अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

वर्सोवा पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। डीसीपी पुरुषोत्तम कराड के हवाले से Variety और टाइम्स नाउ ने बताया कि परिवार ने किसी तरह का शक नहीं जताया है और न ही कोई शिकायत दी है। पोस्टमार्टम और आगे की औपचारिक जांच जारी है।

उनके करीबी दोस्त और फिल्मकार मिलाप जावेरी, जिन्होंने ‘कांटे’ के संवाद लिखे थे, ने PTI से मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि वे गिर गए थे और उनके सिर में चोट लगी थी। जावेरी संजय गुप्ता को अपना गुरु मानते हैं।

‘आतिश’ से ‘काबिल’ तक: करीब तीन दशक का सफर

संजय गुप्ता ने 1994 में संजय दत्त, रवीना टंडन और करिश्मा कपूर की फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ से निर्देशन की शुरुआत की थी। इसके बाद ‘राम शस्त्र’ और ‘जंग’ जैसी एक्शन फिल्में आईं। लेकिन उन्हें असली पहचान 2002 में आई ‘कांटे’ से मिली।

‘कांटे’ में अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, महेश मांजरेकर, लकी अली और कुमार गौरव जैसे सितारे एक साथ थे। लॉस एंजेलिस में फिल्माई गई यह बैंक डकैती की कहानी उस दौर में अपने लुक, कैमरा वर्क और स्लो-मोशन स्टाइल के कारण अलग दिखी। द हिंदू के मुताबिक, यह फिल्म क्वेंटिन टैरेंटिनो की ‘रिजर्वायर डॉग्स’ से काफी प्रेरित थी। Variety ने लिखा है कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के समय फिल्म की शूटिंग अमेरिका में चल रही थी, जिससे लोकेशन शेड्यूल बदलना पड़ा था।

इसके बाद ‘मुसाफिर’ (2004) और संजय दत्त-जॉन अब्राहम की ‘जिंदा’ (2006) आई। निर्माता के तौर पर वे ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ (2007) से जुड़े रहे और फिर 2013 में मुंबई अंडरवर्ल्ड के इतिहास पर आधारित ‘शूटआउट एट वडाला’ का निर्देशन किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2017 में आई ऋतिक रोशन और यामी गौतम की ‘काबिल’ बॉक्स ऑफिस पर उनकी सबसे सफल फिल्म रही।

संजय दत्त के साथ लंबा रिश्ता

संजय गुप्ता के करियर की एक बड़ी खासियत संजय दत्त के साथ उनकी जोड़ी रही। ‘आतिश’ से शुरू होकर ‘जंग’, ‘कांटे’, ‘जिंदा’ और ‘मुसाफिर’ तक कई फिल्मों में दोनों साथ दिखे। 90 के दशक के आखिर और 2000 के शुरुआती सालों में जब हिंदी सिनेमा में फैमिली ड्रामा का बोलबाला था, तब गुप्ता ने गैंगस्टर और हाईस्ट फिल्मों को एक नया, चमकदार अंदाज दिया। यही वजह है कि आज भी ‘कांटे’ को कई दर्शक कल्ट फिल्म मानते हैं।

बॉलीवुड में शोक की लहर

निधन की खबर आते ही फिल्म जगत में शोक छा गया। इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिनेता रोनित रॉय और रोहित रॉय श्रद्धांजलि के दौरान भावुक दिखे। कई निर्देशकों और कलाकारों ने सोशल मीडिया पर उन्हें याद किया। परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं।

घर में गिरने के हादसे: एक जरूरी सबक

यह घटना एक आम लेकिन अक्सर नजरअंदाज किए जाने वाले खतरे की तरफ भी ध्यान खींचती है। घर के अंदर, खासकर रात के समय किचन या बाथरूम में फिसलना या संतुलन बिगड़ना गंभीर चोट की वजह बन सकता है। डॉक्टर आम तौर पर सलाह देते हैं कि:

  • रात में चलने के रास्ते पर हल्की नाइट लाइट रखें, ताकि अंधेरे में ठोकर न लगे।
  • किचन और बाथरूम में एंटी-स्लिप मैट का इस्तेमाल करें और फर्श गीला न छोड़ें।
  • अचानक चक्कर, कमजोरी या ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो डॉक्टर से जांच कराएं।
  • सिर पर चोट लगने के बाद उल्टी, बेहोशी, तेज सिरदर्द या खून बहने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं; इसे हल्के में न लें।
  • बुजुर्ग या अकेले रहने वाले लोगों के लिए इमरजेंसी कॉल की सुविधा या परिवार से नियमित संपर्क मददगार हो सकता है।

आगे क्या

पुलिस की ADR जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही औपचारिक रूप से मौत के कारण की अंतिम पुष्टि होगी। फिलहाल पुलिस और परिवार दोनों इसे हादसा ही बता रहे हैं। फिल्म इंडस्ट्री के लिए संजय गुप्ता का जाना उस फिल्मकार का जाना है, जिसने हिंदी क्राइम-थ्रिलर को एक अलग विजुअल पहचान दी। उनकी फिल्में, खासकर ‘कांटे’ और ‘शूटआउट एट वडाला’, आने वाले समय में भी इस जॉनर की चर्चा में याद की जाती रहेंगी।

स्रोत: PTI, Variety, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स नाउ, द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स।

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