अग्निपथ योजना अपने पहले बड़े पड़ाव पर पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय नौसेना में भर्ती अग्निवीरों का पहला बैच चार साल का कार्यकाल पूरा करके 21 नवंबर 2026 को सेवा से बाहर होगा। यह 2022 में शुरू हुई इस अल्पकालिक सैन्य भर्ती योजना का पहला वास्तविक “एग्जिट” होगा, इसलिए युवाओं, उनके परिवारों और नीति-निर्माताओं की नजर इस पर टिकी है कि इन जवानों का अगला करियर क्या होगा। गूगल ट्रेंड्स पर भी “अग्निपथ योजना” आज सर्च में ऊपर है।
क्या है ताजा खबर?
इंडिया टीवी और दाइजीवर्ल्ड (IANS इनपुट) की रिपोर्ट के अनुसार, नौसेना में पहले बैच में करीब 2,100 अग्निवीर शामिल हुए थे। इनमें से लगभग 550, यानी करीब 25 प्रतिशत को रिटेंशन पॉलिसी के तहत नियमित कैडर में बनाए रखा गया है। बाकी अग्निवीरों के चार साल पूरे होने पर सेवा छोड़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि तकनीकी श्रेणी के अग्निवीरों को जरूरत और नीति के आधार पर दो साल तक का एक्सटेंशन देने पर विचार हो सकता है, लेकिन इस बारे में अभी तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। एक वरिष्ठ नौसेना अधिकारी के हवाले से बताया गया कि सरकार इस मुद्दे पर एक रोडमैप पर काम कर सकती है।
तीनों सेनाओं में कितने अग्निवीर होंगे बाहर?
आउटलुक की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले राउंड में तीनों सेनाओं में कुल 24,400 अग्निवीर भर्ती हुए थे। इनमें सेना में करीब 19,000, वायुसेना में 2,850 और नौसेना में 2,550 थे (नौसेना का आंकड़ा अलग-अलग रिपोर्ट्स में थोड़ा अलग है)। इनमें से लगभग 18,300, यानी तीन-चौथाई, सेवा से बाहर होंगे। रिपोर्ट के अनुसार रिलीज चरणों में होगी, पहले नौसेना, फिर वायुसेना और उसके बाद सेना। कई रिपोर्ट्स में 31 दिसंबर तक 18,000 से ज्यादा अग्निवीरों के बाहर होने की बात कही गई है।
पृष्ठभूमि: अग्निपथ योजना क्या है?
केंद्र सरकार ने जून 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना में “अग्निवीर” के रूप में भर्ती किया जाता है। चार साल बाद हर बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को प्रदर्शन और सेना की जरूरत के आधार पर नियमित सेवा में रखा जा सकता है। यह चयन अपने-आप नहीं होता, बल्कि केंद्रीकृत और तय मानदंडों वाली प्रक्रिया से होता है।
नौसेना में अग्निवीरों की बेसिक ट्रेनिंग ओडिशा के INS चिल्का में होती है। पहले अग्निवीर पासिंग आउट परेड 28 मार्च 2023 को INS चिल्का में हुई थी। वेतन की बात करें तो नौसेना की जानकारी के अनुसार पहले साल 30,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं, जो चौथे साल तक बढ़कर 40,000 रुपये हो जाते हैं। योजना की घोषणा के समय सरकार ने बताया था कि चार साल पूरे होने पर अग्निवीरों को “सेवा निधि” पैकेज (करीब 10.04 लाख रुपये, ब्याज अलग) मिलेगा, जिसमें अग्निवीर और सरकार दोनों का योगदान होता है।
योजना शुरू होते समय कई राज्यों में इसका विरोध भी हुआ था। आलोचकों का तर्क था कि चार साल की नौकरी के बाद युवाओं का भविष्य अनिश्चित रहेगा। सरकार का कहना रहा है कि इससे सेनाएं युवा बनेंगी और प्रशिक्षित, अनुशासित युवा नागरिक जीवन में अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देंगे।
पूर्व अग्निवीरों के लिए क्या रास्ते हैं?
केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारें पहले ही पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस और कुछ अन्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण और आयु-सीमा में छूट जैसी घोषणाएं कर चुकी हैं। निजी क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने भी इन्हें प्राथमिकता देने की बात कही थी। अब पहला बैच बाहर आने पर पता चलेगा कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी कारगर रहती हैं। कुछ विशेषज्ञों ने प्रशिक्षित युवाओं के बेरोजगार रहने को सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय बताया है, इसलिए दूसरे करियर की व्यवस्था पर बहस तेज है।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
- अगर आपके परिवार में कोई अग्निवीर है: सेवा निधि, रिलीज सर्टिफिकेट और स्किल सर्टिफिकेट से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें। केंद्र और राज्य की भर्तियों में पूर्व अग्निवीर कोटे के नोटिफिकेशन पर नजर रखें।
- अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवा: पहले बैच का अनुभव बताएगा कि 25 प्रतिशत रिटेंशन के बाद बाकी 75 प्रतिशत को कितने अवसर मिलते हैं। इसी आधार पर योजना में बदलाव की चर्चा भी हो सकती है।
- आगे: तकनीकी अग्निवीरों के एक्सटेंशन और पुनर्वास रोडमैप पर औपचारिक घोषणा का इंतजार है। 21 नवंबर से नौसेना से रिलीज शुरू होगी, फिर वायुसेना और सेना की बारी आएगी।
साफ है कि अग्निपथ योजना की असली परीक्षा अब शुरू हो रही है। आने वाले हफ्तों में सरकार के फैसले तय करेंगे कि 18 हजार से ज्यादा युवाओं का “सेकंड करियर” कितना सुरक्षित रहेगा।
स्रोत: इंडिया टीवी, दाइजीवर्ल्ड, आउटलुक, इंडिया टुडे, भारतीय नौसेना की भर्ती जानकारी।

