कांग्रेस पार्टी को ₹20,000 से ज्यादा के बड़े चंदे में भारी गिरावट आई है। चुनाव आयोग (ECI) में जमा की गई पार्टी की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट के विश्लेषण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में कांग्रेस को ऐसे चंदे से कुल ₹130.69 करोड़ मिले, जबकि 2024-25 में यह रकम ₹517.39 करोड़ थी। यानी एक साल में करीब 75% की गिरावट। समाचार एजेंसी PTI के विश्लेषण के अनुसार, यह पिछले एक दशक में ऐसे चंदे की सबसे तेज सालाना गिरावट है। यह जानकारी 8 नवंबर 2026 को The Hindu, Times of India, The New Indian Express और Outlook समेत कई मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित की है।
मुख्य आंकड़े एक नजर में
- 2025-26: ₹130.69 करोड़ (₹20,000 से ऊपर के चंदे)
- 2024-25: ₹517.39 करोड़ (लोकसभा चुनाव वाला साल)
- 2023-24: ₹281.48 करोड़
- प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट का योगदान: ₹216.34 करोड़ से घटकर ₹25 करोड़ (करीब 88% कम)
- BJP (2024-25): ₹6,074.02 करोड़, यानी कांग्रेस से करीब 12 गुना
गिरावट की सबसे बड़ी वजह: प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, इस गिरावट का बड़ा हिस्सा प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से आए पैसे में कमी के कारण है। 2024-25 में इस ट्रस्ट ने कांग्रेस को ₹216.34 करोड़ दिए थे, जो 2025-26 में घटकर सिर्फ ₹25 करोड़ रह गए। पार्टी की ताजा रिपोर्ट में प्रूडेंट ही इकलौता इलेक्टोरल ट्रस्ट है। Times of India के विश्लेषण के अनुसार, 2024-25 में कांग्रेस के कुल चंदे में प्रूडेंट की हिस्सेदारी 41.8% थी, जो 2025-26 में करीब 19% रह गई।
इलेक्टोरल ट्रस्ट ऐसी संस्थाएं होती हैं जिनके जरिए कंपनियां राजनीतिक दलों को चंदा देती हैं। यानी ट्रस्ट से आने वाले पैसे में कमी का मतलब है कि कॉर्पोरेट चंदा काफी घटा है।
किन-किन ने दिया बड़ा चंदा
प्रूडेंट के अलावा बड़े दानदाताओं में स्टार सीमेंट (₹5 करोड़), सज्जन भजनका (₹4 करोड़), अफनान कंस्ट्रक्शंस (₹3 करोड़), प्रेम कुमार भजनका (₹2 करोड़) और IPSUM प्रोएडवाइजर्स व SMS बिल्डर्स (₹1-1 करोड़) शामिल हैं। Times of India के मुताबिक, ₹1 करोड़ या उससे ज्यादा के सिर्फ 9 चंदों से ₹43 करोड़ आए, जो कुल रकम का लगभग एक-तिहाई है। वहीं ₹5 लाख या उससे कम के 1,321 चंदों से कुल ₹37.2 करोड़ आए। कुल 1,735 एंट्री में मीडियन (बीच का) चंदा ₹3 लाख रहा।
पिछले सालों से तुलना
PTI के विश्लेषण में पिछले 12 वित्त वर्षों की तुलना की गई है। इससे ज्यादा तेज गिरावट आखिरी बार 2015-16 में दिखी थी, जब कांग्रेस का घोषित चंदा पिछले साल के ₹141.46 करोड़ से करीब 86% गिर गया था। हालांकि 2025-26 का आंकड़ा इस अवधि का सबसे कम नहीं है। 2020-21 में ₹74.52 करोड़, 2021-22 में ₹95.46 करोड़ और 2022-23 में ₹79.92 करोड़ का चंदा मिला था। लेकिन इन आंकड़ों में इलेक्टोरल बॉन्ड शामिल नहीं हैं, जो योजना चलने के दौरान अलग से रिपोर्ट होते थे। बॉन्ड को जोड़ें तो 2025-26 की रकम 2020-21 के बाद सबसे कम है।
Times of India ने यह भी ध्यान दिलाया कि 2025-26 में बिहार विधानसभा चुनाव हुए और अप्रैल 2026 में असम, केरलम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के चुनावों की तैयारी भी इसी साल चली, फिर भी चंदा 2023-24 के मुकाबले भी करीब 53% कम रहा।
BJP से कितना बड़ा फर्क
2024-25 में BJP को ₹20,000 से ऊपर के चंदे में ₹6,074.02 करोड़ मिले थे, जो उसी साल कांग्रेस की रकम का करीब 12 गुना है। विश्लेषण किए गए सभी 12 वित्त वर्षों में BJP का चंदा कांग्रेस से ज्यादा रहा। BJP की 2025-26 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट अभी चुनाव आयोग ने सार्वजनिक नहीं की है, इसलिए इस साल की सीधी तुलना अभी संभव नहीं है।
क्या यह कांग्रेस की पूरी कमाई है?
नहीं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट में सिर्फ ₹20,000 से ऊपर के चंदे दिखाए जाते हैं। पार्टी की कुल आय में छोटे चंदे, सदस्यता शुल्क, कूपन बिक्री और ब्याज जैसी चीजें भी शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए, 2024-25 में सिर्फ कूपन बिक्री से कांग्रेस को ₹350.12 करोड़ मिले थे। पार्टी का 2025-26 का ऑडिटेड अकाउंट अभी अपलोड नहीं हुआ है, और उसी से पार्टी की पूरी वित्तीय स्थिति साफ होगी। इस खबर पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया हमें रिपोर्ट्स में नहीं मिली।
₹20,000 वाला नियम क्या है
जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत राजनीतिक दलों को हर साल चुनाव आयोग को बताना होता है कि उन्हें ₹20,000 से ज्यादा का चंदा किसने और कितना दिया। इससे कम रकम वाले दानदाताओं के नाम बताना जरूरी नहीं है। यही वजह है कि ये रिपोर्ट्स पार्टियों की फंडिंग का सिर्फ एक हिस्सा दिखाती हैं, पूरी तस्वीर नहीं। फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था, जिसके बाद से इलेक्टोरल ट्रस्ट और सीधे चंदे की भूमिका और अहम हो गई है।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
आम मतदाता के लिए ये आंकड़े इसलिए अहम हैं क्योंकि चुनाव लड़ने, प्रचार करने और संगठन चलाने में बड़ी रकम लगती है। पैसे का यह बड़ा फर्क चुनावी मुकाबले की बराबरी पर सवाल उठाता है, और चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता की बहस को फिर से तेज कर सकता है। आगे दो बातों पर नजर रहेगी: पहली, BJP और बाकी दलों की 2025-26 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट, जिससे पता चलेगा कि गिरावट सिर्फ कांग्रेस तक सीमित है या पूरे चंदे के माहौल में बदलाव है; दूसरी, कांग्रेस का ऑडिटेड अकाउंट, जो पार्टी की असली वित्तीय हालत बताएगा। तब तक इन आंकड़ों को पार्टी की पूरी कमाई मानना सही नहीं होगा।
स्रोत: चुनाव आयोग में जमा कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट पर PTI का विश्लेषण, The Hindu, The Times of India, The New Indian Express, The Hindu BusinessLine और Outlook India (8 नवंबर 2026)।

