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7 नवम्बर 2026, शनि

Bharat Rice: सेना के जवानों के लिए लॉन्च हुआ ‘भारत राइस’, FCI से 5 साल का समझौता; लद्दाख-नॉर्थईस्ट तक सीधी सप्लाई

चावल की अलग-अलग किस्मों के दाने — भारत राइस पहल की प्रतीकात्मक तस्वीर

सरहद पर तैनात जवान की थाली में क्या पहुंचता है, ये सवाल अब सीधे दिल्ली के फैसलों से जुड़ गया है। भारतीय सेना ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को जवानों के लिए Bharat Rice यानी ‘भारत राइस’ लॉन्च किया। इसी मौके पर सेना और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बीच पांच साल का समझौता (MoU) भी साइन हुआ। नई दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी मौजूद रहे।

Bharat Rice क्या है और जवानों को इससे क्या बदलेगा?

अब तक सेना के डिपो अपने आसपास के FCI गोदामों से चावल उठाते थे। नई व्यवस्था में चावल सीधे आर्मी सप्लाई डिपो तक पहुंचाया जाएगा, जिनमें लद्दाख और पूर्वोत्तर के दूर-दराज इलाकों के डिपो भी शामिल हैं।

डीडी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक इस चावल को रक्षा जरूरतों के तय मानकों (डिफेंस स्पेसिफिकेशन) के हिसाब से मिल किया जाएगा और वित्त वर्ष 2026–27 के दौरान इसकी सप्लाई NAFED के जरिए होगी। हर खेप क्वालिटी चेक से गुजरेगी। चावल में कंकड़ या मिलावट नहीं होनी चाहिए, और टूटे, खराब या बदरंग दाने कम से कम होने चाहिए।

सबसे व्यावहारिक बदलाव पैकिंग में है। चावल 10 किलो और 30 किलो के बैग में आएगा, ताकि फॉरवर्ड पोस्ट तक इसे ढोना और संभालना आसान रहे। पहाड़ी रास्तों पर राशन पीठ पर लादकर ले जाने वाले जवानों के लिए यह छोटी बात नहीं है।

18 महीने की तैयारी, जवानों के फीडबैक से शुरुआत

यह पहल सेना के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट की अगुवाई में आई है। बताया गया कि जवानों से लगातार मिल रहे फीडबैक के बाद सेना, FCI, NAFED और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच करीब 18 महीने तक तालमेल चला, तब जाकर यह ढांचा तैयार हुआ।

FCI के साथ MoU: गोदाम, मजदूर और मशीनें

समझौता सिर्फ चावल तक सीमित नहीं है। पांच साल का यह MoU, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है, सेना को ऑपरेशनल जरूरत के वक्त FCI के चिन्हित गोदाम, लेबर और माल ढुलाई के उपकरण इस्तेमाल करने का औपचारिक रास्ता देता है।

इससे अतिरिक्त भंडारण, तेजी से सामान जुटाने और राशन-स्टोर को ऑपरेशनल इलाकों के करीब पहले से रखने में मदद मिलेगी। तालमेल फॉर्मेशन स्तर पर सेना की सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट यूनिट्स और FCI के क्षेत्रीय व मंडल कार्यालयों के बीच होगा।

राजनाथ सिंह बोले: खेत से जवान की थाली तक भरोसा

राजनाथ सिंह ने इस पहल को किसान के खेत से सैनिक की थाली तक भरोसे का रिश्ता बताया और इसे ‘जय जवान, जय किसान’ का व्यावहारिक रूप कहा। उन्होंने कहा कि यह बेहतर क्वालिटी का चावल तय मानकों के हिसाब से मिलेगा और पैकिंग भी ऐसी होगी जिसे संभालना आसान हो।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य के संघर्षों में चेतावनी का समय बेहद कम हो सकता है। ऐसे में सप्लाई चेन इतनी मजबूत होनी चाहिए कि अचानक शुरू हुए और लंबे चलने वाले ऑपरेशन को भी संभाल सके। उनके शब्दों में, लॉजिस्टिक्स खुद एक तरह की ‘कॉम्बैट पावर’ है। उन्होंने MoU को महज कागजी व्यवस्था नहीं, बल्कि ऑपरेशनल तैयारी का ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ बताया।

प्रल्हाद जोशी ने कहा कि देश की रक्षा करने वालों तक अच्छा भोजन पहुंचाना उनके विभाग के लिए कर्तव्य और गर्व की बात है।

राशन में और क्या बदलाव?

सेना ने बताया कि राशन की क्वालिटी और मात्रा सुधारने के लिए कुछ और कदम भी उठाए गए हैं। इनमें अग्निवीर रंगरूटों के लिए अतिरिक्त राशन और तीनों सेनाओं के राशन स्केल में ज्यादा समानता शामिल है। ऑर्गेनिक राशन का प्रस्ताव भी रखा गया है।

कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा और FCI, NAFED व सहकारी क्षेत्र के अधिकारी मौजूद रहे।

FAQ: Bharat Rice से जुड़े सवाल

प्रश्न 1: Bharat Rice किसके लिए लॉन्च हुआ है?
उत्तर: यह भारतीय सेना के जवानों के राशन के लिए है। चावल सीधे आर्मी सप्लाई डिपो तक पहुंचेगा।

प्रश्न 2: चावल किस पैकिंग में मिलेगा?
उत्तर: 10 किलो और 30 किलो के बैग में, ताकि फॉरवर्ड पोस्ट तक ले जाना आसान हो।

प्रश्न 3: FCI के साथ MoU कितने साल का है?
उत्तर: पांच साल का, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 4: सप्लाई कौन करेगा?
उत्तर: वित्त वर्ष 2026–27 में चावल की सप्लाई NAFED के जरिए होगी।

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