चंडीगढ़/नई दिल्ली: दिवाली वाले रविवार, 8 नवंबर 2026 की सुबह पंजाब पुलिस ने एक लंबे अंतरराष्ट्रीय पीछा का नतीजा सामने रखा। राज्य के डीजीपी गौरव यादव ने एक्स (X) पर लिखा कि एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने काउंटर इंटेलिजेंस की ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्राडिशन सेल (OFTEC) और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से गुरविंदर उर्फ अफरीदी को इथियोपिया से भारत वापस लाया है। पुलिस उन्हें डोनी बल–प्रभ दस्सूवाल गैंग का एक प्रमुख सरगना बताती है। द हिंदू, एनडीटीवी, इंडिया टुडे और टाइम्स ऑफ इंडिया—सभी ने डीजीपी के उसी बयान को छापा। सीएनबीसी-टीवी18, हिंदुस्तान टाइम्स और न्यूज18 के अनुसार अफरीदी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर रविवार सुबह-सुबह पहुंचे। वहां पंजाब पुलिस की टीम ने उन्हें हिरासत में लिया और आगे पूछताछ के लिए पंजाब ले जा रही है।
यह रातोंरात हुआ काम नहीं था। पुलिस ने इसे दस महीने लंबे अंतरराष्ट्रीय मैनहंट का परिणाम बताया है, जिसका कोडनेम ऑपरेशन शहीद (Operation SHAHID) है। पंजाब सरकार ने उनकी जानकारी देने वाले के लिए ₹5 लाख का इनाम घोषित किया था। डीजीपी के अनुसार प्रारंभिक जांच में आरोप है कि आरोपी विदेश बैठकर पंजाब में लक्षित हत्याओं, वसूली से जुड़े फायरिंग के मामलों और अन्य संगठित अपराध को निर्देशित कर रहा था। ये पुलिस के आरोप हैं, अदालत द्वारा साबित दोष नहीं। सीएनबीसी-टीवी18 और न्यूज18 कुछ रिपोर्टों में नाम गुरविंदर सिंह उर्फ अफरीदी भी लिखते हैं; डीजीपी के आधिकारिक पोस्ट में नाम “गुरविंदर उर्फ अफरीदी” ही है।
ऑपरेशन शहीद में कौन शामिल रहा?
डीजीपी यादव के अनुसार अभियान में AGTF, पंजाब काउंटर इंटेलिजेंस की OFTEC और केंद्रीय एजेंसियां साथ थीं। खुफिया जानकारी जुटाना, निगरानी और ट्रैकिंग एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कई देशों में चली। डीजीपी ने विदेश मंत्रालय (MEA) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का आभार भी जताया, क्योंकि किसी दूसरे देश से आरोपी को निकालकर भारत लाने में कूटनीतिक और कानूनी सहयोग बिना काम आगे नहीं बढ़ता। सीएनबीसी-टीवी18 के अनुसार अभियान की देखरेख AGTF के स्पेशल डीजीपी प्रमोद बान कर रहे थे, जबकि OFTEC के आईजी आशीष चौधरी ने केंद्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से तालमेल रखा। हिंदुस्तान टाइम्स ने हवाई अड्डे के सूत्रों के हवाले से लिखा कि उन्हें पंजाब ले जाने वाली टीम की अगुवाई AGTF के एसपी बिक्रम ब्रार कर रहे थे। अखबार ने दोपहर से पहले यह भी लिखा था कि स्पेशल डीजीपी (AGTF) और स्पेशल डीजीपी (काउंटर इंटेलिजेंस) रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं।
सीएनबीसी-टीवी18 के अनुसार यह अभियान मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर चले राज्य के एंटी-गैंगस्टर अभियान “गैंगस्तरान ते वार” के दायरे में आया। न्यूज18 ने भी उसी अभियान का जिक्र किया (उन्होंने हिज्जे Gangstaran Te Vaar लिखा)। हिंदुस्तान टाइम्स, सीएनबीसी-टीवी18 और न्यूज18—तीनों ने पुलिस सूत्रों या पुलिस बयान के आधार पर इसे पंजाब पुलिस द्वारा किसी अफ्रीकी देश से वांछित फरार को सफलतापूर्वक वापस लाने का पहला मामला बताया। यानी OFTEC जैसी इकाई अब सिर्फ खाड़ी या यूरोप तक सीमित नहीं रहना चाहती; अफ्रीका के रास्ते भागने वालों तक भी पहुंच बनाने की कोशिश दिख रही है।
पुलिस के अनुसार वे कैसे देश छोड़कर घूमते रहे?
सीएनबीसी-टीवी18 और न्यूज18, दोनों ने पंजाब पुलिस के हवाले से एक जैसी यात्रा-सूची दी है। पुलिस का कहना है कि अफरीदी 31 मार्च 2025 को मुंबई हवाई अड्डे से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के लिए निकले। अप्रैल 2026 में वे UAE से केन्या गए, जून 2026 में केन्या से अंगोला, और नवंबर 2026 में अंगोला से इथियोपिया पहुंचे। इथियोपिया में उन्हें 6 नवंबर 2026 को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद भारत की ओर निर्वासन (deportation) की प्रक्रिया चली और वे 8 नवंबर की सुबह दिल्ली पहुंचे। न्यूज18 ने पुलिस के हवाले से एक और पड़ाव जोड़ा: UAE से वे इस्तांबुल होते हुए मेक्सिको पहुंचने की कोशिश में थे, वह प्रयास नाकाम रहा और उन्हें वापस UAE भेज दिया गया। यह विवरण अभी मुख्य रूप से न्यूज18 की रिपोर्ट में है, इसलिए इसे उसी के हवाले से समझना ठीक है।
पासपोर्ट वाला आरोप भी इन्हीं दो रिपोर्टों में एक जैसा है। पंजाब पुलिस का आरोप है कि विदेश जाने के लिए उन्होंने फर्जी पहचान से बना पासपोर्ट इस्तेमाल किया। यह पासपोर्ट 12 फरवरी 2025 को लखनऊ से जारी बताया गया है, और इसमें उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के एक निवासी की पहचान व पता इस्तेमाल होने का आरोप है। इसके बाद कथित तौर पर उसी दस्तावेज से 31 मार्च 2025 को मुंबई एयरपोर्ट से देश छोड़ा गया। सीएनबीसी-टीवी18 ने साफ लिखा कि जांच अब इस ओर भी जाएगी कि पासपोर्ट कैसे बना, और क्या किसी और ने इसमें मदद की। जब तक अदालत या चार्जशीट इसमें नाम नहीं जोड़ती, इसे पुलिस का आरोप ही मानना चाहिए, सिद्ध सच्चाई नहीं।
न्यूज18 ने पंजाब पुलिस के हवाले से यह भी लिखा कि अफरीदी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी था और पीछा के दौरान सात इंटरपोल रेफरेंस बनाए गए। यह आंकड़ा अन्य राष्ट्रीय अखबारों की सुबह वाली रिपोर्टों में अलग से दोहराया नहीं गया, इसलिए इसे न्यूज18 द्वारा उद्धृत पुलिस दावे के रूप में पढ़ें।
वे किन मामलों में वांछित बताए जाते हैं?
यहां सावधानी जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग रिपोर्टें इस बिंदु पर एक जैसी नहीं हैं। डीजीपी के सार्वजनिक बयान में आरोप सामान्य हैं: विदेश से लक्षित हत्याएं, वसूली से जुड़ी फायरिंग और संगठित अपराध। इंडिया टुडे ने दोपहर से पहले लिखा कि विशिष्ट घटनाओं और अगले कानूनी कदमों की पूरी सूची तुरंत उपलब्ध नहीं थी। सीएनबीसी-टीवी18 ने भी दर्ज किया कि पुलिस ने अभी सार्वजनिक रूप से उन सभी मामलों का विस्तार नहीं बताया जिनमें अफरीदी वांछित हैं, और आरोप जांच व अदालती प्रक्रिया के अधीन हैं।
न्यूज18 ने पंजाब पुलिस के हवाले से एक बड़ी संख्या लिखी: 30 से अधिक गंभीर मामले, जिनमें पांच हत्या के मामले, हत्या का प्रयास, वसूली और आर्म्स एक्ट शामिल बताए गए। चूंकि यह संख्या और संबंधित घटनाओं के नाम अन्य प्रमुख अंग्रेजी अखबारों की सुबह वाली रिपोर्टों में स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुए, TrendFlash उन्हें अभी पक्का आंकड़ा नहीं मान रहा। अगर पुलिस बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस या चार्जशीट में सूची जारी करे, तो वही आधिकारिक ब्योरा माना जाएगा।
हिंदुस्तान टाइम्स ने दो पुराने संदर्भ जरूर विस्तार से दिए। अखबार के अनुसार अफरीदी तरन तारन जिले के टुट गांव के रहने वाले बताए जाते हैं। उनके नाम का जिक्र 31 अगस्त 2022 को तरन तारन के ठक्करपुरा गांव के एक गिरजाघर पर हुए हमले की जांच में आया। रिपोर्ट के मुताबिक चार नकाबपोशों ने कथित तौर पर चर्च के गार्ड को बंधक बनाया, ईसा मसीह और मदर मैरी की मूर्तियों को क्षति पहुंचाई और पादरी की कार में आग लगाकर भाग गए। जून 2024 में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने जसविंदर सिंह उर्फ मुंशी को इस मामले का मुख्य आरोपी बताते हुए गिरफ्तार किया। हिंदुस्तान टाइम्स की पिछली रिपोर्ट के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में मुंशी ने अफरीदी और दो अन्य को साथी बताया—यह दूसरे आरोपी के बयान पर आधारित पुलिस जांच है, सजायाफ्ता निष्कर्ष नहीं। अखबार ने एक और पुराना केस भी याद दिलाया: 2021 में तरन तारन के सदरपट्टी थाने में IPC की धारा 380 व 457 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी, जो चोरी, घर में सेंध और हथियार से जुड़ी थी। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फरवरी 2024 में पक्षों के बीच समझौते के बाद याचिकाकर्ताओं के खिलाफ वह एफआईआर और आगे की कार्यवाही रद्द कर दी। यानी इस पुराने मामले को आज के निर्वासन का मौजूदा आरोप-पत्र समझना गलत होगा।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या?
- अगर पंजाब—खासकर तरन तारन-अमृतसर पट्टी—में रहते हैं: पुलिस का दावा है कि कुछ गैंगस्टर देश छोड़कर भी वसूली या धमकी का काम विदेश से चलाते रहे। अजनबी नंबर से “गैंग का नाम लेकर” आने वाले कॉल, व्हाट्सएप धमकी या जमीन-कर्ज के विवाद में तीसरे पक्ष की दहशत, इन सबको निजी समझौते में न सुलझाएं। नजदीकी थाने या AGTF हेल्पलाइन पर लिखित शिकायत बेहतर है। किसी के पकड़े जाने की खबर अपने आप पड़ोस की सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
- पासपोर्ट और पहचान पत्र: पुलिस का आरोप है कि लखनऊ से गोरखपुर निवासी की पहचान पर पासपोर्ट बना और उसी से मुंबई एयरपोर्ट से देश छूटा। अगर आपके दस्तावेज खोए हों, फोटो-आईडी की कॉपी किसी दलाल ने मांगी हो, या आपको पासपोर्ट संबंधी अजनबी संदेश आए हों, तो पासपोर्ट सेवा केंद्र/पुलिस में सूचित करें। अपनी आधार-पासपोर्ट स्कैन कॉपी बेतहाशा व्हाट्सएप ग्रुप में न भेजें।
- कानूनी सच्चाई अभी अदालत के पास है: निर्वासन या हिरासत का मतलब दोषसिद्ध नहीं होता। आरोपों की जांच, पूछताछ और अगर चार्जशीट दाखिल हो तो अदालत तय करेगी कि कौन-सा आरोप कितना टिकता है। सोशल मीडिया पर फोटो, पुराने केस या “30 मामले” जैसी संख्या को बिना स्रोत के आगे न घुमाएं।
- आगे पुलिस क्या करेगी: अफरीदी को पंजाब ले जाकर पूछताछ होनी है। सीएनबीसी-टीवी18 के अनुसार जांच उनके अंतरराष्ट्रीय ठिकानों, कथित नेटवर्क और विदेश बैठकर चलाई गई गतिविधियों पर केंद्रित रहेगी। फर्जी पासपोर्ट कैसे बना, इसमें किसने मदद की—यह अलग और महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि उसी रास्ते से और लोग भी देश छोड़ सकते हैं।
- अन्य फरार आरोपी: OFTEC जैसी इकाई और अफ्रीका से पहली सफल वापसी का दावा बताता है कि पुलिस अब उन गैंगस्टरों तक पहुंच बनाना चाहती है जो देश बदल-बदलकर भागते हैं। आम आदमी के लिए व्यावहारिक मतलब यह है कि “विदेश चला गया तो कुछ नहीं होगा” वाला डर या उलटा भरोसा, दोनों अधूरे हैं।
- आधिकारिक अपडेट कहां देखें: डीजीपी या पंजाब पुलिस के आधिकारिक हैंडल, बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस और अदालती दस्तावेज ही पक्के स्रोत हैं। किसी यूट्यूब थंबनेल या व्हाट्सएप फॉरवर्ड की “बड़ी लिस्ट” पर फैसला न करें।
पक्की, कई स्रोतों से मिलती बातें अभी ये हैं: 8 नवंबर 2026 की सुबह गुरविंदर उर्फ अफरीदी इथियोपिया से भारत पहुंचे और दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पंजाब पुलिस की हिरासत में गए; पुलिस इसे दस महीने के ऑपरेशन शहीद और ₹5 लाख के इनाम वाले अभियान का परिणाम बता रही है; डीजीपी गौरव यादव ने उन्हें डोनी बल–प्रभ दस्सूवाल गैंग से जोड़ते हुए विदेश से अपराध चलवाने का आरोप लगाया है; सीएनबीसी-टीवी18 और न्यूज18 के अनुसार उन्हें 6 नवंबर को इथियोपिया में हिरासत में लिया गया था, और पुलिस उनके 31 मार्च 2025 को मुंबई से UAE जाते समय फर्जी पासपोर्ट इस्तेमाल करने का आरोप लगा रही है। बाकी मामले-दर-मामला विस्तार जांच और अदालत पर छोड़ना ही ठीक है।
स्रोत: पंजाब पुलिस डीजीपी गौरव यादव का 8 नवंबर 2026 का एक्स पोस्ट; द हिंदू (8 नवंबर 2026, चंडीगढ़/पीटीआई); एनडीटीवी; इंडिया टुडे; टाइम्स ऑफ इंडिया; हिंदुस्तान टाइम्स (रविंदर वासुदेवा, 8 नवंबर 2026; टुट गांव, IGI लैंडिंग, ठक्करपुरा चर्च हमला और 2021 की रद्द एफआईआर); सीएनबीसी-टीवी18 (8 नवंबर 2026; 6 नवंबर की हिरासत, यात्रा-सूची, फर्जी पासपोर्ट का आरोप, गैंगस्तरान ते वार); न्यूज18 (यात्रा-सूची और पासपोर्ट का आरोप, इस्तांबुल-मेक्सिको वाला दावा, रेड कॉर्नर नोटिस/सात इंटरपोल रेफरेंस, “30 से अधिक मामले” वाला पुलिस हवाला)। आरोप जांच और अदालती प्रक्रिया के अधीन हैं।

