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6 नवम्बर 2026, शुक्र

जोशीमठ हेलीकॉप्टर हादसे में 6 की मौत के बाद बड़ा फैसला: चारधाम रूट पर को-पायलट अनिवार्य, 2 नवंबर से नए नियम

उत्तराखंड के चमोली जिले में पहाड़ की ढलान पर बसा जोशीमठ शहर

उत्तराखंड के जोशीमठ में 30 अक्टूबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर सुरक्षा के नियम सख्त कर दिए हैं। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को फैसला लिया कि चारधाम रूट पर चलने वाली हर चार्टर उड़ान में अब पायलट के साथ को-पायलट होना अनिवार्य होगा। The Hindu, Times of India, The Tribune और PTI की रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नियम 2 नवंबर से लागू होगा।

कैसे हुआ हादसा

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से PIB पर जारी बयान के अनुसार, M/S Transbharat Aviation Pvt Ltd का हेलीकॉप्टर (रजिस्ट्रेशन VT-HCX, टाइप AS350B3) 30 अक्टूबर 2026 को जोशीमठ के पास चाई गांव के जंगल वाले इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलीकॉप्टर ने दोपहर 1:14 बजे बद्रीनाथ हेलीपैड से उड़ान भरी थी और यह देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड जा रहा था। इसमें एक पायलट और पांच यात्री सवार थे।

Times of India और PTI के अनुसार हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ धाम से लौट रहा था और इसमें सवार सभी छह लोगों की जान चली गई। चमोली जिले के दुर्गम पहाड़ी इलाके से शव निकालने के लिए प्रशासन को लंबा अभियान चलाना पड़ा। Indian Express के मुताबिक सभी छह शव बरामद कर लिए गए हैं।

UCADA के नए नियम क्या हैं

यह फैसला देहरादून में UCADA और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। UCADA के CEO प्रतीक जैन ने मीडिया को बताया कि चारधाम यात्रा की सभी चार्टर सेवाएं अब “टू-पायलट क्रू” के साथ चलेंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक नए नियम ये हैं:

  • को-पायलट अनिवार्य: चारधाम रूट की हर चार्टर उड़ान में दो पायलट होंगे, यह व्यवस्था 2 नवंबर से लागू होगी।
  • हर उड़ान के बाद रिपोर्ट: पायलट को हर उड़ान के बाद मौसम और ऑपरेशन से जुड़ी अहम जानकारी की रिपोर्ट देनी होगी। प्रतीक जैन के अनुसार इसका मानक फॉर्मेट तैयार किया जा रहा है, ताकि अगली उड़ान का पायलट हालात समझकर तैयारी कर सके।
  • टेकऑफ-लैंडिंग से पहले मंजूरी: The Hindu के मुताबिक हर उड़ान के टेकऑफ और लैंडिंग के लिए UCADA के हेलीकॉप्टर ऑपरेशंस ऑफिसर (HOO) की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी।
  • 60 साल से ऊपर के पायलट: सूत्रों के हवाले से The Hindu ने लिखा है कि पहाड़ी इलाकों में उड़ान के लिए योग्य 60 साल से अधिक उम्र के पायलट को-पायलट की भूमिका निभा सकेंगे।

The Hindu ने सूत्रों के हवाले से यह भी बताया है कि टू-पायलट नियम केदारनाथ की हेलीकॉप्टर सेवाओं पर लागू नहीं होगा। इस पर आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है।

जांच कहां तक पहुंची

DGCA और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की टीमें शनिवार को जोशीमठ पहुंचीं और स्थानीय लोगों से बातचीत की। रविवार को ये टीमें UCADA अधिकारियों के साथ हादसे वाली जगह जाकर सबूत जुटाएंगी। हादसे की असली वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी। अभी तक किसी आधिकारिक बयान में मौसम या तकनीकी खराबी को कारण नहीं बताया गया है।

पृष्ठभूमि: पहाड़ों में हेलीकॉप्टर उड़ान क्यों जोखिम भरी

चारधाम यानी बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु हेलीकॉप्टर सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऊंचे पहाड़, संकरी घाटियां और अचानक बदलने वाला मौसम यहां उड़ान को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। AS350B3 जैसे सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर आमतौर पर एक पायलट के साथ उड़ते हैं, इसलिए को-पायलट की अनिवार्यता को सुरक्षा के लिहाज से बड़ा बदलाव माना जा रहा है। उत्तराखंड में पहले भी हेलीकॉप्टर हादसों के बाद नियम कड़े किए जाते रहे हैं।

आप पर क्या असर पड़ेगा

  • अगर आप चारधाम यात्रा के लिए चार्टर हेलीकॉप्टर बुक करने की सोच रहे हैं, तो ऑपरेटर से पूछें कि उड़ान में को-पायलट होगा या नहीं और ऑपरेटर UCADA/DGCA से मंजूरी प्राप्त है या नहीं।
  • दो पायलट और अतिरिक्त मंजूरी की प्रक्रिया के कारण कुछ उड़ानों का समय बदल सकता है या किराए पर असर पड़ सकता है। किराए में बदलाव की कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
  • खराब मौसम में उड़ान रद्द होने की स्थिति के लिए यात्रा योजना में एक-दो दिन का अतिरिक्त समय रखें।

आगे क्या

DGCA और AAIB की जांच से हादसे की वजह सामने आएगी। पायलट रिपोर्ट का मानक फॉर्मेट जारी होने और नए नियमों की आधिकारिक अधिसूचना पर भी नजर रहेगी। जांच के नतीजों के आधार पर आगे और सख्त सुरक्षा उपाय भी किए जा सकते हैं।

स्रोत: PIB (नागरिक उड्डयन मंत्रालय), The Hindu, Times of India, The Tribune, PTI, Indian Express।

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