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7 नवम्बर 2026, शनि

अनुपम खेर बोले—विरोध का हक सबको, पर PM और उनकी मां को गाली क्यों? CEC विरोधी प्रदर्शनों पर वीडियो

अभिनेता अनुपम खेर की फाइल फोटो—CEC विरोधी प्रदर्शनों पर उनके वीडियो की खबर

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों पर अब दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर खुलकर बोले हैं। अमेरिका-कनाडा दौरे से जारी एक वीडियो में उन्होंने कहा कि विरोध करना और प्रधानमंत्री की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन प्रधानमंत्री, उनकी मां और पुलिसकर्मियों को गाली देना किसी भी तरह सही नहीं। Hindustan Times और India Today दोनों ने उनके इस वीडियो और इंस्टाग्राम पोस्ट को विस्तार से रिपोर्ट किया है।

अनुपम खेर इन दिनों अपने नाटक जाने पहचाने अनजाने के साथ अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं। India Today के मुताबिक यह करीब 18 शहरों का दौरा है, जो अब आखिरी चरण में है।

“विरोध का हक सबको, गाली का नहीं”

वीडियो की शुरुआत में ही खेर ने साफ किया कि वे प्रदर्शन के अधिकार पर सवाल नहीं उठा रहे। उन्होंने कहा, “हम सबको विरोध का अधिकार है। सरकार से सवाल पूछे जाने चाहिए, प्रधानमंत्री की आलोचना हो, उनके फैसलों से असहमति हो—लोकतंत्र में यह सब होना चाहिए।”

लेकिन इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री को गाली देना, उनकी मां के लिए अपशब्द कहना, पुलिसकर्मियों—खासकर महिला पुलिस अधिकारियों—से बदसलूकी करना सही है? उनके शब्दों में, “आपका विरोध कितना भी तीखा हो, क्या अपनी बात कहने के लिए गाली देना जरूरी है?”

खेर ने खुद को भारत का “अनौपचारिक सांस्कृतिक दूत” बताया और कहा कि विदेश में प्रदर्शनों के वीडियो देखकर उन्हें दुख और गुस्सा दोनों हुआ।

चुनाव आयोग पर आरोपों के लिए सबूत की बात

CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर लग रहे आरोपों को लेकर खेर ने कहा कि अगर किसी को चुनाव में गड़बड़ी का शक है तो वह सबूत रखे, जवाब मांगे और कानूनी व संवैधानिक रास्ते अपनाए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग सरकार बदलना चाहते हैं, वे जनता का भरोसा जीतें और चुनाव में हराएं—यही लोकतंत्र की असली ताकत है।

अपनी राजनीतिक राय भी उन्होंने छिपाई नहीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा करके वोट दिया था और पिछले 12 साल का काम देखकर वह भरोसा आज भी कायम है।

“चायवाला” कहने पर आपत्ति

खेर ने प्रधानमंत्री को “चायवाला” कहकर नीचा दिखाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मेहनत से रोजी कमाना सम्मान की बात है। अपनी मिसाल देते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें हमेशा इस बात पर गर्व रहा कि वे वन विभाग के एक क्लर्क के बेटे हैं।

“भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता”

खेर को अंदाजा है कि इस वीडियो के बाद उन्हें “अंधभक्त” या “दलाल” कहा जाएगा। उन्होंने संघर्ष के दिनों को याद किया, जब काम की तलाश में वे कुछ दिन रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोए थे। तब उनके दादा ने कहा था—”बेटा, याद रखना, भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कुछ कलाकार, साथी और इन्फ्लुएंसर खुलकर प्रदर्शन के समर्थन में खड़े हो सकते हैं, तो अलग राय रखने वाले भी बोल सकते हैं। एक ही पेशे में होने का मतलब एक जैसी राजनीतिक सोच नहीं है। उनकी अपील थी—”शांति से बोलिए, पूरे भरोसे से बोलिए। विनम्र होने का मतलब चुप रहना नहीं है।”

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

  • बहस का नया मोड़: खेर ने खुद माना कि कुछ कलाकार और इन्फ्लुएंसर प्रदर्शन के साथ खड़े हैं। उनका बयान दिखाता है कि फिल्म इंडस्ट्री में भी इस मुद्दे पर राय बंटी हुई है।
  • सोशल मीडिया पर: ऐसे वीडियो पर दोनों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आती हैं। कोई भी क्लिप शेयर करने से पहले पूरा वीडियो और संदर्भ जरूर देखें—आधी क्लिप अक्सर गलतफहमी फैलाती है।
  • असल मुद्दा: SIR और चुनाव आयोग से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में हैं। आरोपों की सच्चाई आखिरकार अदालत और जांच से ही तय होगी, बयानबाजी से नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

अनुपम खेर ने प्रदर्शनों पर क्या कहा?

उन्होंने कहा कि विरोध और प्रधानमंत्री की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन PM, उनकी मां और पुलिसकर्मियों को गाली देना गलत है।

अनुपम खेर अभी कहां हैं?

वे अपने नाटक “जाने पहचाने अनजाने” के साथ अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं; वीडियो वहीं से जारी किया गया।

चुनाव आयोग पर आरोपों को लेकर उन्होंने क्या सलाह दी?

सबूत पेश करें, कानूनी और संवैधानिक रास्ते अपनाएं, और सरकार बदलनी है तो चुनाव जीतें।

“चायवाला” वाले शब्द पर उनकी आपत्ति क्या है?

उन्होंने कहा कि मेहनत से रोजी कमाना सम्मान की बात है, इसे अपमान की तरह इस्तेमाल करना गलत है।

स्रोत: Hindustan Times, India Today — 15 अक्टूबर 2026।

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