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7 नवम्बर 2026, शनि

FSSAI की बड़ी कार्रवाई: प्रियागोल्ड बिस्कुट में पशु चारे वाला चोकर?—सूर्या फूड का लाइसेंस निलंबित, दोडला डेयरी और UEIR पर भी अभियोजन; जानिए आरोप और आप क्या करें

कोलकाता में प्लेट में रखे नमकीन बिस्कुट — प्रियागोल्ड/खाद्य सुरक्षा खबर के लिए प्रतिनिधि फोटो (फ़ाइल फोटो, 2011)

खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर बताया कि उसने तीन कंपनियों के खिलाफ अभियोजन (prosecution) की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें सबसे चर्चित मामला सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड का है, जो प्रियागोल्ड (Priyagold) ब्रांड के बिस्कुट बनाती है। नियामक के मुताबिक निरीक्षण में पाया गया कि बिस्कुट बनाने में रेशे (फाइबर) के स्रोत के रूप में पशु चारे के लिए बने चोकर (cattle-feed bran) का इस्तेमाल हो रहा था, जो मानव उपभोग के लिए नहीं है। यह खबर X पर “Priyagold” ट्रेंड के साथ देशभर में फैल गई। नीचे आसान भाषा में समझिए कि आरोप क्या हैं, किन दो और कंपनियों पर क्या कार्रवाई हुई, और आम उपभोक्ताओं को अब क्या करना चाहिए।

ध्यान दें: यह रिपोर्ट FSSAI के आधिकारिक बयान और The Hindu, Hindu BusinessLine, Firstpost व Business Today जैसी विश्वसनीय खबरों पर आधारित है। कंपनी की ओर से कोई विस्तृत जवाब इस लेख के लिखे जाने तक प्रमुख स्रोतों में स्पष्ट रूप से नहीं दिखा; किसी भी पक्ष को दोषी ठहराने से पहले अदालती प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

प्रियागोल्ड-सूर्या फूड केस में FSSAI ने क्या कहा

  • उपभोक्ता शिकायत के बाद निरीक्षण: FSSAI ने कहा कि सूर्या फूड एंड एग्रो के परिसर का निरीक्षण एक उपभोक्ता शिकायत के बाद किया गया।
  • पशु चारे वाला चोकर: नियामक के अनुसार, मानव उपभोग के लिए न बने चोकर को प्रियागोल्ड बिस्कुट निर्माण में फाइबर के स्रोत के रूप में कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल होते पाया गया। चोकर वाली गन्नियों (gunny bags) पर भी यह अंकित था कि सामग्री पशु चारे के लिए है।
  • अन्य कमियां: प्लांट स्वच्छता, कीट नियंत्रण, कच्चे माल का भंडारण और अलग-अलग रखना, कर्मचारियों की स्वच्छता, परिसर का रखरखाव और बीच की फॉर्मूलेशन हैंडलिंग में भी गंभीर कमियां बताई गईं।
  • लाइसेंस निलंबित: गंभीर गैर-अनुपालन के बाद कंपनी का FSSAI लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। अब सक्षम प्राधिकारी ने उल्लंघन के लिए अभियोजन शुरू करने की मंजूरी दे दी है।
  • जो जानकारी अभी नहीं है: उपलब्ध रिपोर्ट्स में निरीक्षण की सटीक तारीख और कथित तौर पर इस्तेमाल चोकर की मात्रा का उल्लेख नहीं है—इसलिए उन आंकड़ों का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

दो और कंपनियां: दोडला डेयरी और UEIR ऑर्गेनिक

FSSAI ने उसी अपडेट में दो और मामलों की भी जानकारी दी:

  • डोडला डेयरी (Dodla Dairy): फुल क्रीम दूध के नियामकीय सैंपल को खाद्य विश्लेषक ने दूध की वसा (milk fat) के निर्धारित मानकों से नीचे होने के कारण घटिया (substandard) पाया। कंपनी की अपील पर सैंपल रेफरल फूड लैब में गया, जहां पुष्टि हुई कि सैंपल में डिटर्जेंट/कॉस्टिक सोडा की मौजूदगी के कारण यह असुरक्षित (unsafe) था और दूध की वसा न्यूनतम सीमा से कम होने के कारण घटिया भी। FSS Act, 2006 के तहत असुरक्षित और घटिया भोजन से जुड़े उल्लंघन बताए गए; संबंधित अन्य FBO पर भी अभियोजन की मंजूरी दी गई।
  • UEIR ऑर्गेनिक फूड्स: कार्बनिक (ऑर्गेनिक) बताए गए पीले किशमिश (yellow raisins) के सैंपल में निर्धारित सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष मिले। अपील पर रेफरल लैब ने पुष्टि की कि थायमेथोक्साम (Thiamethoxam) और फ्लूओपाइराम मेटाबोलाइट्स (Fluopyram metabolites) सीमा से अधिक थे, इसलिए सैंपल असुरक्षित घोषित हुआ।

Hindu BusinessLine के अनुसार, FSSAI ने नरपधम फूड्स, सन रिजेस हेल्थ केयरर्स और शा कांतिलाल जयntilाल को भी नोटिस भेजे हैं—इनमें भ्रामक स्वास्थ्य/पोषण दावे, लाइसेंस श्रेणी, बंद परिसर या स्वच्छता संबंधी मुद्दे शामिल बताए गए हैं। नोटिस का मतलब अभियोजन से अलग, सुधार और जवाब मांगना है।

यह कार्रवाई क्यों मायने रखती है

बिस्कुट और दूध रोज़मर्रा की चीज़ें हैं। FSSAI का कहना है कि वह FSS Act, 2006 के तहत खाद्य सुरक्षा उल्लंघन पर “ज़ीरो टॉलरेंस” रखता है। प्रियागोल्ड केस में सबसे संवेदनशील बिंदु यह है कि कच्चा माल कथित तौर पर मानव भोजन के मानक वाला नहीं, बल्कि पशु चारे के लेबल वाला था। दोडला केस में डिटर्जेंट/कॉस्टिक सोडा जैसे रसायन का जिक्र उपभोक्ताओं के लिए और भी चिंता का विषय है। UEIR केस याद दिलाता है कि “ऑर्गेनिक” लेबल भी लैब जांच से ऊपर नहीं है।

खाद्य नियामक की भूमिका और “ईट राइट” जैसे अभियानों की पृष्ठभूमि समझने के लिए हमारी रिपोर्ट अयोध्या राम मंदिर को FSSAI का ईट राइट स्थान भी पढ़ सकते हैं। पैकेज्ड/कृषि-खाद्य श्रृंखला में नीति बदलाव का एक और उदाहरण चीनी-एथेनॉल डायवर्जन पर ताज़ा नीति है।

आप पर क्या असर पड़ेगा / उपभोक्ता क्या करें

  • घबराहट में खरीदारी न बदलें सिर्फ अफवाह से: इस चरण में FSSAI ने अभियोजन शुरू करने की बात कही है; कोर्ट में सबूत और जवाब दोनों आएंगे। फिर भी पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर, निर्माण/समाप्ति तारीख और ब्रांड का पता चेक करना अच्छी आदत है।
  • शिकायत कैसे दर्ज करें: संदिग्ध स्वाद, गंध, पैकेजिंग या बीमारी का संदेह हो तो नजदीकी खाद्य सुरक्षा अधिकारी या FSSAI की शिकायत व्यवस्था (FoSCoS / Helpline 1800-11-2100 जैसी सार्वजनिक चैनलों) से संपर्क करें। सबूत (बिल, पैकेट फोटो) रखें।
  • दूध और डेयरी: खुले दूध या ब्रांडेड पैक दोनों में असामान्य स्वाद/गंध पर तुरंत बंद करें और शिकायत दर्ज करें। दोडला केस याद दिलाता है कि लैब जांच ही अंतिम प्रमाण होती है।
  • “ऑर्गेनिक” पर भरोसा कैसे: सिर्फ लेबल नहीं, प्रमाणन और नियामक कार्रवाई दोनों देखें। कीटनाशक सीमा पार होना गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
  • स्टॉक/रिटेलर: रिटेलर और थोक विक्रेताओं को सप्लायर के मान्य लाइसेंस और बैच रिकॉर्ड रखने चाहिए; नियामक जांच में ये दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

आगे क्या

अगला कदम कानूनी प्रक्रिया है—अभियोजन मंजूरी के बाद संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी/अदालत के सामने मामला आगे बढ़ेगा। सूर्या फूड का लाइसेंस पहले से निलंबित बताया गया है; दोबारा संचालन तभी संभव होगा जब नियामक शर्तें पूरी हों और प्रक्रिया अनुमति दे। कंपनियां अपील या जवाब दाखिल कर सकती हैं। उपभोक्ताओं के लिए सबसे व्यावहारिक बात यह है कि वे आधिकारिक अपडेट पर नज़र रखें और अफवाह वाले मैसेज फ़ॉरवर्ड करने से बचें।

ध्यान रखने वाली बातें

यह खबर FSSAI के आरोपों/निष्कर्षों पर आधारित है, न कि अंतिम अदालती फैसले पर। निरीक्षण तारीख, चोकर की मात्रा और बाज़ार में बचे स्टॉक की वापसी (recall) जैसी डिटेल आधिकारिक अपडेट में अभी स्पष्ट नहीं हैं—जब FSSAI या कंपनी ओर से स्पष्ट बयान आएगा, हम यह रिपोर्ट अपडेट करेंगे। स्रोत: The Hindu (PTI), The Hindu BusinessLine, Firstpost, Business Today; FSSAI का 17 अक्टूबर 2026 का सोशल मीडिया अपडेट।

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