नई दिल्ली: आज 8 नवंबर 2026 को दीपावली है, और इसी तारीख को ठीक 10 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुराने ₹500 और ₹1,000 के नोट चलन से बाहर करने का ऐलान किया था। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मार्च 2017 के आकलन के मुताबिक उस रात देश में घूम रही मुद्रा का 86.9% हिस्सा एक झटके में अवैध हो गया था। द हिंदू ने रविवार (8 नवंबर) को प्रकाशित विश्लेषण में लिखा कि नोटबंदी के कुछ बताए गए उद्देश्यों — खासकर नकदी घटाने और नकली नोटों पर अंकुश — पर ताजा आंकड़ों से असर सीमित दिखता है। साथ ही यूपीआई (UPI) के लेनदेन इन दस वर्षों में हजारों गुना बढ़ चुके हैं। यानी भारत ने डिजिटल भुगतान अपनाया है, लेकिन नकदी छूटी नहीं है।
10 साल बाद नकदी कहां खड़ी है?
RBI की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट (अध्याय VIII, मुद्रा प्रबंधन, 29 मई 2026) के अनुसार, मार्च 2026 के अंत में चलन में बैंकनोटों की कुल कीमत ₹41,23,995 करोड़ (₹41.24 लाख करोड़) थी। एक साल पहले मार्च 2025 में यह आंकड़ा ₹36,86,811 करोड़ था। यानी वित्त वर्ष 2026 में बैंकनोटों की कीमत 11.9% और उनकी संख्या 10.5% बढ़ी।
बिजनेस स्टैंडर्ड ने वित्त मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि 8 नवंबर 2016 को, ऐलान के दिन, देश में मुद्रा प्रसार ₹17.77 लाख करोड़ था। उसी रिपोर्ट के मुताबिक 23 अक्टूबर 2026 के साप्ताहिक आंकड़े में यह बढ़कर ₹43.16 लाख करोड़ हो गया — करीब 143% की बढ़ोतरी, और एक साल पहले के मुकाबले 13.7% ज्यादा।
सिर्फ बढ़ी हुई रकम नहीं, अर्थव्यवस्था के आकार के हिसाब से भी नकदी लगभग पुराने स्तर पर लौट आई है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने RBI के मुद्रा-जीडीपी अनुपात का जिक्र किया: वित्त वर्ष 2016 में चलन मुद्रा जीडीपी की 12.1% थी, नोटबंदी वाले वित्त वर्ष 2017 में गिरकर 8.7% रह गई, और वित्त वर्ष 2026 में फिर करीब 12% पर आ गई। अखबार ने इसकी गणना मार्च 2026 के मुद्रा प्रसार ₹41.68 लाख करोड़ और MoSPI के नाममात्र जीडीपी अनुमान ₹346.36 लाख करोड़ से की है।
रिपोर्ट में एक और बात साफ है: चलन में बैंकनोटों की कीमत का 85.5% हिस्सा अब ₹500 के नोटों का है (₹35,27,408 करोड़)। संख्या के हिसाब से भी ₹500 के नोट सबसे ज्यादा हैं — कुल बैंकनोटों का 41.2%। ₹2,000 के नोटों की वापसी जारी है: ऐलान के समय चलन में रहे ₹3.56 लाख करोड़ में से 31 मार्च 2026 तक 98.45% वापस आ चुके थे।
नकली नोट: पकड़ बढ़ी, खासकर ₹500 में
नोटबंदी के उद्देश्यों में नकली मुद्रा पर लगाम भी शामिल बताया गया था। RBI के आंकड़े बैंकिंग सिस्टम में पहचाने गए नकली नोटों के हैं; पुलिस या अन्य एजेंसियों द्वारा जब्त नोट इनमें शामिल नहीं हैं।
वित्त वर्ष 2026 में बैंकों और RBI ने कुल 2,29,746 नकली नोट पकड़े। वित्त वर्ष 2025 में यह संख्या 2,17,396 थी — यानी 5.7% की बढ़ोतरी। इनमें से सिर्फ 2.4% (5,412 नोट) RBI के अपने कार्यालयों में मिले; बाकी 97.6% (2,24,334) अन्य बैंकों में पकड़े गए। द हिंदू ने भी इसी रुझान को रेखांकित किया है।
सबसे बड़ा हिस्सा ₹500 के नए नोटों का है: वित्त वर्ष 2026 में 1,41,907 नकली ₹500 नोट मिले, जबकि एक साल पहले 1,17,722 थे — यानी 20.5% की बढ़ोतरी। ₹20 के नकली नोटों में भी 47.4% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसके विपरीत ₹10, ₹50, ₹100, ₹200 और ₹2,000 के नकली नोटों की संख्या घटी। पुरानी श्रृंखला के ₹500 के सिर्फ 15 और ₹1,000 के 8 नकली नोट इस साल बैंकों में दिखे।
यहां यह साफ करना जरूरी है कि “ज्यादा पकड़ना” अपने आप में यह साबित नहीं करता कि अर्थव्यवस्था में नकली नोट पहले से ज्यादा घूम रहे हैं। बेहतर मशीनें और सतर्कता भी पकड़ बढ़ा सकती है। फिर भी RBI के अपने टेबल से यह जरूर कहा जा सकता है कि बैंकिंग चैनल में नकली ₹500 नोटों की पहचान पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है।
UPI ने रफ्तार पकड़ी, नकदी गायब नहीं हुई
इसी दशक में डिजिटल भुगतान ने इतिहास रच दिया। बिजनेस स्टैंडर्ड ने NPCI के आंकड़े दिए: वित्त वर्ष 2017 में UPI पर महज 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे, जिनकी कीमत करीब ₹7,000 करोड़ थी। वित्त वर्ष 2026 में लेनदेन बढ़कर 241.62 अरब (करीब 24,162 करोड़) हो गए — लगभग 13,600 गुना — और कीमत करीब ₹314 लाख करोड़ पहुंच गई, यानी 4,000 गुना से ज्यादा।
सितंबर 2026 में अकेले एक महीने में 24.07 अरब UPI लेनदेन हुए, जिनकी कीमत करीब ₹29.37 लाख करोड़ रही। प्लेटफॉर्म से जुड़े बैंकों की संख्या अप्रैल 2016 के 21 से बढ़कर सितंबर 2026 में 756 हो गई। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में देश के डिजिटल भुगतानों में UPI की हिस्सेदारी करीब 84% रही। रोजमर्रा की खरीदारी में इसकी गहरी पैठ इससे भी दिखती है: वित्त वर्ष 2026 में दुकानदारों को किए गए (person-to-merchant) लेनदेन में से 86% ₹500 से छोटे थे।
तो सवाल यह है कि अगर लोग UPI से इतना भुगतान कर रहे हैं, तो चलन में नकदी क्यों बढ़ रही है? RBI के 2023 के शोध पत्र Cash versus Digital Payment Transactions in India: Decoding the Currency Demand Paradox का जवाब है: लोग रोज के खर्च के लिए डिजिटल माध्यम अपना रहे हैं, लेकिन सावधानी और बचत के लिए नकदी रखना जारी रखते हैं। चलन मुद्रा यह नहीं बताती कि नोट कितनी बार हाथ बदल रहे हैं; यह सिर्फ यह बताती है कि कितने नोट छपे-चल रहे हैं। 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में RBI ने एक घरेलू सर्वे का जिक्र करते हुए यह भी लिखा कि लोगों में नकदी के इस्तेमाल की पसंद अभी भी मजबूत बनी हुई है।
आप पर क्या असर पड़ेगा?
- नकदी गायब नहीं हो रही: आंकड़े बताते हैं कि UPI के बावजूद घर और छोटे कारोबार नकदी रख रहे हैं — आपातकाल, बिजली-नेटवर्क की दिक्कत, या डिजिटल सुविधा न होने वाली जगहों के लिए। दीवाली जैसे मौकों पर दोनों का साथ चलना सामान्य है।
- ₹500 के नोट पर खास नजर: चलन का बड़ा हिस्सा और नकली पकड़, दोनों में ₹500 आगे है। नया नोट लेते समय जलछाप, सुरक्षा धागा और रंग-बदलती स्याही जरूर जांचें। शक हो तो पास न करें; बैंक ले जाएं। नकली नोट चलाना खुद कानूनी अपराध है।
- RBI की मुफ्त मदद: सितंबर 2025 में RBI ने indiancurrency.rbi.org.in माइक्रोसाइट शुरू की है, जहां नोटों के सुरक्षा फीचर 360 डिग्री में देखे जा सकते हैं। मोबाइल पर MANI ऐप से दृष्टिबाधित लोग भी नोट पहचान सकते हैं।
- पुराने ₹2,000 के नोट: मार्च 2026 तक अधिकांश नोट वापस आ चुके थे, लेकिन RBI ने लिखा है कि इन्हें अभी भी 19 इश्यू कार्यालयों में बदला या जमा किया जा सकता है, और देश के किसी भी पोस्ट ऑफिस से इंडिया पोस्ट के जरिए भी भेजा जा सकता है।
- रोज़ के छोटे खर्च पर UPI ठीक: दुकान के ज्यादातर UPI भुगतान ₹500 से कम हैं। बिल, रीचार्ज और बाजार की खरीद के लिए यह सुविधाजनक है; फिर भी पास में कुछ नकदी रखना व्यावहारिक है।
आगे क्या?
RBI ने मई 2026 की रिपोर्ट में कहा था कि बैंकनोटों में नए या उन्नत सुरक्षा फीचर चरणबद्ध तरीके से 2026 के मध्य से आने शुरू हो सकते हैं। अगर यह योजना समय पर आगे बढ़ी, तो नकली ₹500 नोटों की पहचान और मुश्किल होनी चाहिए — हालांकि असल असर आने वाले आंकड़ों से ही पता चलेगा। फिलहाल आंकड़े यही कहते हैं: दस साल बाद भारत ने डिजिटल भुगतान में लंबी छलांग लगाई है, लेकिन नकदी अर्थव्यवस्था से गायब नहीं हुई; और बैंकिंग सिस्टम में नकली ₹500 नोटों की पहचान पिछले साल से ज्यादा हुई है।
स्रोत: द हिंदू (8 नवंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (5 नवंबर 2026), भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 (अध्याय VIII, मुद्रा प्रबंधन) और NPCI/वित्त मंत्रालय के वे आंकड़े जो इन रिपोर्टों में उद्धृत हैं। यह लेख उपलब्ध सरकारी और समाचार आंकड़ों पर आधारित है; विश्लेषण संबंधित प्रकाशनों के हैं।
