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6 नवम्बर 2026, शुक्र

NTA सुधार: संसदीय पैनल की रिपोर्ट में Equity Audit, मुआवजा और CBT सिफारिश

पुस्तकालय में पढ़ाई करते छात्र—परीक्षा और शिक्षा से जुड़ा प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली: संसदीय स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधारों की सिफारिश करते हुए 382वीं रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की है। कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल संबंधी समिति ने भरोसा बहाल करने के लिए कई ठोस कदम सुझाए हैं।

रिपोर्ट का संदर्भ NEET-UG 2026 की रद्दी से जुड़ा है। 3 मई की परीक्षा के बाद अटकलों वाले गेस पेपर में करीब 120 सवाल मिलने के आरोप लगे, जिसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द हुई और 21 जून को दोबारा परीक्षा हुई। समिति ने NTA और शिक्षा मंत्रालय से मई-जुलाई में बैठकें भी कीं।

वार्षिक Equity Audit और पारदर्शिता

समिति ने कहा कि NTA राज्यों से पंजीकरण के आंकड़े रखता है, लेकिन सफलता दर नहीं। रिपोर्ट में लिखा गया—‘Participation data और success data बहुत अलग चीजें हैं।’ समिति ने हर प्रमुख परीक्षा के लिए वार्षिक Equity Audit की सिफारिश की है। इसमें राज्य, लिंग, स्कूल बोर्ड (सरकारी, सहायता प्राप्त, प्राइवेट), शिक्षा का माध्यम और सामाजिक वर्ग (OBC, SC, ST, EWS, सामान्य) के आधार पर भागीदारी, पास और कटऑफ उपलब्धि दरें देखी जाएं।

ऑडिट के नतीजे NTA की वार्षिक रिपोर्ट में छापकर शिक्षा मंत्रालय को नीतिगत विचार के लिए भेजने को कहा गया। समिति ने UPSC जैसी रिजल्ट पारदर्शिता अपनाने की भी बात कही, ताकि असामान्य पैटर्न पकड़े जा सकें।

मुआवजा, शिकायत निवारण और कोचिंग नियम

प्रशासनिक वजहों से परीक्षा रद्द होने पर उम्मीदवारों को वित्तीय मुआवजे समेत ‘duty of care’ स्पष्ट करने की सिफारिश की गई। शिकायतों के तय समयसीमा में निपटारे और स्वतंत्र जांच तंत्र की भी मांग है।

कोचिंग उद्योग पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है—फीस पारदर्शिता, सुरक्षा मानक और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस। समिति के अनुसार कोचिंग ने कई बार स्कूल पाठ्यक्रम से ज्यादा ‘पैरेलल करिकुलम’ बना दिया है। परीक्षाएं NCERT या राज्य बोर्ड सिलेबस पर अवधारणात्मक समझ जांचें, कोचिंग की ट्रिक नहीं।

CBT, CAT और साइबर सुरक्षा

डिजिटल इंफ्रा तैयार होने पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) और Computer Adaptive Testing (CAT) मॉडल की ओर चरणबद्ध बदलाव सुझाया गया। इससे एक जैसा पेपर लीक होने और एक केंद्र पर एक जैसे सवाल मिलने का जोखिम घटेगा। साथ ही समर्पित इन-हाउस साइबर सुरक्षा टीम बनाने को कहा गया—रिमोट एक्सेस, स्क्रीन रिकॉर्डिंग और वर्चुअल मशीन रोकने वाले सॉफ्टवेयर के साथ।

NEET जैसे बड़े एग्जाम में अचानक पूरा CBT ग्रामीण और सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर हाइब्रिड मॉडल (एन्क्रिप्टेड सवाल केंद्र पर प्रिंट) पर विचार की बात कही गई। 2026 में NEET के 22 लाख से अधिक पंजीकरण का जिक्र रिपोर्ट में है।

NEET प्रयास सीमा, रिसर्च विंग और कोर्ट केस

समिति ने स्वास्थ्य मंत्रालय और हितधारकों से सलाह लेकर NEET-UG जैसी परीक्षाओं में उम्र और प्रयास सीमा की व्यवहार्यता जांचने की सिफारिश की। फिलहाल NEET-UG में प्रभावी ऊपरी उम्र सीमा और प्रयासों की सीमा नहीं है। UGC-NET के लिए अपवाद का जिक्र है।

NTA को सिर्फ परीक्षा आयोजक नहीं, परीक्षा नीति का थिंक-टैंक बनाने और शिक्षा शोध विशेषज्ञों वाला रिसर्च विंग खोलने को कहा गया। रिपोर्ट में उल्लेख है कि अदालतों में NTA से जुड़े 474 मामले दर्ज हैं—जिनमें 69 सुप्रीम कोर्ट में। इनमें से 356 मामले अकेले NEET-UG 2024 से जुड़े बताए गए।

समिति ने 2024 के बाद लाए गए बायोमेट्रिक, जैमर और AI-CCTV जैसे कदमों का स्वागत किया, लेकिन 2026 की रद्दी को और सुधार की जरूरत का संकेत माना। अब गेंद शिक्षा मंत्रालय और NTA के पाले में है—सिफारिशों को नीति में बदलना बाकी है।

FAQ

संसदीय पैनल की NTA रिपोर्ट में मुख्य सिफारिशें क्या हैं?

वार्षिक Equity Audit, रद्द परीक्षाओं पर मुआवजा, कोचिंग नियम, CBT/CAT की ओर चरणबद्ध बदलाव, साइबर सुरक्षा टीम, रिसर्च विंग और UPSC जैसी रिजल्ट पारदर्शिता प्रमुख हैं।

NEET-UG 2026 क्यों रद्द हुई थी?

3 मई की परीक्षा के बाद गेस पेपर में करीब 120 सवाल मिलने के आरोप लगे। 12 मई को परीक्षा रद्द हुई और 21 जून को दोबारा हुई।

क्या NEET में प्रयास सीमा लग सकती है?

पैनल ने स्वास्थ्य मंत्रालय और हितधारकों से सलाह लेकर उम्र व प्रयास सीमा की व्यवहार्यता जांचने की सिफारिश की है। फैसला अभी नहीं हुआ।

NTA से जुड़े कितने कोर्ट केस हैं?

रिपोर्ट के अनुसार 474 मामले दर्ज हैं, जिनमें 69 सुप्रीम कोर्ट में हैं।

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