दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। 12 अक्टूबर को संशोधित स्टैंडिंग ऑर्डर जारी कर जगह को डिनोटिफाई कर दिया गया। अब शांतिपूर्ण विरोध के लिए तीन वैकल्पिक स्थान बताए गए हैं—बुराड़ी ग्राउंड, रामलीला मैदान/ग्राउंड और CBD ग्राउंड (शाहदरा)।
पुलिस का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के सुझाव के अनुसरण में लिया गया। शीर्ष अदालत ने बुनियादी सुविधाओं वाले उपयुक्त वैकल्पिक स्थल चिन्हित करने को कहा था, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रह सकें।
हाईकोर्ट में क्या हुआ
भारतीय युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट (न्यायमूर्ति अमित महाजन) में सुनवाई हुई। चिब ने पहले अनुमति न मिलने को चुनौती दी थी; अब डिनोटिफिकेशन को भी चुनौती दी जा रही है। उनके वकील लूथरा ने कहा कि याचिका निरर्थक (infructuous) नहीं हुई है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को पुलिस का पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया। अगली सुनवाई 17 नवंबर तय हुई। न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि बचा हुआ मुद्दा “अकादमिक” प्रकृति का लग रहा है—यानी मुख्य विवाद का स्वरूप बदल चुका है, फिर भी कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
जंतर मंतर क्यों मायने रखता था
दशकों पहले बोट क्लब इलाके पर पाबंदियों के बाद जंतर मंतर दिल्ली में मुख्य प्रदर्शन हब बन गया था। किसान, छात्र, राजनीतिक दल, नागरिक समूह—सभी ने वहां धरना-प्रदर्शन किए। सेंट्रल दिल्ली में होने की वजह से मीडिया और प्रशासन दोनों की नजर आसानी से पड़ती थी। अब उसी जगह को आधिकारिक सूची से हटाना विपक्ष और कई संगठनों को नागवार गुजरा है।
विकल्प के तीनों स्थान भौगोलिक रूप से अलग हैं। बुराड़ी उत्तर दिल्ली की तरफ, रामलीला मैदान अपेक्षाकृत केंद्र के करीब, और CBD ग्राउंड शाहदरा में पूर्व की ओर। आयोजकों को अब दूरी, अनुमति प्रक्रिया और सुविधाओं का नया हिसाब लगाना होगा।
आप पर क्या असर पड़ेगा
अगर आप दिल्ली में शांतिपूर्ण धरना या रैली निकालना चाहते हैं, तो पुरानी आदत से जंतर मंतर पहुंचने से पहले नई स्टैंडिंग ऑर्डर चेक करें। बिना अनुमति के जमावड़ा कानूनी अड़चन पैदा कर सकता है। व्यावहारिक रूप से:
- आयोजन से पहले दिल्ली पुलिस से लिखित अनुमति लें
- तीन अधिसूचित विकल्पों—बुराड़ी, रामलीला, CBD—में से उपयुक्त जगह चुनें
- पानी, शौचालय, मेडिकल जैसी बुनियादी सुविधाओं का बंदोबस्त खुद या प्रशासन से सुनिश्चित करें
- HC की 17 नवंबर सुनवाई तक नीति में कोई अंतरिम बदलाव हो तो आधिकारिक आदेश देखें
आम दिल्लीवासी के लिए ट्रैफिक और इलाके की भीड़ का पैटर्न बदल सकता है। जंतर मंतर के आसपास प्रदर्शन कम होने पर सेंट्रल जोन में दबाव घट सकता है, लेकिन रामलीला या बुराड़ी की तरफ स्थानीय प्रभाव बढ़ेगा। पृष्ठभूमि याद रखें: अदालत ने वैकल्पिक स्थल सुझाए थे, पुलिस ने सूची बदली, और युवा कांग्रेस की याचिका अभी जीवित है—अंतिम तस्वीर नवंबर की सुनवाई के बाद और साफ हो सकती है।
आगे क्या
राजनीतिक दल डिनोटिफिकेशन को अभिव्यक्ति पर अंकुश बता रहे हैं; प्रशासन इसे सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शन पर व्यवस्था बता रहा है। दोनों दावों के बीच आम नागरिक को चाहिए कि अनुमति और स्थान की सही जानकारी रखे। जंतर मंतर ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल भी है—प्रदर्शन नीति बदलने से पर्यटक आवाजाही अलग मुद्दा रहेगा, प्रदर्शन का अधिकार अलग।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जंतर मंतर को कब डिनोटिफाई किया गया?
दिल्ली पुलिस के 12 अक्टूबर के संशोधित स्टैंडिंग ऑर्डर से।
अब विरोध कहां कर सकते हैं?
पुलिस ने तीन विकल्प बताए—बुराड़ी ग्राउंड, रामलीला मैदान और CBD ग्राउंड (शाहदरा)। अनुमति जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट का क्या संबंध है?
9 अक्टूबर को SC ने बुनियादी सुविधाओं वाले वैकल्पिक स्थल चिन्हित करने का सुझाव दिया था; पुलिस कहती है उसी के अनुसरण में कदम उठाया।
हाईकोर्ट में अगली तारीख क्या है?
17 नवंबर। कोर्ट ने नोटिस जारी किया है; न्यायमूर्ति ने शेष मुद्दे को अकादमिक बताया।
स्रोत: Indian Express, Times of India (13 अक्टूबर 2026)। यह रिपोर्ट केवल डिनोटिफिकेशन नीति और HC सुनवाई तक सीमित है।
चित्र: Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) — Jantar Mantar Protest, Delhi

