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7 नवम्बर 2026, शनि

अथिरा विजयन जीरो FIR: दिल्ली प्रदर्शन में मारपीट के आरोप पर केरल पुलिस ने दर्ज किया केस, अब दिल्ली होगा ट्रांसफर

बाबा खड़क सिंह मार्ग पर कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन, नई दिल्ली—अथिरा विजयन जीरो FIR मामले का स्थान

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ NSUI के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस मारपीट का मामला अब केरल पहुंच गया है। केरल पुलिस ने NSUI कार्यकर्ता और दिल्ली विश्वविद्यालय की कानून छात्रा अथिरा विजयन की शिकायत पर तिरुवनंतपुरम के म्यूजियम पुलिस स्टेशन में जीरो FIR दर्ज की है। जांच उस दिल्ली थाने को सौंपी जाएगी, जिसके इलाके में घटना हुई।

13 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में क्या हुआ था

FIR के मुताबिक घटना 13 अक्टूबर (मंगलवार) को कनॉट प्लेस में NSUI के फ्लैश प्रोटेस्ट के दौरान हुई। प्रदर्शनकारी CEC ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में थे। Indian Express के अनुसार NSUI राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की अगुवाई में कार्यकर्ता पहले राजीव चौक मेट्रो के गेट नंबर 7 पर जुटे, फिर पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया।

शिकायत में आरोप है कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को बस से कनॉट प्लेस ले जाकर सड़क पर घसीटा गया और अथिरा के कपड़े फाड़ने की कोशिश हुई। FIR में दर्ज आरोपों के अनुसार कनॉट प्लेस थाने के पास उनके चेहरे पर मारा गया, हाथ पीछे मरोड़े गए, पेट के निचले हिस्से में लात मारी गई और फोन छीनने की कोशिश की गई। विरोध करने पर उनकी शॉल गले में कसकर जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी है, जिससे गले में चोट आई और अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।

ANI के मुताबिक अथिरा कोझिकोड के पुल्लालूर की रहने वाली हैं और दिल्ली के हार्डिंग अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। New Indian Express ने बताया कि उन्हें एक कान से सुनने में परेशानी होने की शिकायत भी है। बुधवार को वे राहुल गांधी के साथ मीडिया के सामने भी आईं।

FIR में कौन सी धाराएं, आरोपी कौन

Deccan Chronicle (ANI) के अनुसार यह जीरो FIR क्राइम नंबर 1447/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 74, 76, 115, 117, 126, 351(3), 296(b) और 3(5) में दर्ज हुई है। PTI के मुताबिक इनमें महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला, निर्वस्त्र करने का प्रयास, चोट पहुंचाना, गलत तरीके से रोकना, गाली-गलौज और आपराधिक धमकी जैसे प्रावधान शामिल हैं।

अहम बात यह है कि FIR में किसी पुलिसकर्मी या अन्य व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है। अथिरा का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनकी शिकायत पर केस दर्ज नहीं किया, इसलिए उन्होंने केरल के राज्य पुलिस प्रमुख को ईमेल से शिकायत भेजी। वहां से तिरुवनंतपुरम सिटी पुलिस कमिश्नर कार्यालय के जरिए यह 14 अक्टूबर को म्यूजियम थाने पहुंची। दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को कहा था कि वह सोशल मीडिया पर वायरल उस वीडियो की प्रामाणिकता जांच रही है, जिसमें एक महिला कार्यकर्ता को घसीटते दिखाया गया। ये सभी आरोप हैं, जिनकी जांच होनी बाकी है।

केरल गृह मंत्री ने क्या कहा

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने जीरो FIR का बचाव करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई गैरकानूनी थी और केरल पुलिस शिकायत के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। PTI ने यह भी दर्ज किया है कि यह केस ऐसे समय दर्ज हुआ है जब केरल विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो KSTP सड़क परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों और 2006 में एक मलेशियाई ठेकेदार की मौत की जांच कर रहा है—उस समय ज्ञानेश कुमार राज्य के PWD सचिव थे।

जीरो FIR क्या है—आप पर क्या असर पड़ेगा

  • कहीं भी शिकायत: गंभीर अपराध की शिकायत देश के किसी भी थाने में दर्ज कराई जा सकती है, भले घटना दूसरे राज्य में हुई हो। पहले यह CrPC की धारा 154 में था, अब BNSS की धारा 173 में है। इसकी सिफारिश 2012 निर्भया केस के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी ने की थी।
  • बाद में ट्रांसफर: FIR दर्ज करने वाला थाना केस को घटनास्थल वाले थाने को भेजता है; असली जांच वहीं होती है।
  • थाना मना करे तो: FIR की कॉपी मुफ्त पाना आपका अधिकार है। पुलिस टाल-मटोल करे तो लिखित शिकायत SP/पुलिस कमिश्नर को भेजें और रिसीविंग जरूर रखें।
  • आगे क्या: केस दिल्ली ट्रांसफर होने के बाद दिल्ली पुलिस को आरोपों की जांच करनी होगी। मेडिकल रिपोर्ट, वीडियो और गवाहों के बयान अहम सबूत होंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

अथिरा विजयन कौन हैं?

वे NSUI कार्यकर्ता और दिल्ली विश्वविद्यालय की कानून छात्रा हैं, मूल रूप से केरल के कोझिकोड से। कुछ रिपोर्ट में उनका नाम अथिरा C भी लिखा गया है।

केस किस थाने में दर्ज हुआ?

तिरुवनंतपुरम के म्यूजियम पुलिस स्टेशन में, जीरो FIR के रूप में।

क्या केरल पुलिस खुद जांच करेगी?

नहीं। जीरो FIR के नियम के मुताबिक केस दिल्ली के संबंधित थाने को ट्रांसफर होगा।

क्या किसी पुलिसकर्मी का नाम FIR में है?

नहीं, FIR में किसी को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।

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