दिसानायके का कच्चातीवु बयान
श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने रविवार 11 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत ने अपने सुप्रीम कोर्ट के सामने स्वीकार किया है कि कच्चातीवु द्वीप श्रीलंका का है। The Hindu और FrontPage.lk की रिपोर्टों के अनुसार वे उत्तर-पश्चिमी प्रांत में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। यह सभा उनकी सरकार के करीब दो साल पूरे होने के संदर्भ में हुई; वे NPP गठबंधन के नेता हैं।
उन्होंने दोहराया कि श्रीलंका कभी भी अपने हवाई क्षेत्र, जमीन या समुद्र को पड़ोसी भारत के लिए खतरे के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देगा। बयान कूटनीतिक संदेश और घरेलू राजनीति दोनों को छूता है।
भारतीय अटॉर्नी जनरल का पिछला बयान
बीते सप्ताह भारतीय अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि भारत के श्रीलंका के साथ उत्कृष्ट संबंध हैं और वह 1974 तथा 1976 के कच्चातीवु समझौतों को फिर से खोलने का इरादा नहीं रखता। दिसानायके के रविवारीय भाषण में इसी संदर्भ को रेखांकित किया गया।
श्रीलंकाई मत्स्य मंत्री रामलिंगम चंद्रसेकर ने भी पहले AG के इन मंतव्यों का स्वागत किया था। दोनों देशों के आधिकारिक स्वर फिलहाल समझौतों की स्थिरता की ओर झुके दिखते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में क्या चल रहा है
मामला न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की बेंच के सामने है। अगली सुनवाई फरवरी 2027 के लिए सूचीबद्ध है। अदालत ने कहा है कि केंद्र और तमिलनाडु सरकार मछुआरों को संवेदनशील बनाएं ताकि वे श्रीलंकाई जलक्षेत्र में प्रवेश न करें।
कच्चातीवु पाल्क जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) के श्रीलंकाई हिस्से के पास स्थित है। द्वीप छोटा है, लेकिन मछली पकड़ने के अधिकार, गिरफ्तारियां और द्विपक्षीय संबंधों में इसकी चर्चा बड़ी रहती है।
मछुआरे और बॉटम-ट्रॉलिंग का विवाद
तमिलनाडु के मछुआरों की श्रीलंकाई नौसेना द्वारा गिरफ्तारी लंबे समय से तनाव का कारण रही है। बॉटम-ट्रॉलिंग को लेकर भी आपत्तियां उठती रही हैं—यह तरीका समुद्री तल और स्थानीय मत्स्य संसाधनों को नुकसान पहुंचा सकता है, ऐसा आरोप श्रीलंकाई पक्ष लगाता रहा है। भारतीय मछुआरे आजीविका और पारंपरिक मछली पकड़ने के क्षेत्रों की बात करते हैं।
अदालत का संदेश साफ है—सीमा का सम्मान और जागरूकता। केंद्र व राज्य दोनों को मछुआरों तक यह बात पहुंचानी है कि IMBL पार करना जोखिम भरा और कानूनी रूप से संवेदनशील है।
1974 और 1976 के समझौते क्यों महत्वपूर्ण
1974 और 1976 के समझौतों के जरिए कच्चातीवु से जुड़े समुद्री अधिकार और सीमा रेखा तय हुई मानी जाती है। भारतीय AG का रुख इन समझौतों को फिर न खोलने का है। दिसानायके ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में दिए गए रुख को श्रीलंका की संप्रभुता की पुष्टि के रूप में पेश किया।
यह मुद्दा दक्षिण भारत की राजनीति में भी समय-समय पर उठता है। तमिलनाडु में मछुआरों की सुरक्षा और द्वीप की स्थिति दोनों भावनात्मक विषय हैं। कोर्ट की प्रक्रिया फरवरी 2027 तक आगे बढ़ेगी; तब तक कूटनीतिक और प्रशासनिक संदेश ही मुख्य रहेंगे।
पड़ोसी संबंधों का संदेश
दिसानायके ने स्पष्ट कहा कि श्रीलंका अपने क्षेत्र को भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा। यह बयान क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी विश्वास दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। NPP सरकार के दो साल पूरे होने पर दी गई इस सभा में घरेलू उपलब्धियों के साथ विदेश नीति का भी जिक्र स्वाभाविक था।
भारत-श्रीलंका संबंध व्यापार, ऊर्जा, मत्स्य और सांस्कृतिक रिश्तों पर टिके हैं। कच्चातीवु जैसे संवेदनशील विषय पर आधिकारिक स्वर मिलते-जुलते रहें तो तनाव कम रखने में मदद मिलती है। मछुआरों की praktikal समस्या—गिरफ्तारी, नाव जब्ती, रिहाई—फिर भी जमीनी स्तर पर सुलझानी होगी।
आगे क्या देखें
- फरवरी 2027 में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई
- केंद्र और तमिलनाडु द्वारा मछुआरों को जागरूक करने के कदम
- दोनों देशों के बीच मत्स्य और सीमा समन्वय तंत्र
- बॉटम-ट्रॉलिंग और IMBL उल्लंघन से जुड़े स्थानीय विवाद
TrendFlash इस घटनाक्रम को The Hindu और FrontPage.lk में दर्ज तथ्यों के आधार पर पेश कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिसानायके ने कच्चातीवु पर क्या कहा?
11 अक्टूबर 2026 को उत्तर-पश्चिमी प्रांत की जनसभा में उन्होंने कहा कि भारत ने अपने सुप्रीम कोर्ट के सामने स्वीकार किया है कि कच्चातीवु श्रीलंका का है। उन्होंने दोहराया कि श्रीलंका अपना क्षेत्र भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा।
भारतीय AG का रुख क्या है?
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि भारत-श्रीलंका संबंध उत्कृष्ट हैं और भारत 1974 व 1976 के कच्चातीवु समझौतों को फिर खोलने का इरादा नहीं रखता।
अगली सुनवाई कब है?
मामला न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा के समक्ष है। अगली लिस्टिंग फरवरी 2027 की है। अदालत ने केंद्र और तमिलनाडु से मछुआरों को संवेदनशील बनाने को कहा है।
विवाद की जड़ क्या है?
कच्चातीवु IMBL के श्रीलंकाई हिस्से के पास है। तमिलनाडु मछुआरों की गिरफ्तारी और बॉटम-ट्रॉलिंग जैसे मुद्दे लंबे समय से तनाव का कारण रहे हैं।

