Breaking
6 नवम्बर 2026, शुक्र

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली प्रदर्शन: SIR-CEC मामले 15 अक्टूबर तक स्थगित, सरकार को जवाब का समय

न्याय और अदालत का प्रतीकात्मक चित्र—कानूनी सुनवाई संदर्भ

दिल्ली में CEC और वोटर सूची संशोधन (SIR) को लेकर जारी प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 15 अक्टूबर तक टाल दी। LiveLaw के अनुसार पीठ में CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना थे। जस्टिस मोहना की तबीयत ठीक नहीं होने पर पक्षकारों ने 15 अक्टूबर पर आपत्ति नहीं जताई।

The Hindu की रिपोर्ट कहती है कि केंद्र सरकार ने अवैध हिरासत और लॉकडाउन जैसे आरोपों पर जवाबी हलफनामा “तैयार” बताया, लेकिन उसमें और फाइन-ट्यूनिंग बाकी है। अदालत ने जवाब दाखिल करने की समय-सीमा 15 अक्टूबर तक बढ़ा दी।

अदालत ने और क्या कहा?

महिला पत्रकारों की याचिका—प्रदर्शन कवरेज के दौरान पुलिस द्वारा हमले के आरोप—पर अदालत ने वरिष्ठ दिल्ली पुलिस अधिकारी की मौजूदगी मांगी। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की नई याचिका पर भी नोटिस जारी हुआ, जिसमें CEC और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 16 (आधिकारिक कर्तव्य में किए गए काम पर इम्यूनिटी) को चुनौती दी गई है।

पहले के आदेश याद रखें

11 अक्टूबर की विशेष बैठक में अदालत ने कहा था कि शांतिपूर्ण, निहत्थे जमाव पर कानून की प्रक्रिया के बिना हिरासत न हो—खासकर जहां धारा 163 BNSS लागू नहीं। मेट्रो/रेल सामान्य रहें जब तक लोक व्यवस्था का आधार न हो; शहर में आवाजाही ट्रैफिक नियमों के अधीन मुक्त रहे; वकील-पत्रकार के पेशेवर काम में बाधा न आए; बैरिकेडिंग की समीक्षा हो; इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों।

9 अक्टूबर को ही अदालत ने मेट्रो/ट्रेन की पूर्ण बंदी को लेकर सख्ती दिखाई थी। अवमानना याचिकाओं में आरोप हैं कि निर्देशों के बावजूद स्टेशन बंद और हिरासतें हुईं। विपक्षी नेता 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर कूच कर SIR याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया से जुड़े—यह अलग राजनीतिक घटनाक्रम है, अदालती स्थगन का कारण जस्टिस की अनुपस्थिति बताया गया।

आम नागरिक के लिए मतलब

अदालत प्रक्रिया चल रही है। 15 अक्टूबर को सरकार का जवाब, पुलिस जवाबदेही और पत्रकार सुरक्षा के कोण एक साथ खुल सकते हैं। सड़क पर प्रदर्शन और कोर्ट में याचिका—दोनों ट्रैक अलग हैं।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

दिल्लीवासी: मेट्रो/सड़क पाबंदियां अदालती निर्देशों के दायरे में ही होनी चाहिए। बेवजह अफवाह से रूट न बदलें—आधिकारिक पुलिस/DMRC अपडेट देखें।

पत्रकार/वकील: पेशेवर ड्यूटी पर बाधा न डालने के आदेश पहले आ चुके हैं; उल्लंघन की शिकायत कोर्ट ट्रैक पर है।

आगे क्या देखें:

  • 15 अक्टूबर की सुनवाई और सरकार का हलफनामा
  • महिला पत्रकार याचिका पर पुलिस जवाब
  • ADR की धारा 16 चुनौती की अगली तारीख

सीधी बात: आज का बड़ा अपडेट स्थगन और जवाब की समय-सीमा है—फैसला अभी नहीं आया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सुनवाई क्यों टली?

जस्टिस वी. मोहना अस्वस्थ थे; पक्षकारों ने 15 अक्टूबर पर सहमति दी।

सरकार का जवाब कब तक आएगा?

अदालत ने अवैध हिरासत/क्लैंपडाउन आरोपों पर जवाबी हलफनामा 15 अक्टूबर तक दाखिल करने का समय बढ़ाया।

पहले अदालत ने क्या निर्देश दिए थे?

कानूनन प्रक्रिया के बिना हिरासत न हो, मेट्रो/रेल/इंटरनेट अनावश्यक रूप से न रुकें, पत्रकार-वकील के काम में बाधा न आए।

ADR याचिका किस पर है?

CEC/चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 16 की इम्यूनिटी व्यवस्था को चुनौती।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *