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6 नवम्बर 2026, शुक्र

FPI बिकवाली: अक्टूबर में भारतीय शेयरों से ₹44,000 करोड़ से ज्यादा निकासी

मुंबई के दलाल स्ट्रीट पर BSE बिल्डिंग

अक्टूबर 2026 की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए फिर दबाव वाली रही। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार बिकवाली कर रहे हैं और घरेलू निवेशक इस झटके को संभालने की कोशिश में लगे हैं।

Business Standard में छपी PTI रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में अब तक FPI ने भारतीय इक्विटी से ₹44,166 करोड़ की निकासी की है। Economic Times के आंकड़ों में अक्टूबर के पहले छह सत्रों में लगभग ₹45,125 करोड़ की नेट बिकवाली बताई गई है—लगभग उतना ही जितना सितंबर पूरे महीने में बाहर गया था (करीब ₹45,536 करोड़)।

साल 2026 में कितनी बड़ी निकासी?

NSDL डेटा पर आधारित रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 में अब तक इक्विटी से FPI निकासी ₹3.04 लाख करोड़ पहुंच चुकी है। तुलना के लिए, पूरे 2025 में यह आंकड़ा करीब ₹1.66 लाख करोड़ था। यानी एक साल में ही दबाव साफ दिख रहा है।

सितंबर में नेट निकासी ₹35,861 करोड़ रही। उससे पहले जुलाई में ₹20,200 करोड़ और अगस्त में ₹29,631 करोड़ का निवेश आया था। यानी गर्मी के दो महीनों की राहत के बाद सितंबर-अक्टूबर में रुख फिर उलटा हो गया।

Nifty पर असर

Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट VK Vijayakumar के अनुसार, भारी FPI बिकवाली ही इस साल बाजार की कमजोरी की बड़ी वजह रही। उन्होंने कहा कि 2026 में Nifty का साल-दर-साल रिटर्न करीब -13.87 प्रतिशत रहा है।

जब 10-वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर जोखिम-मुक्त रिटर्न 5.2 प्रतिशत से ऊपर हो, तो विदेशी निवेशकों के लिए भारत से पैसा निकालना तर्कसंगत लगता है—यह बात Vijayakumar ने साफ कही।

क्यों बेच रहे हैं FPI?

रिपोर्ट्स में तीन बड़े कारण दोहराए गए हैं:

कच्चा तेल महंगा

खाड़ी आपूर्ति जोखिम की वजह से क्रूड ऊंचा बना हुआ है। इससे मुद्रास्फीति और रुपये पर दबाव बढ़ता है।

मजबूत डॉलर और ऊंची अमेरिकी यील्ड

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई साल के ऊंचे स्तर पर रही। Economic Times में उल्लेख है कि 10-वर्षीय अमेरिकी यील्ड 5.3 प्रतिशत से ऊपर भी गई। ऐसे में “सेफ” कर्ज बाजार इक्विटी से आकर्षक लगने लगता है।

उत्तर एशिया में AI रैली

Business Standard की रिपोर्ट में Trackk के को-फाउंडर Vedant Gupte का कहना है कि उत्तर एशियाई बाजारों में AI थीम पर पूंजी जा रही है, जहां वैल्यूएशन अभी सस्ते दिखते हैं। उन्होंने इसे भारत के खिलाफ फैसला नहीं, बल्कि वैश्विक पूंजी के फिर से पोजिशन लेने का रूप बताया।

Gupte ने यह भी कहा कि घरेलू प्रवाह ने बिकवाली को काफी हद तक सोख लिया है, इसलिए सिर्फ हेडलाइन निकासी से बाजार “टूट” नहीं गया—फर्श अपेक्षाकृत मजबूत है।

आगे क्या देखें?

विश्लेषक आगे इन पॉइंट्स पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं—अमेरिकी और भारतीय महंगाई आंकड़े, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, ब्रेंट क्रूड, और भू-राजनीतिक तनाव। जब तक ऊंची यील्ड और महंगा तेल बना रहता है, FPI का रुख सख्त रह सकता है।

Vijayakumar का स्पष्ट संदेश है: यील्ड ऊंची रहेंगी तो बिकवाली जारी रह सकती है; तस्वीर तब बदलेगी जब वैल्यूएशन आकर्षक लगें और रिस्क-रिवॉर्ड निवेश के पक्ष में झुके।

छोटे निवेशक क्या करें?

घबराकर बेचना अक्सर नुकसान बढ़ाता है। लंबी अवधि के SIP और अच्छे बिजनेस वाले शेयरों पर अनुशासन बनाए रखना कई विशेषज्ञों का पुराना मंत्र है। फिर भी हर किसी की जोखिम क्षमता अलग होती है—जरूरत हो तो SEBI-रजिस्टर्ड सलाहकार से बात करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अक्टूबर 2026 में FPI ने कितना बेचा?

Business Standard/PTI के अनुसार अब तक अक्टूबर में ₹44,166 करोड़ की निकासी हुई है। ET के आंकड़ों में पहले छह सत्रों में करीब ₹45,125 करोड़ की बिकवाली बताई गई है।

पूरे 2026 में निकासी कितनी है?

इक्विटी से FPI निकासी करीब ₹3.04 लाख करोड़ बताई जा रही है, जो पूरे 2025 (₹1.66 लाख करोड़) से काफी ज्यादा है।

क्या सिर्फ भारत कमजोर है?

Trackk के Vedant Gupte के मुताबिक यह वैश्विक पूंजी के रुख का हिस्सा है—महंगा क्रूड, मजबूत डॉलर, ऊंची अमेरिकी यील्ड और उत्तर एशिया की AI रैली।

Nifty पर सालाना असर क्या रहा?

Geojit के VK Vijayakumar के अनुसार 2026 में Nifty का YTD रिटर्न करीब -13.87 प्रतिशत रहा।

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