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7 नवम्बर 2026, शनि

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन से पहले CJP को झटका, सौरभ दास को डेंगू; मुंबई में प्रदर्शन की अनुमति नहीं

सितंबर 2026 के अंत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया था। आंदोलन से पहले दो अड़चनें आईं। CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें डेंगू हो गया है, और मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। यहां जानिए उस समय क्या स्थिति थी और 2 अक्टूबर को असल में क्या हुआ। यह लेख हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स पर आधारित है।

CJP की मांग और पृष्ठभूमि

ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का पद संभाला था। CJP का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में आयोग का रवैया सही नहीं रहा। संगठन की मांग थी कि कुमार इस्तीफा दें, उनके खिलाफ आपराधिक मामला चले और SIR वापस लिया जाए। रिपोर्ट्स के अनुसार CJP ने पहले उन्हें 48 घंटे में इस्तीफे का अल्टीमेटम दिया था। चुनाव आयोग इन आरोपों को लेकर अपनी प्रक्रिया का बचाव करता रहा है और उसने कहा कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। ये आरोप CJP और उसके नेताओं के दावे हैं, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं।

आंदोलन से पहले की दिक्कतें

  • सौरभ दास को डेंगू: उन्होंने रविवार रात सोशल मीडिया पर बताया कि बीमारी के कारण तैयारियों में सक्रिय रहना मुश्किल होगा।
  • शिवाजी पार्क में अनुमति नहीं: पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 2013 के आदेश, महाराष्ट्र सरकार के आदेश, BMC की अनुमति न होने और शिवाजी पार्क के रिहायशी व “साइलेंस जोन” होने का हवाला दिया और आयोजकों को दूसरी जगह चुनने की सलाह दी।
  • CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने अनुमति न मिलने पर “जेल भरो आंदोलन” की घोषणा की।

2 अक्टूबर को क्या हुआ

द हिंदू और हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, पुलिस की अनुमति न होने के बावजूद CJP ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स में हजारों लोगों के जुटने की बात है, जिनमें ज्यादातर युवा थे, और मौके पर शबाना आज़मी, नसीरुद्दीन शाह, विशाल ददलानी, विशाल भारद्वाज और तुषार गांधी जैसी हस्तियां भी पहुंचीं। पुलिस ने करीब 300 जवान तैनात किए और माहौल शांतिपूर्ण रहा। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार पुलिस ने गेट नंबर 6 के पास करीब 400-500 लोगों के जुटने का अनुमान दिया, जबकि कुछ अन्य रिपोर्ट्स में संख्या हजारों में बताई गई। इस अंतर को देखते हुए आंकड़ों को अनुमान ही मानें।

बाद में शिवाजी पार्क पुलिस ने दिपके, सौरभ दास और अन्य CJP नेताओं तथा 400 से ज्यादा अज्ञात समर्थकों पर गैरकानूनी जमावड़े (BNS धारा 189) और सरकारी आदेश न मानने (धारा 223) के साथ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया। रिपोर्ट्स में गिरफ्तारी की बात नहीं है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने केस की आलोचना की, जबकि राज्य के गृह राज्य मंत्री ने कहा कि पुलिस ने आयोजकों से सहयोग किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनका मकसद था। दिपके ने कहा कि यह व्यापक आंदोलन की शुरुआत है।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान में है, पर सार्वजनिक स्थल पर आयोजन के लिए पुलिस और स्थानीय निकाय की अनुमति के नियम लागू होते हैं।
  • अगर आप मतदाता हैं, तो अपना नाम मतदाता सूची में voters.eci.gov.in या वोटर हेल्पलाइन ऐप से जांचते रहें।
  • मुंबई में बड़े प्रदर्शनों के दिन यातायात प्रभावित हो सकता है। यात्रा से पहले ट्रैफिक अपडेट देखें।
  • CJP और चुनाव आयोग के बयानों के लिए दोनों के आधिकारिक हैंडल या विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

CJP किसके इस्तीफे की मांग कर रही है?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की, साथ ही SIR वापस लेने की।

क्या शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को प्रदर्शन हुआ?

हां। अनुमति न मिलने के बावजूद प्रदर्शन हुआ, जो रिपोर्ट्स के अनुसार शांतिपूर्ण रहा।

क्या पुलिस ने कार्रवाई की?

पुलिस ने दिपके, सौरभ दास और अन्य नेताओं तथा 400 से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। गिरफ्तारी की खबर नहीं थी।

चुनाव आयोग का इस पर क्या कहना है?

आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों का बचाव किया है और कहा है कि वे सर्वसम्मति से लिए गए।

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