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7 नवम्बर 2026, शनि

गोवा को मिलेगा पहला LPG टर्मिनल: मोरमुगाओ पोर्ट पर ₹5,000 करोड़ का प्रोजेक्ट, 30 दिन का गैस रिजर्व हमेशा रहेगा

गोवा का मोरमुगाओ पोर्ट

गोवा को जल्द ही अपना पहला LPG आयात और भंडारण टर्मिनल मिल सकता है। गोवा सरकार और दुबई स्थित ऊर्जा कारोबार समूह ANVI ने मोरमुगाओ पोर्ट पर करीब 5,000 करोड़ रुपये (लगभग 52.5 करोड़ डॉलर) के ‘गोवा LPG सिक्योरिटी टर्मिनल एंड स्टोरेज’ प्रोजेक्ट के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह MoU वाइब्रेंट गोवा ग्लोबल बिजनेस समिट 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत की मौजूदगी में साइन हुआ।

प्रोजेक्ट में क्या-क्या बनेगा

  • मोरमुगाओ पोर्ट पर LPG जहाजों के लिए अलग बर्थ।
  • पोर्ट के पास जमीन पर स्टोरेज टर्मिनल।
  • बर्थ और टर्मिनल को जोड़ने वाली जमीन के नीचे पाइपलाइन।
  • गैस उद्योग के लिए कौशल तैयार करने के लिए गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ LPG एंड LNG टेक्नोलॉजी।

निवेश दो चरणों में होगा। पहले चरण में करीब 65,000 टन का रेफ्रिजरेटेड स्टोरेज होगा, जो गोवा की 8-9 महीने की कुल खपत के बराबर है। पूरा बनने पर टर्मिनल हर साल करीब 30 लाख टन LPG संभाल सकेगा और इसकी कुल स्टोरेज क्षमता लगभग 2,58,000 घन मीटर होगी।

गोवा के लिए खास रिजर्व

कंपनी के बयान के मुताबिक, टर्मिनल में हर समय गोवा की कम से कम 30 दिन की मांग, यानी करीब 7,500 टन LPG, राज्य के लिए अलग रिजर्व रखी जाएगी। इसे सिर्फ राज्य सरकार के आदेश पर ही जारी किया जाएगा। घोषित आपात स्थिति में गोवा के उपभोक्ताओं को बाकी जगह भेजे जाने या निर्यात से पहले गैस मिलेगी।

अभी गोवा को LPG कहां से मिलती है?

ET EnergyWorld की रिपोर्ट के अनुसार, गोवा में सालाना करीब 80,000 से 1,00,000 टन LPG की खपत होती है और इसकी पूरी सप्लाई सड़क के रास्ते, मुख्य रूप से मंगलुरु से, आती है। सड़क पर निर्भरता का मतलब है कि हाईवे पर रुकावट, हड़ताल या खराब मौसम में सिलेंडर की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। टर्मिनल बनने के बाद योजना के तहत करीब आधी गैस तटीय टैंकरों (जहाजों) से भेजी जाएगी, जिससे सड़क पर टैंकरों का बोझ भी घटेगा।

देश के लिए क्यों अहम?

भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और आयात टर्मिनल कुछ ही जगहों पर केंद्रित हैं। मुंबई और मंगलुरु के बीच यह गहरे पानी वाला टर्मिनल पश्चिमी तट पर एक नया आयात द्वार बनेगा। कंपनी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को यहां राष्ट्रीय भंडार का हिस्सा रखने का विकल्प देना चाहती है और टर्मिनल की कुछ क्षमता को भारत के रणनीतिक LPG रिजर्व कार्यक्रम में शामिल कराने की कोशिश करेगी। द हिंदू बिजनेसलाइन के मुताबिक, ANVI अमेरिका के गल्फ कोस्ट से भारत तक सप्लाई कॉरिडोर विकसित कर रही है और कंपनी का दावा है कि इससे मध्य-पूर्व पर निर्भरता कुछ घट सकती है। शुरुआत में टर्मिनल गोवा, फिर उत्तर कर्नाटक और दक्षिण महाराष्ट्र को सेवा देगा।

ध्यान रखें: अभी यह सिर्फ MoU है

यह समझौता बाध्यकारी (बाइंडिंग) नहीं है। इसमें दोनों पक्षों का इरादा और सहयोग का ढांचा दर्ज है। अंतिम निवेश और समय-सीमा डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) से तय होगी। आगे की प्रक्रिया इस तरह होगी:

  • उद्योग विभाग, गोवा निवेश प्रोत्साहन बोर्ड, गोवा IDC, मोरमुगाओ पोर्ट अथॉरिटी और ANVI का संयुक्त कार्य समूह बनेगा।
  • पोर्ट के पास जमीन चुनी जाएगी, LPG के लिए बर्थ और पाइपलाइन का रूट तय होगा।
  • DPR, सुरक्षा अध्ययन और इंजीनियरिंग डिजाइन के बाद वैधानिक मंजूरियां और जन-सुनवाई होगी।
  • इसके बाद पहले चरण का निर्माण 30 से 36 महीने में पूरा होने की उम्मीद है।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

फिलहाल गैस सिलेंडर की कीमत या सप्लाई पर कोई तुरंत असर नहीं होगा, क्योंकि प्रोजेक्ट को जमीन और मंजूरियां मिलने में समय लगेगा। अगर यह तय योजना के मुताबिक बनता है, तो गोवा और आसपास के इलाकों में LPG सप्लाई ज्यादा भरोसेमंद होगी और संकट के समय कमी का खतरा घटेगा। ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट से करीब 2,450 रोजगार बनने का अनुमान है।

स्रोत: ANVI का आधिकारिक बयान (The Tribune), ET EnergyWorld, The Hindu BusinessLine, Moneycontrol।

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