केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को मोबाइल फोन के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) के आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार सरकार ने इस योजना में ₹19,000 करोड़ के इंसेंटिव दिए, जबकि इसी क्षेत्र से ₹3.25 लाख करोड़ का टैक्स मिला। द हिंदू, द हिंदू बिजनेसलाइन, फाइनेंशियल एक्सप्रेस और लाइवमिंट की रिपोर्टों के आधार पर पूरा ब्योरा यहां है।
वैष्णव ने किन आंकड़ों का हवाला दिया
रिपोर्टों के अनुसार वैष्णव ने एक्स पर ये आंकड़े पोस्ट किए:
- सरकार की ओर से दिया गया इंसेंटिव: ₹19,000 करोड़
- प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स): ₹25,000 करोड़
- जीएसटी: ₹3,00,000 करोड़ (₹3 लाख करोड़)
- कुल कर संग्रह: ₹3.25 लाख करोड़
फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार ये आंकड़े वित्त वर्ष 2025-26 तक के पांच साल के हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में 25 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जिनमें अकेले मोबाइल निर्माण में 12 लाख लोग काम करते हैं। द हिंदू के अनुसार उनके पोस्ट में लिखा था, “Cope harder!!”
ध्यान दें कि सरकारी प्रसारक डीडी न्यूज की एक रिपोर्ट में जीएसटी का आंकड़ा ₹3,000 करोड़ लिखा गया है, जबकि बाकी रिपोर्टों में वैष्णव के पोस्ट के आधार पर ₹3 लाख करोड़ बताया गया है, जो कुल ₹3.25 लाख करोड़ के आंकड़े से मेल खाता है। यह लेख बाकी रिपोर्टों के आंकड़ों पर आधारित है।
किस दावे के जवाब में आया बयान
द हिंदू के अनुसार मंत्री की पोस्ट एक मीडिया वीडियो के जवाब में थी। वीडियो में कहा गया था कि सब्सिडी के सहारे बने तैयार मोबाइल फोन के निर्यात से भारत को जितना मिलता है, उससे ज्यादा कंपोनेंट आयात पर खर्च हो जाता है। रिपोर्टों में उस वीडियो के पक्ष या विपक्ष में कोई स्वतंत्र आकलन नहीं दिया गया है, इसलिए यह मंत्री का पक्ष है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार मंत्री का कहना है कि स्मार्टफोन क्षेत्र से टैक्स संग्रह पीएलआई भुगतान से कहीं ज्यादा रहा। इसके साथ ही रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल निर्यात ₹2.59 लाख करोड़ तक पहुंचा और भारत में बिकने वाले 99.2% फोन अब देश में ही बनते हैं, हालांकि कंपोनेंट का आयात भी बढ़ा है।
सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं
द हिंदू के अनुसार मार्च में साझा किए गए सरकारी आंकड़ों में बताया गया था कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ₹2 लाख करोड़ के मोबाइल फोन निर्यात किए। मोबाइल फोन का आयात घरेलू मांग का करीब 0.02% रह गया है, जो 10 साल पहले 75% था। इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन 2014-15 के करीब ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में करीब ₹11.3 लाख करोड़ हो गया, जिसमें मोबाइल उत्पादन ₹0.18 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹5.5 लाख करोड़ हो गया। ये सरकारी आंकड़े हैं।
नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS)
लाइवमिंट और डीडी न्यूज के अनुसार जुलाई में केंद्रीय कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ के परिव्यय वाली मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दी थी। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। इसके तहत:
- पात्र मोबाइल बिक्री पर 2.25% से 5% तक इंसेंटिव मिलेगा।
- प्रमुख कंपोनेंट और सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग पर अतिरिक्त 1.5% तक का इंसेंटिव मिलेगा।
- भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट से जुड़े इंसेंटिव भी दिए जाएंगे।
द हिंदू के अनुसार इस योजना का मकसद स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित भारतीय स्मार्टफोन विकसित करना है, और वैष्णव ने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड का लक्ष्य अक्टूबर 2028 तक पूरा करने की समय-सीमा रखी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
मोबाइल पीएलआई में सरकार ने कितना इंसेंटिव दिया?
मंत्री के अनुसार ₹19,000 करोड़।
सरकार को कितना टैक्स मिला?
मंत्री के अनुसार ₹25,000 करोड़ प्रत्यक्ष कर और ₹3 लाख करोड़ जीएसटी, यानी कुल ₹3.25 लाख करोड़।
नई मोबाइल योजना कितने की है?
मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का परिव्यय ₹62,500 करोड़ है और यह 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी।
नोट: ये आंकड़े केंद्रीय मंत्री के बयान पर आधारित हैं और 28 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों से लिए गए हैं। इनका स्वतंत्र ऑडिट इस लेख में शामिल नहीं है।

