फार्महाउस वाला ‘मेडिकल कॉलेज’
उत्तर प्रदेश के एटा जिले के महमूदपुर नगरिया गांव में एक फार्महाउस से फर्जी मेडिकल कॉलेज चलने की खबर पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर संज्ञान लिया। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और सभी नियामक प्राधिकरणों को पब्लिक एडवाइजरी जारी करने का निर्देश दिया—किसी संस्थान में दाखिला लेने या उससे लेन-देन करने से पहले प्रामाणिकता की जांच जरूर करें।
LiveLaw, Hindustan Times और अदालती आदेश सारांश के अनुसार संस्थान मैदान के बीच दो-तीन कमरों की जर्जर इमारत से चलता दिखता था। D.Pharma, B.Pharma, B.Sc. Nursing, DMLT, BMLT, BAMS, GNM, ANM जैसे कोर्स का दावा किया गया था।
चेयरमैन थे अनपढ़ चाय विक्रेता?
अदालत ने दर्ज किया कि संस्थान के चेयरमैन के रूप में भगवान दास सिंह बघेल का नाम दिखाया गया—रिपोर्टों में उन्हें अनपढ़ चाय विक्रेता बताया गया। पूछताछ पर उन्होंने अनजान होने का दावा किया, लेकिन स्वीकार किया कि सतेंद्र कुमार द्वारा दिए गए कॉलेज दस्तावेज़ों पर वे नियमित रूप से हस्ताक्षर करते थे।
सतेंद्र कुमार को संस्थान चलाने वाला बताया गया। एटा पुलिस ने उन पर और तीन अन्य लोगों पर कार्रवाई शुरू की। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने राज्य की ओर से बताया कि पुलिस ने त्वरित कदम उठाए हैं और जांच को अंजाम तक ले जाया जाएगा; ट्रायल भी तेज करने का संकेत दिया गया।
UGC एडवाइजरी क्यों जरूरी?
ASG के सुझाव को अदालत ने उपयोगी माना। निर्देश साफ है—UGC और नियामक प्राधिकरण जनता व संस्थानों को चेतावनी जारी करें कि बिना सत्यापन के दाखिला या डीलिंग न करें। केंद्र सरकार को इन निर्देशों के अनुपालन की निगरानी का भी कहा गया।
अदालत ने UP मुख्य सचिव द्वारा स्वतंत्र जांच के आदेश की भी सराहना की। कहा गया कि पूरी धोखाधड़ी समाज के सामने आए और भविष्य के दिशानिर्देश तय हो सकें।
छात्रों के लिए सबक
करीब 200 छात्रों के फीस भरने का जिक्र कुछ रिपोर्टों में आया है—दाखिला लेने से पहले मान्यता, UGC/संबंधित काउंसिल लिस्ट और परिसर की असल स्थिति खुद जांचना अब सिर्फ सलाह नहीं, जरूरत है। फर्जी संस्थान अक्सर सस्ते या ‘गारंटीड’ दाखिले का लालच दिखाते हैं।
क्या करें?
- आधिकारिक नियामक वेबसाइट पर संस्थान की मान्यता चेक करें
- कोर्स और सीट अनुमोदन की दस्तावेज़ी पुष्टि लें
- परिसर/लैब/हॉस्पिटल सुविधाओं का मौके पर मुआयना करें
- संदेह हो तो पुलिस/शिक्षा विभाग से शिकायत करें
व्यापक सुनवाई का हिस्सा
यह मामला शैक्षणिक संस्थानों के कामकाज से जुड़ी लंबित रिट याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने भारतीय एक्सप्रेस की 1 सितंबर 2026 की रिपोर्ट का हवाला लिया। UGC को आवेदन तामील होने के बाद राज्य उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भी लिखा गया था।
TrendFlash इस कवरेज को LiveLaw, HT और अदालती सार के आधार पर दर्ज कर रहा है। आरोप जांच के अधीन हैं; अंतिम निष्कर्ष पुलिस/अदालत तय करेंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
UGC और नियामकों को पब्लिक एडवाइजरी जारी करने को कहा—बिना सत्यापन दाखिला/डीलिंग न करें; केंद्र निगरानी करे।
फर्जी कॉलेज कहां चल रहा था?
एटा (UP) के महमूदपुर नगरिया गांव में फार्महाउस/जर्जर दो-तीन कमरों वाली इमारत से।
चेयरमैन किसे बताया गया?
भगवान दास सिंह बघेल—रिपोर्टों में अनपढ़ चाय विक्रेता; उन्होंने दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर स्वीकारे।
पुलिस ने क्या किया?
सतेंद्र कुमार और तीन अन्य पर कार्रवाई; मुख्य सचिव ने स्वतंत्र जांच भी आदेशित की।

