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7 नवम्बर 2026, शनि

महाराष्ट्र SIR: कटे नाम वाले वोटरों को सुप्रीम कोर्ट का भरोसा, फॉर्म 6 भरने पर नहीं चलेगा मुकदमा; चुनाव आयोग को नोटिस, 5 नवंबर को सुनवाई

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की इमारत (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान जिन लोगों के नाम कट गए हैं, उनके लिए सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट से राहत भरी बात आई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान मौखिक तौर पर भरोसा दिलाया कि ऐसे मतदाता अगर दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरते हैं, तो उन पर कोई मुकदमा नहीं चलेगा। CJI ने कहा, “Nobody will be prosecuted” यानी “किसी पर मुकदमा नहीं चलेगा।”

कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 5 नवंबर को तय की है। हालांकि, कोर्ट ने आयोग का पक्ष सुने बिना दावे-आपत्ति की तारीख बढ़ाने या अंतिम सूची के प्रकाशन पर रोक लगाने जैसा कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया।

किस मामले में हुई सुनवाई?

यह याचिका अरुण अनंतगिरि (Arun Anandagiri) ने दायर की है, जिसमें महाराष्ट्र में चल रहे SIR को चुनौती दी गई है (W.P.(C) No. 1330/2026)। मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच ने की, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी. दातार पेश हुए।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?

लाइव लॉ, इंडियन एक्सप्रेस और द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, दातार ने कोर्ट में ये मुख्य बातें रखीं। ध्यान रहे, ये आंकड़े याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए हैं, चुनाव आयोग का जवाब अभी आना बाकी है:

  • बड़ी संख्या में नाम कटे: दातार के अनुसार, राज्य के करीब 9 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 33% यानी करीब 3 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची के बाद हटा दिए गए। इनमें करीब 1.22 करोड़ नाम “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” (रिकॉर्ड में तार्किक गड़बड़ी) के आधार पर हटाए गए।
  • पुणे-मुंबई में हालत ज्यादा खराब: उन्होंने कहा कि पुणे और मुंबई के कुछ हिस्सों में करीब 40% मतदाता सूची से गायब हैं।
  • रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट की वजह: द हिंदू के मुताबिक, दातार ने बताया कि मुंबई में करीब 3,500 और पुणे में करीब 1,500 पुरानी इमारतों के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें रहने वाले हजारों लोग अस्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हुए, सर्वे में उन्हें “अनुपस्थित” या “व्यक्ति नहीं मिला” मानकर उनके नाम काट दिए गए।
  • फॉर्म 6 की उलझन: कटे नाम वाले लोगों से नए मतदाता की तरह फॉर्म 6 भरने को कहा जा रहा है, जबकि यह फॉर्म पहली बार नाम जुड़वाने वालों के लिए है।

फॉर्म 6 से डर क्यों था?

फॉर्म 6 मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने का आवेदन है। दातार की दलील थी कि इसमें आवेदक को यह घोषणा करनी पड़ती है कि वह पहले कहीं मतदाता के तौर पर दर्ज नहीं है। ऐसे में जो व्यक्ति पहले से वोटर था और SIR में उसका नाम कट गया, वह अगर फॉर्म 6 भरता है तो उस पर गलत घोषणा करने का आरोप लग सकता है। जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 31 के तहत मतदाता सूची से जुड़ी झूठी घोषणा दंडनीय अपराध है।

दातार ने यह भी बताया कि हाल में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कहा था कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी, “लेकिन यह पर्याप्त जवाब नहीं है।” उनकी मांग थी कि SIR में कटे नाम वाले मतदाताओं के लिए अलग फॉर्म अधिसूचित किया जाए। इसी पर CJI ने कहा, “चिंता मत कीजिए, किसी पर मुकदमा नहीं चलेगा।” CJI ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा, “आप व्हिसलब्लोअर हैं, आप हमारे पास आए हैं, बाकी हम देख लेंगे।”

तारीख बढ़ाने की मांग पर कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट को बताया गया कि 26 अक्टूबर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की आखिरी तारीख है और अंतिम मतदाता सूची 6 नवंबर को प्रकाशित होनी है। दातार ने अनुरोध किया कि महाराष्ट्र में फिलहाल कोई चुनाव नहीं है, इसलिए सूची को अभी अंतिम रूप न दिया जाए, क्योंकि “एक बार सूची फाइनल हो गई तो उसे सुधारना मुश्किल होगा।”

उन्होंने कोर्ट से कम से कम यह कहने का आग्रह किया कि आज के बाद आने वाली आपत्तियों पर भी विचार हो। इस पर CJI ने कहा कि ऐसा कहना तारीख बढ़ाने जैसा ही होगा और यह चुनाव आयोग को सुनने के बाद ही किया जाएगा। CJI ने यह भी कहा कि अगर कोर्ट को लगा कि लोगों को दस्तावेज जमा करने के लिए और समय चाहिए, तो उचित निर्देश दिए जाएंगे, और दूसरे राज्यों के SIR मामलों में कोर्ट पहले भी तारीखें बढ़ाता रहा है।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

अगर आप महाराष्ट्र के मतदाता हैं, खासकर मुंबई या पुणे में रहते हैं और हाल में घर बदला है या आपकी बिल्डिंग रीडेवलपमेंट में गई है, तो यह खबर सीधे आपसे जुड़ी है:

  • पहले अपना नाम जांचें: चुनाव आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल (voters.eci.gov.in) या Voter Helpline ऐप पर EPIC नंबर या नाम से अपना नाम सर्च करें।
  • नाम कटा है तो डरें नहीं: कोर्ट के मौखिक भरोसे के बाद फॉर्म 6 भरकर दोबारा नाम जुड़वाने में मुकदमे का डर कम हुआ है। ध्यान रहे, यह अभी मौखिक टिप्पणी है, लिखित आदेश नहीं।
  • दस्तावेज तैयार रखें: पहचान और पते के प्रमाण, पुराना वोटर आईडी (अगर हो) और फोटो साथ रखें। मदद के लिए अपने इलाके के BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) से भी संपर्क कर सकते हैं।
  • देरी न करें: दावे-आपत्ति की तारीख बढ़ेगी या नहीं, यह 5 नवंबर की सुनवाई के बाद ही साफ होगा। इसलिए जितनी जल्दी हो सके आवेदन करना बेहतर है।

आगे क्या?

अब सबकी नजर 5 नवंबर की सुनवाई पर है, जब चुनाव आयोग अपना जवाब देगा। यह सुनवाई 6 नवंबर को अंतिम सूची के प्रकाशन से ठीक एक दिन पहले होगी। कोर्ट तय कर सकता है कि दावे-आपत्ति की समय-सीमा बढ़े या नहीं, और कटे नाम वाले मतदाताओं के लिए अलग फॉर्म की मांग पर क्या रुख रहेगा। चुनाव आयोग ने कोर्ट में अब तक इन आंकड़ों पर अपना पक्ष नहीं रखा है, इसलिए पूरी तस्वीर उसके जवाब के बाद ही साफ होगी। TrendFlash इस मामले पर नजर बनाए रखेगा।

स्रोत: LiveLaw, The Indian Express, The Hindu, Deccan Herald (26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट्स)।

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