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7 नवम्बर 2026, शनि

सेना को मिले 450 स्वदेशी कामिकाज़े ड्रोन: नागास्त्र-1R की अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त खेप, 2 मीटर तक सटीक वार

नागपुर में सोलर डिफेंस की प्रदर्शनी में रखे नागास्त्र लोइटरिंग ड्रोन—सेना को मिले 450 नागास्त्र-1R से जुड़ी तस्वीर

भारतीय सेना की मारक क्षमता को एक बड़ा स्वदेशी सहारा मिला है। नागपुर की कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने सेना को 450 नागास्त्र-1R लोइटरिंग म्यूनिशन की डिलीवरी पूरी कर दी है। आम बोलचाल में इन्हें ‘कामिकाज़े’ या आत्मघाती ड्रोन कहा जाता है। कंपनी के मुताबिक यह किसी एक निर्माता की ओर से सेना को एक ही खेप में दी गई अब तक की सबसे बड़ी लोइटरिंग म्यूनिशन सप्लाई है।

नागास्त्र-1R आखिर है क्या?

लोइटरिंग म्यूनिशन ऐसा हथियार है जो उड़कर लक्ष्य वाले इलाके के ऊपर कुछ देर मंडराता रहता है, ऑपरेटर कैमरे से निशाना पहचानता है और फिर ड्रोन सीधे टारगेट पर गोता लगाकर वार करता है। यानी यह ड्रोन और गाइडेड बम का मिला-जुला रूप है।

नागास्त्र-1R को सेना की कम दूरी की ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि अगर लक्ष्य न मिले या मिशन बीच में रोकना पड़े, तो हमला रद्द करके ड्रोन को वापस बुलाया और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

मुख्य खूबियाँ (कंपनी के दावे के अनुसार)

  • सटीकता: करीब 2 मीटर का सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP)—मतलब ज़्यादातर वार निशाने के 2 मीटर के दायरे में।
  • स्वदेशी हिस्सा: 80 प्रतिशत से ज़्यादा।
  • कैमरा: 360 डिग्री घूमने वाला गिम्बल कैमरा, रात के ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरे का विकल्प।
  • लॉन्चर: दोबारा इस्तेमाल होने वाला लॉन्चर सिस्टम, जिससे लागत कम रहती है।

ऑर्डर कैसे मिला

सेना ने यह ऑर्डर इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (आपातकालीन खरीद) के रास्ते दिया था। कंपनी के बयान के मुताबिक तकनीकी ट्रायल में चार कंपनियाँ शामिल हुई थीं, लेकिन सभी ऑपरेशनल पैमानों पर खरी उतरने वाली अकेली कंपनी SDAL रही। यह ऑर्डर ऑपरेशन सिंदूर के बाद दिया गया था, जब सेनाओं ने ड्रोन और काउंटर-ड्रोन क्षमता तेजी से बढ़ाने पर ज़ोर दिया।

SDAL, सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया की सहायक कंपनी है। मार्च 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर में कंपनी की लोइटरिंग म्यूनिशन टेस्टिंग रेंज और UAV रनवे सुविधा का उद्घाटन किया था, जहाँ नागास्त्र सीरीज़ के ड्रोन प्रदर्शित किए गए थे।

सेना के लिए यह क्यों अहम है

पिछले कुछ सालों में यूक्रेन-रूस से लेकर पश्चिम एशिया तक के संघर्षों ने दिखाया है कि सस्ते और सटीक ड्रोन युद्ध का तरीका बदल रहे हैं। पहले भारत ऐसे सिस्टम विदेशी कंपनियों से काफी ऊँची कीमत पर खरीदता था। अब घरेलू कंपनी से बड़ी खेप मिलने का मतलब है—आयात पर निर्भरता घटेगी, ज़रूरत पड़ने पर सप्लाई जल्दी मिलेगी और स्पेयर-पार्ट्स व अपग्रेड के लिए विदेश का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा।

आप पर क्या असर पड़ेगा

  • देश की सुरक्षा: सीमा पर दुश्मन के ठिकानों, बंकरों या हथियारों पर कम जोखिम में सटीक वार की क्षमता बढ़ती है। जवानों को सीधे खतरे में डाले बिना कार्रवाई संभव होती है।
  • रोज़गार और उद्योग: स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ने से MSME सप्लायर्स, इंजीनियरिंग और टेक नौकरियों को फायदा मिलता है। डिफेंस सेक्टर में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी तेजी से उभरता क्षेत्र है।
  • निवेशकों के लिए: रक्षा कंपनियों के शेयरों में ऐसी खबरों पर हलचल दिखती है, लेकिन किसी एक ऑर्डर के आधार पर निवेश का फैसला न करें। यह निवेश सलाह नहीं है।

आगे क्या

रिपोर्ट्स के मुताबिक SDAL भारी वॉरहेड वाले नागास्त्र-2 और नागास्त्र-3 पर काम कर रही है। कंपनी ने कहा है कि वह सेना के साथ लंबे समय की साझेदारी और अपने सिस्टम की बड़ी तैनाती पर ध्यान दे रही है। आने वाले महीनों में सेना की ड्रोन, काउंटर-ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़ी खरीद पर नज़र रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सेना को कितने नागास्त्र-1R ड्रोन मिले?

सेना को एक ही खेप में 450 नागास्त्र-1R लोइटरिंग म्यूनिशन मिले हैं, जिसे कंपनी अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त सप्लाई बता रही है।

नागास्त्र-1R किसने बनाया है?

इसे नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने बनाया है, जो सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया की सहायक कंपनी है।

क्या यह ड्रोन दोबारा इस्तेमाल हो सकता है?

हाँ, अगर हमला न करना पड़े तो मिशन रद्द करके ड्रोन को वापस लाया जा सकता है। इसका लॉन्चर भी बार-बार इस्तेमाल होने वाला है।

नागास्त्र-1R कितना सटीक है?

कंपनी के मुताबिक इसका CEP करीब 2 मीटर है और इसमें 80 प्रतिशत से ज़्यादा स्वदेशी सामग्री है।

स्रोत: The Economic Times, The Week, New Indian Express, India TV, The Hindu BusinessLine (13 अक्टूबर 2026 व पूर्व रिपोर्ट्स)।

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