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7 नवम्बर 2026, शनि

INS Mangrol नौसेना में शामिल: तटीय पानी में दुश्मन पनडुब्बियों का शिकारी, 80% से ज़्यादा स्वदेशी

समुद्र में चलता माहे-क्लास एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट INS Mahe, INS Mangrol का सिस्टर जहाज़

मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को भारतीय नौसेना के बेड़े में एक और स्वदेशी जहाज़ जुड़ गया। नाम है INS Mangrol। यह माहे-क्लास का तीसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है, जिसे खास तौर पर तट के पास वाले कम गहरे पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और उनसे निपटने के लिए बनाया गया है।

कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (FOC-in-C) वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने की।

INS Mangrol क्या है और यह खास क्यों है?

गहरे समंदर में बड़े युद्धपोत काम आते हैं, लेकिन बंदरगाहों, हार्बर और तटीय रास्तों की हिफाज़त के लिए छोटे, फुर्तीले और कम पानी में चलने वाले जहाज़ चाहिए। INS Mangrol ठीक इसी काम के लिए तैयार किया गया है।

करीब 900 टन वज़न वाले इस जहाज़ को कोच्चि की कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने बनाया है। इसमें 80 प्रतिशत से ज़्यादा सामग्री स्वदेशी है। यह जहाज़ मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है।

हथियार और सेंसर: पनडुब्बी के लिए पूरा इंतज़ाम

  • अभय हल-माउंटेड सोनार – पानी के नीचे की हलचल पकड़ने के लिए
  • हल्के टॉरपीडो – पनडुब्बी पर सीधा वार
  • स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर
  • मारीच एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम – दुश्मन के टॉरपीडो को चकमा देने के लिए

इंजन और फुर्ती

जहाज़ में तीन डीज़ल इंजन और वॉटरजेट प्रोपल्शन लगा है। इसकी वजह से यह तेज़ी से मुड़ सकता है और तंग तटीय इलाकों में भी आसानी से पैंतरे बदल सकता है।

पनडुब्बी-रोधी मिशन के अलावा यह पानी के नीचे निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन और माइन वॉरफेयर में भी काम आएगा। ज़रूरत पड़ने पर यह समुद्री गश्ती विमान (MPA), हेलिकॉप्टरों और दूसरे जहाज़ों के साथ मिलकर ऑपरेशन कर सकता है।

नाम के पीछे की कहानी

जहाज़ का नाम गुजरात के जूनागढ़ ज़िले के मंगरोल फिशिंग हार्बर के नाम पर रखा गया है। दिलचस्प बात यह है कि नौसेना में यह नाम पहले भी रह चुका है। पुराना INS Mangrol (M85) एक माइनस्वीपर था, जो 7 अप्रैल 2004 तक सेवा में रहा। नया जहाज़ उसी विरासत को आगे ले जा रहा है।

अभय-क्लास कॉर्वेट की जगह लेंगे माहे-क्लास जहाज़

माहे-क्लास के ये जहाज़ नौसेना के पुराने अभय-क्लास कॉर्वेट की जगह ले रहे हैं, जो 1989 से 1991 के बीच सेवा में आए थे।

2013 में मंज़ूरी, अब दिख रहे नतीजे

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 2013 में ऐसे 16 जहाज़ों को मंज़ूरी दी थी। अक्टूबर 2017 में कोचीन शिपयार्ड और GRSE सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनियां बनकर उभरीं। CSL ने इसके लिए ₹5,400 करोड़ की बोली लगाई थी। INS Mangrol, CSL की ओर से बनाए जा रहे आठ ASW-SWC में से तीसरा है।

अब तक का सफर कुछ यूं रहा:

  • INS Mahe – 24 नवंबर 2025 को मुंबई में कमीशन
  • INS Malvan – 22 जुलाई 2026 को कारवार में कमीशन
  • INS Mangrol – 31 मार्च 2026 को डिलीवरी, 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कमीशन

वाइस एडमिरल वात्सायन ने गिनाए नौसेना के आंकड़े

समारोह में वाइस एडमिरल वात्सायन ने नौसेना के विस्तार की रफ्तार का पूरा हिसाब सामने रखा। उनके मुताबिक:

  • 2026 में नौसेना अब तक 10 जहाज़ कमीशन कर चुकी है, साल के अंत तक 8 और आने की उम्मीद है।
  • बेड़े में इस समय 151 प्लेटफॉर्म हैं, जिनमें 131 जहाज़ और 20 पनडुब्बियां शामिल हैं।
  • 42 जहाज़ अभी निर्माणाधीन हैं।
  • 69 जहाज़ों, 6 पनडुब्बियों और 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FIC) के लिए AoN यानी आवश्यकता की स्वीकृति मिल चुकी है।
  • आगे चलकर बेड़ा 170 से ज़्यादा प्लेटफॉर्म तक पहुंचने का अनुमान है।
  • फिलहाल हर 40-50 दिन में एक नया जहाज़ नौसेना में शामिल हो रहा है।
  • 2034 तक करीब 60% प्लेटफॉर्म 10 साल से कम पुराने होंगे।

तटीय सुरक्षा के लिए क्यों अहम?

तट के पास कम गहरे पानी में छिपी पनडुब्बी से बंदरगाहों को बचाने के लिए फुर्तीला जहाज़ ही असली ढाल बनता है। सोनार, टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर से लैस INS Mangrol यही भूमिका निभाएगा। माहे और मालवन के साथ अब यह तिकड़ी तटीय इलाकों में पनडुब्बी-रोधी सुरक्षा को और मज़बूत करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

INS Mangrol कब और कहां कमीशन हुआ?

INS Mangrol को सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया।

INS Mangrol किसने बनाया है?

इसे कोच्चि की कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने बनाया है। इसमें 80% से ज़्यादा स्वदेशी सामग्री है।

माहे-क्लास के कितने जहाज़ अब तक नौसेना में आ चुके हैं?

तीन – INS Mahe (नवंबर 2025), INS Malvan (जुलाई 2026) और अब INS Mangrol (अक्टूबर 2026)।

जहाज़ का नाम मंगरोल क्यों रखा गया?

नाम गुजरात के जूनागढ़ ज़िले के मंगरोल फिशिंग हार्बर पर रखा गया है। इसी नाम का माइनस्वीपर INS Mangrol (M85) 7 अप्रैल 2004 तक नौसेना में रहा था।

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