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7 नवम्बर 2026, शनि

ISRO की बड़ी कामयाबी: NVS-03 की पहली ऑर्बिट रेजिंग सफल, NavIC फिर चार उपग्रहों के साथ परिचालन स्थिति में

श्रीहरिकोटा से NVS-03 उपग्रह लेकर उड़ान भरता इसरो का GSLV-F18 रॉकेट

भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम NavIC के लिए अच्छी खबर है। इसरो (ISRO) के GSLV-F18 रॉकेट ने 30 अक्टूबर की रात श्रीहरिकोटा से अगली पीढ़ी का नेविगेशन उपग्रह NVS-03 सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचा दिया, और 31 अक्टूबर को उपग्रह की पहली कक्षा उन्नयन प्रक्रिया (orbit manoeuvre) भी सफल रही। इसरो के मुताबिक उपग्रह की सेहत सामान्य है। इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने कहा है कि इस मिशन की सफलता से NavIC तारामंडल न्यूनतम चार उपग्रहों वाली परिचालन स्थिति में लौट आया है।

लॉन्च से लेकर अब तक क्या हुआ

The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, GSLV-F18 ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी और करीब 18 मिनट बाद 2,250 किलो वजनी NVS-03 को तय जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया। इसरो की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उपग्रह को 30 अक्टूबर को रात 23:51 बजे 170.3 किमी x 38,080 किमी की कक्षा में छोड़ा गया।

इसके बाद 31 अक्टूबर को शाम 16:48 बजे पहली नियोजित कक्षा उन्नयन प्रक्रिया पूरी की गई। इसमें उपग्रह के LAM इंजन को 2,174.8 सेकंड तक चलाया गया, जिसके बाद कक्षा का अनुमानित आकार 5,477.6 किमी x 37,833.4 किमी हो गया। इसरो ने बताया है कि आने वाले दिनों में और मैन्यूवर किए जाएंगे, ताकि उपग्रह को अंततः 111.75 डिग्री पूर्व के जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट स्लॉट में स्थापित किया जा सके।

NVS-03 में क्या खास है

  • यह NVS सीरीज का तीसरा उपग्रह है, जो पुराने IRNSS उपग्रहों की जगह लेकर नेविगेशन सेवाओं की निरंतरता बनाए रखेगा।
  • इसमें स्वदेशी परमाणु घड़ी (एटॉमिक क्लॉक) के साथ आयातित घड़ियां भी लगी हैं।
  • मौजूदा L5 और S बैंड सिग्नल के अलावा इसमें L1 सिग्नल भी है, जो आम स्मार्टफोन और उपकरणों के साथ तालमेल आसान बनाता है।
  • इसकी कवरेज पूरे भारत और देश की सीमा से करीब 1,500 किमी आगे तक के इलाके में होगी।
  • उपग्रह की मिशन अवधि 12 साल रखी गई है।

NavIC को इसकी जरूरत क्यों थी

NavIC (Navigation with Indian Constellation) भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली है, जो पोजिशन, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सेवाएं देती है। पिछले कुछ सालों में इसके कई उपग्रहों की परमाणु घड़ियां खराब होने से यह प्रणाली कमजोर पड़ गई थी। The Hindu के मुताबिक, इसी साल 13 मार्च को IRNSS-1F की आखिरी काम कर रही परमाणु घड़ी भी बंद हो गई थी। इससे पहले NVS-02 उपग्रह अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था।

डॉ. नारायणन ने कहा कि कक्षा में पहले से तीन उपग्रह ठीक काम कर रहे हैं और NVS-03 के साथ यह संख्या चार हो जाएगी, जिससे देश की PNT सेवाएं बहाल होंगी। उन्होंने NavIC को “रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति” बताया, जिसका इस्तेमाल ट्रेनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग, वाहनों और जहाजों की निगरानी जैसे नागरिक कामों में भी होता है, और यह “वन नेशन वन टाइम” परियोजना का भी अहम हिस्सा है।

इसरो के लिए क्यों अहम है यह सफलता

यह 2026 में इसरो का सिर्फ तीसरा मिशन था। साल की शुरुआत में 12 जनवरी को PSLV-C62 मिशन (EOS-N1 उपग्रह) विफल रहा था, जबकि 4 सितंबर को GSLV-F17 से EOS-05 का प्रक्षेपण सफल रहा। इसरो प्रमुख के मुताबिक, लगातार दो GSLV मिशनों के बीच सिर्फ 56 दिन का अंतर रहा, जो अब तक का सबसे कम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी X पर इसरो को बधाई देते हुए इसे NavIC को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

आम लोगों के लिए NavIC का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत को लोकेशन और सटीक समय के लिए अमेरिकी GPS जैसे विदेशी सिस्टम पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। आपदा, युद्ध या किसी संकट के समय भी देश की अपनी नेविगेशन सेवा चालू रहेगी। मछुआरों के अलर्ट, वाहनों की ट्रैकिंग, रेलवे, बिजली ग्रिड और बैंकिंग नेटवर्क की टाइमिंग जैसी सेवाएं इससे और भरोसेमंद होंगी। कई नए स्मार्टफोन चिपसेट NavIC को सपोर्ट करते हैं, और L1 सिग्नल आने से आगे ऐसे उपकरणों की संख्या बढ़ सकती है।

आगे के कदमों की बात करें तो NVS-03 को अभी कई और कक्षा उन्नयन प्रक्रियाओं से गुजरना है। अंतिम स्लॉट में पहुंचने और इन-ऑर्बिट टेस्टिंग पूरी होने के बाद ही यह पूरी तरह सेवा में आएगा। इसरो की ओर से अगले अपडेट पर TrendFlash की नजर रहेगी।

स्रोत: ISRO आधिकारिक अपडेट, The Hindu, Indian Express।

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