नई दिल्ली: पुरानी दिल्ली के हाउज काजी इलाके में गुरुवार को गिरी तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत के मलबे से रविवार, 8 नवंबर 2026 को एक और शव निकाला गया। इस ताजा बरामदगी के बाद मौत का आंकड़ा सात पर पहुंच गया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मृतक की पहचान बिहार के दरभंगा निवासी 66 वर्षीय लुचुमन मुखिया के रूप में हुई है। उनका शव आगे की कार्यवाही के लिए LNJP अस्पताल ले जाया गया। हादसे के बाद बचाव अभियान 70 घंटे से ज्यादा चल चुका है, और टीमें अभी भी यह देखने की कोशिश कर रही हैं कि मलबे में कोई और तो नहीं फंसा है।
यह अपडेट हिंदुस्तान टाइम्स के पीटीआई फीड और इंडियन एक्सप्रेस, दोनों ने रविवार सुबह दिया। दोनों रिपोर्ट्स में यही नाम, उम्र और यह बात एक जैसे हैं कि रेस्क्यू अभी खत्म नहीं माना जा रहा। हादसा चावड़ी बाजार के पास हुआ; इमारत गली शीश महल में बताई गई है, जिसे कुछ रिपोर्ट्स में गली सितारा या गली शहतारा भी लिखा गया है। स्थान चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन और अजमेरी गेट के आसपास का घना बाजार इलाका है।
गुरुवार सुबह क्या हुआ?
पुलिस और आधिकारिक अपडेट के अनुसार इमारत 5 नवंबर की सुबह करीब 9:45 बजे गिरी, जब ऊपर निर्माण चल रहा था। हिंदुस्तान टाइम्स की बाद की रिपोर्ट में लिखा गया कि ढांचा दो चरणों में गिरा और नीचे काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। नगर निगम दिल्ली (MCD) का कहना है कि इमारत तीसरी मंजिल तक पहुंच चुकी थी और तीसरी मंजिल की छत (रूफ स्लैब) डाले जाते समय ढह गई। द हिंदू ने लिखा कि पुलिस के मुताबिक हादसे के समय स्थल पर करीब 15 निर्माण मजदूर मौजूद थे।
पिछले दो दिनों में शव धीरे-धीरे निकाले गए। द हिंदू के अनुसार गुरुवार को दो शव मिले — किशोरी साह (40) और संजीत कुमार (45)। शनिवार को चार और शव निकले, जिनकी पहचान पंकज शर्मा, विपिन राम, शांतु और दिनेश साह के रूप में हुई। रविवार को सातवें शव — लुचुमन मुखिया — की बरामदगी हुई। रविवार की पीटीआई/इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट में सातों नाम ये हैं: संजीत कुमार, किशोरी साह, पंकज शर्मा, विपिन राम, शांतु, दिनेश साह और लुचुमन मुखिया।
दो घायल मजदूर — सहदेव चौधरी (25) और फिरोज (37) — को मलबे से निकाला गया था। अधिकारियों ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि उनका इलाज हुआ और हालत स्थिर है। कई मृतक बिहार से थे; कुछ मंडावली जैसे इलाकों में किराए पर रहकर दिहाड़ी पर काम करते थे। विपिन राम को पुलिस ने मंडावली, दिल्ली का निवासी बताया है।
मजदूरों की चेतावनी और गिरफ्तारियां
यह सिर्फ “अचानक दुर्घटना” का मामला नहीं माना जा रहा। पुलिस ने इमारत के मालिक सैमुल्लाह उर्फ अयूब और तीन ठेकेदारों — सिराज, ताजुद्दीन और फुरकान — को गिरफ्तार किया है। इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार ठेकेदारों को फरीदाबाद के सिरोही से पकड़ा गया; विस्तृत रिपोर्ट में स्थान फरीदाबाद के दौज तहसील का सिरोही गांव बताया गया है, और तीनों अजमेरी गेट क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। मालिक को गली सितारा, अजमेरी गेट के पास का निवासी बताया गया है। ये गिरफ्तारियां हैं, सजा नहीं; अदालत में आरोप अभी साबित होने बाकी हैं।
हादसे वाले दिन हाउज काजी थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (हत्या की श्रेणी में न आने वाला आपराधिक मानव वध), 290 (इमारत गिराने, मरम्मत या निर्माण में लापरवाह आचरण), 125(क) (इमारतों के संबंध में लापरवाह कृत्य) और 3(5) (सामान्य आशय) के तहत FIR दर्ज की गई। ये धाराएं इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू और हिंदुस्तान टाइम्स, तीनों ने एक जैसे दर्ज की हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स ने FIR और घायल मजदूर फिरोज की शिकायत देखी। फिरोज, जो बिहार से आकर मंडावली में रहते हैं, पुलिस से कह चुके हैं कि उन्होंने ठेकेदारों को बताया था कि लिंटल अभी सूखा नहीं है और उस पर अगली परत नहीं डाली जा सकती; सहारे के लिए और सीमेंट व लकड़ी चाहिए थी। उनके मुताबिक ठेकेदारों ने कहा कि इससे खर्च बढ़ जाएगा, और काम जारी रखने को कहा। यह मजदूर का बयान और FIR में दर्ज आरोप है; ठेकेदारों का पक्ष अदालत में आएगा।
पांच महीने पहले पुलिस ने MCD को लिखा था
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार दिल्ली पुलिस ने इमारत गिरने से करीब पांच महीने पहले MCD को इस निर्माण की सूचना दी थी। निगम ने पत्र मिलने की बात मानी। उसका कहना है कि बाद के निरीक्षण में मालिक वे मरम्मत कर रहा था, जो रखरखाव विभाग ने अप्रैल में सुझाई थीं। बाद की जांच में निगम का आरोप है कि मालिक ने उसी सलाह को ढाल बनाकर बिना जरूरी अनुमति के नई दूसरी और तीसरी मंजिल चुपचाप उठा ली। MCD ने साफ कहा है कि इस ढांचे का कोई भवन नक्शा मंजूर नहीं हुआ था। आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक निर्माण करीब 50 वर्ग मीटर के प्लॉट पर बिना जरूरी मंजूरी के चल रहा था — यह आरोप है, जिसे जांच में परखा जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संबंधित जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर को तुरंत निलंबित करने, विस्तृत जांच कराने और ठेकेदार के खिलाफ FIR सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज और मृतक परिवारों को अनुग्रह राशि दिलाने को भी कहा है। राशि का आंकड़ा आधिकारिक रूप से इन रिपोर्ट्स में नहीं बताया गया; परिवारों को जिला प्रशासन से संपर्क करना चाहिए।
संकरी गलियों में हाथ से चल रहा बचाव
पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में जेसीबी जैसी भारी मशीनें स्थल तक नहीं पहुंच सकीं। इसलिए आग बुझाने वाले कर्मी और रेस्क्यू टीमें मलबा काफी हद तक हाथ से हटा रही हैं। द हिंदू ने दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के पुरानी दिल्ली जिला परियोजना अधिकारी हरीश माथुर के हवाले से लिखा कि टीमें ड्रिलिंग मशीनों से बड़े कंक्रीट स्लैब तोड़ रही थीं और बिजली कटर से मलबा काट रही थीं; निकालने के लिए मिनी-ट्रॉली और खच्चरों का इस्तेमाल हो रहा था। शनिवार तक की उस रिपोर्ट में रेस्क्यू टीम में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के 38 कर्मी, MCD के 30 मजदूर और दिल्ली फायर सेवा के 10 से 12 कर्मी शामिल बताए गए थे; DDMA भी सहयोग कर रहा था और एक इंसिडेंट कमांड पोस्ट बनाई गई थी।
पड़ोसी इमारतों से लोगों को इसलिए भी निकाला गया क्योंकि पुलिस ने आगाह किया था कि बगल का एक ढांचा भी खतरनाक हालत में है। रविवार सुबह तक अधिकारियों ने अन्य पीड़ितों की संभावना से इनकार नहीं किया था।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या?
- इलाके के रहने वालों के लिए: दीवारों वाले शहर की संकरी गलियों में बिना नक्शा-मंजूरी के मंजिलें उठाना सिर्फ कागजी उल्लंघन नहीं, जान का खतरा है। पड़ोस की इमारत भी डगमगा सकती है, जैसा इस मामले में पुलिस ने चेताया। अगर आपके आसपास ऐसा निर्माण दिखे, तो MCD वार्ड कार्यालय या निगम की शिकायत प्रणाली से लिखित सूचना दें और रसीद रखें।
- किराएदार और मकान लेने वाले: पुरानी दिल्ली या किसी घने इलाके में मकान या दुकान लेते समय मंजूर नक्शा और निर्माण की वैधता जरूर पूछें। “मरम्मत” के नाम पर नई मंजिल उठाना इस मामले में ठीक वही आरोप है जो MCD ने लगाया है।
- निर्माण मजदूरों के लिए: फिरोज की शिकायत याद दिलाती है कि अगर ढांचा गीला हो, सहारा कम हो या आपको असुरक्षित लगे, तो काम जारी रखना मजबूरी नहीं होनी चाहिए। संदेह हो तो पुलिस, श्रम विभाग या नजदीकी थाने में तुरंत बताएं। यह कानूनी सलाह नहीं, इस हादसे से निकला व्यावहारिक सबक है।
- परिवार वालों के लिए: मुख्यमंत्री ने अनुग्रह सहायता के निर्देश दिए हैं। प्रक्रिया जिला प्रशासन और संबंधित थाने के माध्यम से चलेगी; सोशल मीडिया पर आने वाले अनौपचारिक वादों पर निर्भर न रहें।
- आगे की निगरानी: बचाव पूरी तरह खत्म होने, निलंबित अधिकारियों की विभागीय जांच और अदालत में चल रहे मामले पर नजर रखनी होगी। जब तक अदालत फैसला नहीं देती, मालिक और ठेकेदार अभियुक्त हैं, दोषसिद्ध नहीं।
दीपावली वाले दिन भी रेस्क्यू जारी रहना बताता है कि घनी बस्ती में इमारत गिरना कितना जटिल होता है। फिलहाल पक्की बातें ये हैं: सात शव निकाले जा चुके हैं, दो घायल स्थिर बताए गए हैं, मालिक समेत चार लोग गिरफ्तार हैं, MCD का कहना है कि नक्शा मंजूर नहीं था, और मलबे में और किसी के होने की संभावना रविवार सुबह तक खारिज नहीं की गई थी।
स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स / पीटीआई (8 नवंबर 2026), इंडियन एक्सप्रेस (8 नवंबर 2026), द हिंदू (7 नवंबर 2026) और हिंदुस्तान टाइम्स की विस्तृत रिपोर्ट “Old Delhi collapse toll jumps to 6; owner held” (8 नवंबर 2026)। नाम, उम्र, धाराएं और आंकड़े इन्हीं रिपोर्ट्स से लिए गए हैं; जहां विवरण अलग थे — जैसे कुछ उम्र — उन्हें छोड़ दिया गया है। गिरफ्तारी और FIR आरोप हैं, दोषसिद्धि नहीं।

