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7 नवम्बर 2026, शनि

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित बने वायुसेना के 29वें प्रमुख, ए.पी. सिंह रिटायर; 3,500+ घंटे उड़ान वाले टेस्ट पायलट के बारे में जानें

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित, भारतीय वायुसेना प्रमुख

भारतीय वायुसेना को नया मुखिया मिल गया है। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर 2026 को देश के 29वें चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत (ए.पी.) सिंह की जगह ली है, जो उसी दिन सेवानिवृत्त हो गए। रक्षा मंत्रालय (PIB) के मुताबिक ए.पी. सिंह ने 42 साल तक वायुसेना में सेवा दी।

कमान सौंपने का समारोह

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के रेस कोर्स एयर फोर्स स्टेशन पर विदा हो रहे वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने कमान अपने उत्तराधिकारी को सौंपी। सरकार ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि आशुतोष दीक्षित 31 अक्टूबर 2026 की दोपहर से एयर चीफ मार्शल के पद पर नियुक्त होंगे। इस पद से पहले वे वायुसेना के वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ थे।

कौन हैं एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित

PIB की जानकारी के मुताबिक, आशुतोष दीक्षित का जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं और 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए थे। करीब चार दशक के करियर में उन्होंने ऑपरेशंस, फ्लाइट टेस्टिंग, क्षमता विकास और जॉइंट स्टाफ जैसे कई अहम क्षेत्रों में काम किया है।

  • अनुभवी फाइटर पायलट: उनके पास 3,500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है। वे क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं।
  • विमान: मिराज-2000, मिग के कई वेरिएंट, जगुआर और कई ट्रांसपोर्ट विमान उड़ा चुके हैं। द हिंदू के अनुसार वे 20 से ज्यादा तरह के विमान उड़ा चुके हैं।
  • आधुनिकीकरण में भूमिका: PIB के अनुसार उन्होंने जगुआर और मिग-27 अपग्रेड प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने और स्वदेशी तेजस (LCA Mk-I) के IOC और FOC की प्रक्रिया पूरी कराने में अहम भूमिका निभाई।
  • कमांड अनुभव: मिराज-2000 स्क्वाड्रन, पश्चिमी सेक्टर में एक फॉरवर्ड बेस सपोर्ट यूनिट और एयर फोर्स स्टेशन बीदर की कमान संभाल चुके हैं।
  • बड़े पद: दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर, दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर, डिप्टी चीफ ऑफ द एयर स्टाफ, सेंट्रल एयर कमान के AOC-in-C और फिर चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (CISC) रहे।

PIB के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वे चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अधीन चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर थे। यानी तीनों सेनाओं के बीच तालमेल वाले ढांचे का उन्हें सीधा अनुभव है।

ए.पी. सिंह का कार्यकाल

विदा हुए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान स्वदेशी विमानों और तेजी से आधुनिकीकरण पर लगातार जोर दिया। उन्होंने इसी अक्टूबर में जोधपुर में तेजस में अपनी आखिरी सॉर्टी भी उड़ाई थी। उनकी सेवा अवधि को लेकर स्रोतों में मामूली अंतर है: PIB और DD News ने 42 साल, जबकि द हिंदू ने 43 साल की सेवा बताई है।

नए प्रमुख के सामने क्या चुनौतियां

हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि दीक्षित ने ऐसे समय कमान संभाली है जब वायुसेना आधुनिकीकरण की बड़ी मुहिम में है। जानकारों के मुताबिक नए प्रमुख के सामने कुछ प्रमुख मुद्दे होंगे:

  • स्क्वाड्रन की संख्या: पुराने विमानों के रिटायर होने से फाइटर स्क्वाड्रन की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है।
  • तेजस Mk-1A की डिलीवरी: स्वदेशी लड़ाकू विमानों की समय पर आपूर्ति वायुसेना की योजना के केंद्र में है।
  • थिएटर कमान और जॉइंटनेस: CISC रहने के कारण तीनों सेनाओं के एकीकृत ढांचे पर उनकी राय अहम मानी जाएगी।
  • एयर डिफेंस और ड्रोन: हाल के संघर्षों ने ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस की अहमियत बढ़ा दी है।

आम नागरिक के लिए इसका मतलब

वायुसेना प्रमुख का बदलना एक नियमित संवैधानिक-प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन इसका असर देश की हवाई सुरक्षा की प्राथमिकताओं, रक्षा खरीद और स्वदेशी उद्योग पर पड़ता है। एक टेस्ट पायलट और तेजस प्रोग्राम से जुड़े अधिकारी के प्रमुख बनने से ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। NDA या वायुसेना में करियर का सपना देखने वाले युवाओं के लिए भी उनका सफर, यानी फाइटर पायलट से टेस्ट पायलट और फिर प्रमुख तक, एक प्रेरक उदाहरण है।

आगे क्या

परंपरा के अनुसार नए प्रमुख आने वाले दिनों में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि, रक्षा मंत्री और अन्य सेना प्रमुखों से मुलाकात और अलग-अलग कमानों का दौरा कर सकते हैं। उनकी शुरुआती प्राथमिकताओं पर सबकी नजर रहेगी।

स्रोत: प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (रक्षा मंत्रालय), द हिंदू, DD News और हिंदुस्तान टाइम्स।

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